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दो जांच अधिकारियों ने लगवाई प्रतिमा
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दो जांच अधिकारियों ने लगवाई प्रतिमा
देवरिया। टाउनहाल प्रेक्षागृह का नाम पूर्व सांसद बाबू मोहन सिंह के नाम पर रखे जाने और प्रतिमा लगाने से प्रशासन एवं नगरपालिका के अधिकारी आखिर क्यों अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। आखिर इसमें ऐसा क्या है जिससे अफसर कतरा रहे हैं। नगरपालिका ने संबंधित ठेकेदार का स्पष्टीकरण मांगा था। उसने जवाब में यह कह कर मामले को और तूल दे दिया है कि छह सदस्यीय जांच टीम के दो अधिकारी आएं थे जो जांच के बहाने प्रतिमा स्थापित कराकर चले गए।
टाउन हाल कैंपस प्रेक्षागृह में पूर्व सांसद स्व. बाबू मोहन सिंह की प्रतिमा लगाएं जाने का मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी सत्यप्रकाश सिंह ने सभागार का निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार से स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने पूछा था कि प्रतिमा कैसे लग गई। इसके जवाब में चंदा कंस्ट्रक्शन के परियोजना प्रबंधक देवेंद्र मिश्र ने नगर पालिका के ईओ को लिखा कि 22 सितंबर 2016 को निर्माण कार्य पूरा होने तक शिलापट्ट एवं प्रतिमा अंदर ही रखी गई थी। अप्रैल 2019 में जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसका अधिग्रहण कर लिया। डीएम ने आपत्ति लगाकर छह सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित किया। उसके निस्तारण में हम जुटे थे कि दो लोग आएं अपने को प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए शिलापट्ट एवं प्रतिमा स्थापित करवा दी। नगरपालिका बोर्ड ने नाम लिखवाने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है।
उधर, जिला कार्यसमिति सदस्य पवन कुमार मिश्र ने कहा कि सभागार निर्माण में लगा हुआ बजट नया सवेरा के तहत शासन से नगर पालिका को ऋण के रूप में मिला था। इसको नगरपालिका शासन को चुका रहा है। नगरपालिका ने सभागार निर्माण के बाद बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव लाकर पिछले वर्ष सभागार अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया था। उन्होंने मांग की कि सभागार का नाम अटल जी के नाम पर करके उनकी प्रतिमा लगाई जाए। नगर पालिका के सभासद दिनेश शुक्ल, वीरेंद्र सिंह, नित्यानंद पांडेय, जिला कार्यसमिति सदस्य पवन कुमार मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर इस प्रकरण से वह अवगत कराएंगे।
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देवरिया। टाउनहाल प्रेक्षागृह का नाम पूर्व सांसद बाबू मोहन सिंह के नाम पर रखे जाने और प्रतिमा लगाने से प्रशासन एवं नगरपालिका के अधिकारी आखिर क्यों अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। आखिर इसमें ऐसा क्या है जिससे अफसर कतरा रहे हैं। नगरपालिका ने संबंधित ठेकेदार का स्पष्टीकरण मांगा था। उसने जवाब में यह कह कर मामले को और तूल दे दिया है कि छह सदस्यीय जांच टीम के दो अधिकारी आएं थे जो जांच के बहाने प्रतिमा स्थापित कराकर चले गए।
टाउन हाल कैंपस प्रेक्षागृह में पूर्व सांसद स्व. बाबू मोहन सिंह की प्रतिमा लगाएं जाने का मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी सत्यप्रकाश सिंह ने सभागार का निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार से स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने पूछा था कि प्रतिमा कैसे लग गई। इसके जवाब में चंदा कंस्ट्रक्शन के परियोजना प्रबंधक देवेंद्र मिश्र ने नगर पालिका के ईओ को लिखा कि 22 सितंबर 2016 को निर्माण कार्य पूरा होने तक शिलापट्ट एवं प्रतिमा अंदर ही रखी गई थी। अप्रैल 2019 में जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसका अधिग्रहण कर लिया। डीएम ने आपत्ति लगाकर छह सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित किया। उसके निस्तारण में हम जुटे थे कि दो लोग आएं अपने को प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए शिलापट्ट एवं प्रतिमा स्थापित करवा दी। नगरपालिका बोर्ड ने नाम लिखवाने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है।
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उधर, जिला कार्यसमिति सदस्य पवन कुमार मिश्र ने कहा कि सभागार निर्माण में लगा हुआ बजट नया सवेरा के तहत शासन से नगर पालिका को ऋण के रूप में मिला था। इसको नगरपालिका शासन को चुका रहा है। नगरपालिका ने सभागार निर्माण के बाद बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव लाकर पिछले वर्ष सभागार अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया था। उन्होंने मांग की कि सभागार का नाम अटल जी के नाम पर करके उनकी प्रतिमा लगाई जाए। नगर पालिका के सभासद दिनेश शुक्ल, वीरेंद्र सिंह, नित्यानंद पांडेय, जिला कार्यसमिति सदस्य पवन कुमार मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर इस प्रकरण से वह अवगत कराएंगे।
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