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Deoria News: सूडान से वतन वापसी का नहीं था यकीन, सही सलामत आ गए तो लगा जैसे दूसरा जीवन मिला
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सूडान से लौटने वाले देवरिया के युवको का कलेक्ट्रेट में किया गया स्वागत।संवाद
जिले के आठ लोगों को पहुंचाया गया उनके घर, आंखों में दिखा वहां का भयानक मंजर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सूडान में फंसे जिले के आठ लोग वतन वापसी के बाद बृहस्पतिवार शाम आठ बजे अपने घर रोडवेज बस से पहुंचाए गए। जिला मुख्यालय पहुंचने पर प्रशासन के अधिकारियों व रोडवेज के अधिकारियों ने इनका स्वागत किया। इनकी आंखों में वहां का भयंकर मंजर साफ दिख रहा था। अपने जिले जवार में पहुंचने के बाद उन्हें लग गया कि अब वह सही सलामत अपने घर भी पहुंच जाएंगे। वह बार-बार भारतीय दूतावास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका श्रेय दे रहे थे।
घर के आर्थिक हालात देखकर और खुद को मजबूत बनाने का आत्मविश्वास लेकर सूडान पहुंचे यह युवक वहां ओमेगा नामक स्टील कंपनी, एक फ्रेबिकेशन कंपनी में मैकेनिक, फीडर, वेल्डर का काम कर रहे थे। अभी इनके वीजा की समयावधि भी पूरी नहीं हुई थी। लेकिन सूडान में गृहयुद्घ जैसे हालात ने बीच समय में ही इन्हें घर लौटने को मजबूर कर दिया। इनकी आंखों में वहां के गूंजते बम, गोलीबारी, लूटपाट का पूरा मंजर साफ-साफ दिखा, सही सलामत घर वापसी को वह अपना दूसरा जन्म होने जैसा मान रहे थे। भलुअनी के फुलवरिया निवासी अर्जुन यादव पुत्र नरसिंह यादव ने बताया कि नवंबर माह में ही गए थे। 40 हजार महीना व कंपनी की ओर से खाना व मेडिकल की सुविधा थी। लेकिन बीच समय में ही वापस लौटना पड़ेेगा यह नहीं सोचा था। सलेमपुर क्षेत्र के चनुकी घाट के विनोद शाह पुत्र धर्मदेव शाह ने बताया कि वह तीन साल से वही रह रहे हैं। चार माह पहले पुन:सूडान गए थे। बघौचघाट पकहा के दशरथ कुशवाहा पुत्र शंभू कुशवाहा ने बताया कि 14 माह पूर्व गए थे। एक मिल में फीडर का कार्य कर रहे थे। कंपनी ने ही 18 बसों में डीजल दिया तो बंदरगाह पर आए। सूडान की राजधानी खार्तून की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। सेना और पैरा मिलेट्री फोर्स वहां आपस में ही लड़ रहे हैं। पथरदेवा के भुल्लीपट्टी निवासी विकास पुत्र सत्यनारायण ने बताया कि 17 माह पूर्व गए थे। तीन दिन पहले सूडान से चलने की प्रक्रिया शुरू हुई। कंपनी की बस से पहले बंदरगाह आए। यहां पानी की जहाज से सऊदी अरब के जेद्दा आए। इसके बाद वहां से फ्लाइट से दिल्ली बुुधवार की रात में आए। रात्रि एक बजे ही दिल्ली से बस से अपने जिला पहुंचे, अब लग रहा है कि घर पहुंच जाएंगे। अपने देश के जहाज में जब आ गए तब जान में जान आई और विश्वास हो गया कि अब वापसी तय है।
-- -- -- -- - स्पीकअप -- -- --
दिसंबर माह में गए थे। एक फ्रेबिकेशन कंपनी में वेल्डर का काम करते थे। सूडान के हालात 15 अप्रैल के बाद से ही बहुत खराब है। 50 से 100 मीटर पर बम फूट रहे थे और गोलियां चल रही थी। लग रहा था कि यहां पर बचना मुश्किल है।
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....जितेंद्र चौरसिया, कुकुरघांटी-- -- -- --
सही सलामत अपने देश व घर पहुंच जाएंगे, वहां रहते हुए नहीं लग रहा था। वहां एक कंपनी में आपरेटर थे। प्रधानमंत्री मोदीजी व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एवं भारतीय दूतावास ने हमारे लिए जो किया वह ताउम्र भूल नहीं पाऊंगा।
....प्रमोद यादव, दोहनी
-- -- -- -- सूडान में जेली नामक जगह पर एक स्टील प्लांट में मैकेनिक का कार्य कर रहे थे। इस हालात में देश वापसी हो पाएगी यह सपने में भी नहीं लग रहा था। मौत अब और तब आई जैसी स्थिति वहां हो गई थी।
...जितेंद्र गुप्ता, मायापुर खामपार-- -- -- -- -
