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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज की नहीं है सुविधा

Sun, 23 Jul 2023 11:19 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jul 2023 11:19 PM IST
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There is no facility for the treatment of seriously scorched patients in the medical college
उपचार के लिए महानगरों की ओर करना पड़ता है रुख
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है। अलग व्यवस्था न होने से मामूली रूप से जले मरीजों का अन्य मरीजों के साथ उपचार किया जाता है, लेकिन उन्हें भी इंफेक्शन का खतरा रहता है। जबकि गंभीर मरीजों को गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ की ओर रुख करना पड़ता है तो कुछ को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उन्हें परेशानी के साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के स्थापित होने पर लोगों को उम्मीद जगी कि अब सभी सुविधाएं मिलेंगी। उन्हें इलाज के लिए महानगरों और निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन ढाई साल होने वाला है अब तक गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। अस्पताल में ठंड के मौसम में हर रोज औसतन तीन से पांच मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। जबकि अन्य दिनों में मरीजों की संख्या कम रहती है। इन मरीजों को इंफेक्शन का खतरा रहता है। इनके इलाज के लिए अलग वार्ड होता है, जो संसाधनों से लैस होना चाहिए, लेकिन बर्न वार्ड न होने के कारण मामूली रूप से झुलसे मरीजों काे अन्य मरीजों के साथ भर्ती कर इलाज किया जाता है। यहां इंफेक्शन से बचाव के लिए मरीज को मात्र मच्छरदानी दी जाती है, जबकि एसी व अन्य सुविधाएं नहीं है। इसके चलते घाव ठीक होने में समय लगता है। वहीं गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज कराने में काफी दिक्कत होती है।
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सर्जिकल वार्ड में होता है इलाज
- आग से मामूली रूप से झुलसे मरीजों का सर्जिकल वार्ड में इलाज किया जाता है, लेकिन यहां एसी सहित अन्य सुविधा नहीं है। मरीज को ठीक होने में अधिक समय लगता है। खुखुंदू के रामअशीष का छह दिन से इलाज चल रहा है। वह बारजा से सामान उतारते समय चूल्हे पर गिर गए, जिससे झुलस गए।
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बर्न वार्ड में यह होना चाहिए
- आग से झुलसे मरीज के इलाज के लिए अलग बर्न वार्ड होता है। जो पूरी तरह से एसीयुक्त होना चाहिए। हर मरीजों मच्छरदानी तथा
साफ-सफाई और ड्रेसिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि इंफेक्शन न फैले और घाव जल्द ठीक हो सके। यहां ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ, सर्जन की तैनाती होती है।
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अस्पताल में झुलसे मरीजों का इलाज होता है। बर्न वार्ड के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रामा सेंटर निर्माण शुरू होने वाला है उसमें संसाधनों से लैस बीस बेड का बर्न वार्ड भी होगा। उसके शुरू हो जाने पर मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
डॉ. एचके मिश्रा
सीएमएस
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