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Deoria News: बिना इंतजाम कर रहे एक्स-रे, रेडिएशन का खतरा
Fri, 29 Nov 2024 01:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 29 Nov 2024 01:30 AM IST
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देवरिया। मेडिकल कॉलेज में डिजिटल एक्स-रे की सुविधा हैं, लेकिन रेडिएशन से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। बिना सेफ्टी और टीएलडी बैज के कार्य होता है, जिससे टेक्नीशियनों पर रेडिएशन के प्रभाव का पता नहीं चल पाता है।
दरवाजा खुला और टूटा होने के कारण तीमारदार को भी रेडिएशन लगता है। रेडिएशन का कर्मियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। अधिक रेडिएशन लगने पर कर्मी को अवकाश आदि की सुविधा दी जाती है, लेकिन इस तरह की व्यवस्था नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे की निशुल्क व्यवस्था है। अस्पताल में मरीजों की भीड़ होती है। ओपीडी के विभिन्न विभागों और वार्ड में भर्ती मरीजों को जरूरत के मुताबिक डॉक्टर एक्स-रे लिखते हैं।
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अस्पताल में भीड़ को देखते हुए मरीजों की सहूलियत में लिए तीन जगह एक्स-रे होता है, जबकि एक जगह मेडिकोलीगल के लिए होता है। इसमें दो डिजिटल सेंटर है, इसमें एक में कम जांच होती है, जबकि ओपीडी में पोर्टेबल डिजिटल मशीन से एक्स-रे होता है।
इन स्थानों पर रेडिएशन से बचाव के लिए टेक्नीशियन को लेड एप्रन, रेडिएशन नापने के लिए टीएलडी बैज, गोनैट सील्ड, गले में लगाने का बेल्ट, आंख पर लेड लगा चश्मा, लेड शीशा लगा कंसोल, दरवाजे पर लेड लगा होना चाहिए। टीएलडी बैज को टेक्नीशियन ड्यूटी के समय जेब पर लगाते हैं।
हर तीन माह पर उसे आरएसओ जांच के लिए महाराष्ट्र भेजा जाता है। अधिक रेडिएशन होने पर स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में कर्मी को कुछ दिन के लिए रेडिएशन एरिया से दूर रखा जाता है। रेडिएशन कम होने पर उससे जांच कराई जाती है। यहां सीनियर टेक्नीशियन को लेकर छह टेक्नीशियन हैं।
इसमें किसी को भी टीएलडी बैज अब तक नहीं मिला है, जबकि सुरक्षा के अन्य उपकरण में मात्र एप्रन है। वहीं र्पोटेबल डिजिटल एक्स-रे कक्ष में कंसोल नहीं बना है। लेड प्रोटेक्शन बैरियर से काम चलाया जा रहा है। एक्स-रे करने पर किरणें निकलती हैं, जो नुकसानदेह होती हैं। ऐसे में सुविधा न होने से रेडिएशन का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए रेडिएशन से बचाव के पुख्ता इंतजाम की जरूरत है।
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दरवाजा खुला और टूटा होने के कारण तीमारदार को भी रेडिएशन लगता है। रेडिएशन का कर्मियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। अधिक रेडिएशन लगने पर कर्मी को अवकाश आदि की सुविधा दी जाती है, लेकिन इस तरह की व्यवस्था नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे की निशुल्क व्यवस्था है। अस्पताल में मरीजों की भीड़ होती है। ओपीडी के विभिन्न विभागों और वार्ड में भर्ती मरीजों को जरूरत के मुताबिक डॉक्टर एक्स-रे लिखते हैं।
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अस्पताल में भीड़ को देखते हुए मरीजों की सहूलियत में लिए तीन जगह एक्स-रे होता है, जबकि एक जगह मेडिकोलीगल के लिए होता है। इसमें दो डिजिटल सेंटर है, इसमें एक में कम जांच होती है, जबकि ओपीडी में पोर्टेबल डिजिटल मशीन से एक्स-रे होता है।
इन स्थानों पर रेडिएशन से बचाव के लिए टेक्नीशियन को लेड एप्रन, रेडिएशन नापने के लिए टीएलडी बैज, गोनैट सील्ड, गले में लगाने का बेल्ट, आंख पर लेड लगा चश्मा, लेड शीशा लगा कंसोल, दरवाजे पर लेड लगा होना चाहिए। टीएलडी बैज को टेक्नीशियन ड्यूटी के समय जेब पर लगाते हैं।
हर तीन माह पर उसे आरएसओ जांच के लिए महाराष्ट्र भेजा जाता है। अधिक रेडिएशन होने पर स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में कर्मी को कुछ दिन के लिए रेडिएशन एरिया से दूर रखा जाता है। रेडिएशन कम होने पर उससे जांच कराई जाती है। यहां सीनियर टेक्नीशियन को लेकर छह टेक्नीशियन हैं।
इसमें किसी को भी टीएलडी बैज अब तक नहीं मिला है, जबकि सुरक्षा के अन्य उपकरण में मात्र एप्रन है। वहीं र्पोटेबल डिजिटल एक्स-रे कक्ष में कंसोल नहीं बना है। लेड प्रोटेक्शन बैरियर से काम चलाया जा रहा है। एक्स-रे करने पर किरणें निकलती हैं, जो नुकसानदेह होती हैं। ऐसे में सुविधा न होने से रेडिएशन का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए रेडिएशन से बचाव के पुख्ता इंतजाम की जरूरत है।