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महिला शिक्षक के विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण को अवैध घोषित किया गया
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महिला शिक्षक के विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण को अवैध घोषित किया गया
कूटरचित ढंग से विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने की हुई पुष्टि, डायट प्राचार्य ने की विधिक कार्रवाई की संस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गोरखपुर जिले के एक परिषदीय विद्यालय में नियुक्त एक महिला शिक्षक के विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को डॉयट प्राचार्य ने अवैध घोषित कर दिया है। उस पर विकलांग प्रमाण पत्र कूटरचित ढंग से तैयार करने का आरोप लगा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई है। प्राचार्य ने उस पर विधिक कार्रवाई करने की संस्तुति कर दी है। ऐसे में यह तय है कि महिला शिक्षक को अब नौकरी से भी हाथ गंवाना पड़ेेगा।
डॉयट प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को बताया कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2008 में आवेदन करने के लिए 21 जनवरी वर्ष 2009 को विज्ञप्ति प्रकाशित करने का आदेश जारी किया गया। इसमें आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2009 निर्धारित की गई। इसके लिए चित्रलेखा कुमारी पुत्री स्व. हंसनाथ सिंह, निवासी शिवपुरी सहबाजगंज, पादरी बाजार, गोरखपुर का आवेदन कार्यालय को पंजीकृत डाक से प्राप्त हुआ था। उसके मूल आवेदन पत्र के साथ विकलांगता प्रमाण पत्र संलग्न नहीं था। आवेदन पत्र में अंतिम विवरण के आधार पर इसका नाम जांच सूची में प्रकाशित हुआ है। 8 अक्तूबर वर्ष 2009 को चित्रलेखा ने अपनी काउंसलिंग के दौरान विकलांग प्रमाण पत्र संख्या 4299 कटिंग किए गए दिनांक 19 जनवरी वर्ष 2009 एवं 9 मार्च 2009 के आधार पर कराई गई और चयनित होकर उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया। काउंसलिंग के समय प्रस्तुत विकलांग प्रमाण पत्र को सत्यापन के लिए जब भेजा गया तो विशिष्ट बीटीसी वर्ष 2008 में चयन के लिए इसकी ओर से काउंसलिंग के समय प्रस्तुत विकलांगता प्रमाण पत्र का निर्गत तिथि आवेदन के तिथि के बाद का होने के कारण अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने के तीन मौके दिए गए। हालांकि, उसने इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण नहीं दिया। डॉयट प्राचार्य ने बताया कि स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने एवं सीएमओ गोरखपुर से प्राप्त आख्या के आधार पर यह सिद्ध होता है कि इसने कूटरचित ढंग से अपना चयन विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के लिए कराया। उसी के आधार पर यह चयनित होकर सहायक अध्यापिका के पद पर नौकरी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पुराना प्रकरण था। निदेशालय स्तर से प्रदेश के सभी विकलांग अभ्यर्थियों के विकलांग प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। इसी प्रक्रिया के आधार पर इस महिला अभ्यर्थी के विकलांगता प्रमाण पत्र की तिथि में गड़बड़झाला किए जाने का पता चला। उसके प्रशिक्षण को निरस्त मानते हुए इनको प्रदत्त विशिष्ट बीटीसी प्रमाण पत्र को अवैध घोषित किया जाता है तथा इसके खिलाफ विधिक कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। इसकी रिपोर्ट भी परीक्षा नियामक को भेज दी गई है। बीएसए गोरखपुर को भी इस बारे में सूचित किया जाएगा।
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कूटरचित ढंग से विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने की हुई पुष्टि, डायट प्राचार्य ने की विधिक कार्रवाई की संस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गोरखपुर जिले के एक परिषदीय विद्यालय में नियुक्त एक महिला शिक्षक के विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को डॉयट प्राचार्य ने अवैध घोषित कर दिया है। उस पर विकलांग प्रमाण पत्र कूटरचित ढंग से तैयार करने का आरोप लगा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई है। प्राचार्य ने उस पर विधिक कार्रवाई करने की संस्तुति कर दी है। ऐसे में यह तय है कि महिला शिक्षक को अब नौकरी से भी हाथ गंवाना पड़ेेगा।
डॉयट प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को बताया कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2008 में आवेदन करने के लिए 21 जनवरी वर्ष 2009 को विज्ञप्ति प्रकाशित करने का आदेश जारी किया गया। इसमें आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2009 निर्धारित की गई। इसके लिए चित्रलेखा कुमारी पुत्री स्व. हंसनाथ सिंह, निवासी शिवपुरी सहबाजगंज, पादरी बाजार, गोरखपुर का आवेदन कार्यालय को पंजीकृत डाक से प्राप्त हुआ था। उसके मूल आवेदन पत्र के साथ विकलांगता प्रमाण पत्र संलग्न नहीं था। आवेदन पत्र में अंतिम विवरण के आधार पर इसका नाम जांच सूची में प्रकाशित हुआ है। 8 अक्तूबर वर्ष 2009 को चित्रलेखा ने अपनी काउंसलिंग के दौरान विकलांग प्रमाण पत्र संख्या 4299 कटिंग किए गए दिनांक 19 जनवरी वर्ष 2009 एवं 9 मार्च 2009 के आधार पर कराई गई और चयनित होकर उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया। काउंसलिंग के समय प्रस्तुत विकलांग प्रमाण पत्र को सत्यापन के लिए जब भेजा गया तो विशिष्ट बीटीसी वर्ष 2008 में चयन के लिए इसकी ओर से काउंसलिंग के समय प्रस्तुत विकलांगता प्रमाण पत्र का निर्गत तिथि आवेदन के तिथि के बाद का होने के कारण अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने के तीन मौके दिए गए। हालांकि, उसने इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण नहीं दिया। डॉयट प्राचार्य ने बताया कि स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने एवं सीएमओ गोरखपुर से प्राप्त आख्या के आधार पर यह सिद्ध होता है कि इसने कूटरचित ढंग से अपना चयन विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के लिए कराया। उसी के आधार पर यह चयनित होकर सहायक अध्यापिका के पद पर नौकरी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पुराना प्रकरण था। निदेशालय स्तर से प्रदेश के सभी विकलांग अभ्यर्थियों के विकलांग प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। इसी प्रक्रिया के आधार पर इस महिला अभ्यर्थी के विकलांगता प्रमाण पत्र की तिथि में गड़बड़झाला किए जाने का पता चला। उसके प्रशिक्षण को निरस्त मानते हुए इनको प्रदत्त विशिष्ट बीटीसी प्रमाण पत्र को अवैध घोषित किया जाता है तथा इसके खिलाफ विधिक कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। इसकी रिपोर्ट भी परीक्षा नियामक को भेज दी गई है। बीएसए गोरखपुर को भी इस बारे में सूचित किया जाएगा।
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