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Deoria News: बरहजिया न हो तो सफर करना हो जाएगा मुश्किल
Wed, 24 Sep 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। स्थानीय स्टेशन से बरहजिया ट्रेन भटनी और सलेमपुर स्टेशन तक सिमट कर रह गई है। पूरे दिन में ट्रेन भटनी और सलेमपुर का दो चक्कर लगाती है।
इस रूट से आने-जाने वाले यात्रियों का कहना है कि बरहज स्टेशन से दिल्ली, लखनऊ, मुंबई आदि जगहों के लिए रेल सेवा नहीं है। लोग ट्रेन चलवाने की मांग कर रहे हैं। बरहज की पहचान औद्योगिक, आध्यात्मिक और शिक्षा से रहा है। ब्रितानी हुकूमत में जलमार्ग से होने वाली कठिनाइयों को लेकर अंग्रेजों ने भटनी-सलेमपुर-बरहज रूट के लिए रेल लाइन बिछवाई थी। यहां से रेल सेवा के जरिये कोलकाता आदि जगहों सहित देश-विदेश से व्यापार होता था। आजादी के बाद बरहजिया ट्रेन सलेमपुर-भटनी तक पैसेंजर ट्रेन बनकर रह गई है।
रविवार को ट्रेन दिन में दो फेरा ही लगाती है। बरहज से लंबी दूरी के लिए कोई ट्रेन नहीं होने से लोगों को देवरिया, गोरखपुर, बेल्थरा आदि जगहों से ट्रेन पकड़ना मजबूरी हो जाता है। जगदीश जायसवाल, चंद्रप्रकाश, बिरजानंद, चिंतामणि साहनी आदि का कहना है कि इस रूट से हजारों लोगों की आवाजाही होती है, मगर लंबी दूरी की कोई ट्रेन नहीं होने से मंत्रालय को नुकसान उठाना पड़ता था।
इसकी भरपाई के लिए कंप्यूटरीकृत आरक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। इससे प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख की आय होती है।
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बरहज। स्थानीय स्टेशन से बरहजिया ट्रेन भटनी और सलेमपुर स्टेशन तक सिमट कर रह गई है। पूरे दिन में ट्रेन भटनी और सलेमपुर का दो चक्कर लगाती है।
इस रूट से आने-जाने वाले यात्रियों का कहना है कि बरहज स्टेशन से दिल्ली, लखनऊ, मुंबई आदि जगहों के लिए रेल सेवा नहीं है। लोग ट्रेन चलवाने की मांग कर रहे हैं। बरहज की पहचान औद्योगिक, आध्यात्मिक और शिक्षा से रहा है। ब्रितानी हुकूमत में जलमार्ग से होने वाली कठिनाइयों को लेकर अंग्रेजों ने भटनी-सलेमपुर-बरहज रूट के लिए रेल लाइन बिछवाई थी। यहां से रेल सेवा के जरिये कोलकाता आदि जगहों सहित देश-विदेश से व्यापार होता था। आजादी के बाद बरहजिया ट्रेन सलेमपुर-भटनी तक पैसेंजर ट्रेन बनकर रह गई है।
रविवार को ट्रेन दिन में दो फेरा ही लगाती है। बरहज से लंबी दूरी के लिए कोई ट्रेन नहीं होने से लोगों को देवरिया, गोरखपुर, बेल्थरा आदि जगहों से ट्रेन पकड़ना मजबूरी हो जाता है। जगदीश जायसवाल, चंद्रप्रकाश, बिरजानंद, चिंतामणि साहनी आदि का कहना है कि इस रूट से हजारों लोगों की आवाजाही होती है, मगर लंबी दूरी की कोई ट्रेन नहीं होने से मंत्रालय को नुकसान उठाना पड़ता था।
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इसकी भरपाई के लिए कंप्यूटरीकृत आरक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। इससे प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख की आय होती है।