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Deoria News: पूर्व आईजी की गिरफ्तारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
Wed, 04 Feb 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 04 Feb 2026 11:43 PM IST
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देवरिया। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी के खिलाफ राष्ट्रीय संगठन मंंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने 22 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इसे कोर्ट ने तीन फरवरी को स्वीकार कर लिया है।
अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी के अनुसार याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9-10 दिसंबर 2025 की रात को अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें जिस तरह से गिरफ्तार किया गया है वह पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक था।
जन अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने याचिका में आरोप लगाया कि अमिताभ ठाकुर द्वारा कोडीनयुक्त कफ सिरप माफिया और उन्हें मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण के खुलासों के कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है।
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याचिका में पुलिस द्वारा मीडिया संवाद में बाधा डालने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर रोक लगाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया गया है।
याचिका में अमिताभ ठाकुर की बिना शर्त रिहाई की मांग की गई है। साथ ही प्रकरण की न्यायिक पर्यवेक्षण में सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई है। साथ ही पूरे प्रकरण में माफिया तत्वों और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और जेल में अनावश्यक निगरानी को समाप्त करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
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इसे कोर्ट ने तीन फरवरी को स्वीकार कर लिया है।
अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी के अनुसार याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9-10 दिसंबर 2025 की रात को अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें जिस तरह से गिरफ्तार किया गया है वह पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक था।
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जन अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने याचिका में आरोप लगाया कि अमिताभ ठाकुर द्वारा कोडीनयुक्त कफ सिरप माफिया और उन्हें मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण के खुलासों के कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है।
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याचिका में पुलिस द्वारा मीडिया संवाद में बाधा डालने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर रोक लगाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया गया है।
याचिका में अमिताभ ठाकुर की बिना शर्त रिहाई की मांग की गई है। साथ ही प्रकरण की न्यायिक पर्यवेक्षण में सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई है। साथ ही पूरे प्रकरण में माफिया तत्वों और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और जेल में अनावश्यक निगरानी को समाप्त करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।