आठ माह पहले ही गए थे। वहां एक स्टील कंपनी में मैकेनिक के रूप में कार्य कर रहे थे। सोचा था कि पैसे कमाकर घर की आर्थिक स्थिति दूर करूंगा, हालांकि वीजा खत्म होने के पहले ही आना पड़ा। अब लग रहा जान बच गई तो सबकुछ मिल गया, अब वहां जाने की सोचेंगे भी नहीं।
......संतोष चौरसिया, मझगांवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सूडान में फंसे जिले के आठ लोग वतन वापसी के बाद बृहस्पतिवार शाम आठ बजे अपने घर रोडवेज बस से पहुंचाए गए। जिला मुख्यालय पहुंचने पर प्रशासन के अधिकारियों व रोडवेज के अधिकारियों ने इनका स्वागत किया। इनकी आंखों में वहां का भयंकर मंजर साफ दिख रहा था। अपने जिले जवार में पहुंचने के बाद उन्हें लग गया कि अब वह सही सलामत अपने घर भी पहुंच जाएंगे। वह बार-बार भारतीय दूतावास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका श्रेय दे रहे थे।
घर के आर्थिक हालात देखकर और खुद को मजबूत बनाने का आत्मविश्वास लेकर सूडान पहुंचे यह युवक वहां ओमेगा नामक स्टील कंपनी, एक फ्रेबिकेशन कंपनी में मैकेनिक, फीडर, वेल्डर का काम कर रहे थे। अभी इनके वीजा की समयावधि भी पूरी नहीं हुई थी। लेकिन सूडान में गृहयुद्घ जैसे हालात ने बीच समय में ही इन्हें घर लौटने को मजबूर कर दिया। इनकी आंखों में वहां के गूंजते बम, गोलीबारी, लूटपाट का पूरा मंजर साफ-साफ दिखा, सही सलामत घर वापसी को वह अपना दूसरा जन्म होने जैसा मान रहे थे। भलुअनी के फुलवरिया निवासी अर्जुन यादव पुत्र नरसिंह यादव ने बताया कि नवंबर माह में ही गए थे। 40 हजार महीना व कंपनी की ओर से खाना व मेडिकल की सुविधा थी। लेकिन बीच समय में ही वापस लौटना पड़ेेगा यह नहीं सोचा था। सलेमपुर क्षेत्र के चनुकी घाट के विनोद शाह पुत्र धर्मदेव शाह ने बताया कि वह तीन साल से वही रह रहे हैं। चार माह पहले पुन:सूडान गए थे। बघौचघाट पकहा के दशरथ कुशवाहा पुत्र शंभू कुशवाहा ने बताया कि 14 माह पूर्व गए थे। एक मिल में फीडर का कार्य कर रहे थे। कंपनी ने ही 18 बसों में डीजल दिया तो बंदरगाह पर आए। सूडान की राजधानी खार्तून की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। सेना और पैरा मिलेट्री फोर्स वहां आपस में ही लड़ रहे हैं। पथरदेवा के भुल्लीपट्टी निवासी विकास पुत्र सत्यनारायण ने बताया कि 17 माह पूर्व गए थे। तीन दिन पहले सूडान से चलने की प्रक्रिया शुरू हुई। कंपनी की बस से पहले बंदरगाह आए। यहां पानी की जहाज से सऊदी अरब के जेद्दा आए। इसके बाद वहां से फ्लाइट से दिल्ली बुुधवार की रात में आए। रात्रि एक बजे ही दिल्ली से बस से अपने जिला पहुंचे, अब लग रहा है कि घर पहुंच जाएंगे। अपने देश के जहाज में जब आ गए तब जान में जान आई और विश्वास हो गया कि अब वापसी तय है।
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दिसंबर माह में गए थे। एक फ्रेबिकेशन कंपनी में वेल्डर का काम करते थे। सूडान के हालात 15 अप्रैल के बाद से ही बहुत खराब है। 50 से 100 मीटर पर बम फूट रहे थे और गोलियां चल रही थी। लग रहा था कि यहां पर बचना मुश्किल है।
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....जितेंद्र चौरसिया, कुकुरघांटी
सही सलामत अपने देश व घर पहुंच जाएंगे, वहां रहते हुए नहीं लग रहा था। वहां एक कंपनी में आपरेटर थे। प्रधानमंत्री मोदीजी व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एवं भारतीय दूतावास ने हमारे लिए जो किया वह ताउम्र भूल नहीं पाऊंगा।
....प्रमोद यादव, दोहनी
...जितेंद्र गुप्ता, मायापुर खामपार
आठ माह पहले ही गए थे। वहां एक स्टील कंपनी में मैकेनिक के रूप में कार्य कर रहे थे। सोचा था कि पैसे कमाकर घर की आर्थिक स्थिति दूर करूंगा, हालांकि वीजा खत्म होने के पहले ही आना पड़ा। अब लग रहा जान बच गई तो सबकुछ मिल गया, अब वहां जाने की सोचेंगे भी नहीं।
......संतोष चौरसिया, मझगांवा