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Deoria News: मां दुर्गा के शृंगार में झलक रही नारी शक्ति की आस्था
Fri, 16 Oct 2026 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:24 AM IST
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कस्बे में मां की मूर्ति को फूल सजातीं युवतियां
भागलपुर। मां दुर्गा की आराधना में भक्ति के साथ नारी शक्ति का संगम आस्था को और भी खास बना रहा है। भागलपुर के दुर्गा पूजा पंडालों में इस बार युवतियां मां के दरबार को सजाकर शक्ति और समर्पण की मिसाल पेश कर रही हैं।
घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद कोई फूलों की माला गुंथ रही है तो कोई चुनरियों से झालर बनाकर दरबार को सजा रही है। मां के शृंगार में जुटी इन महिलाओं के लिए यह महज सजावट नहीं, बल्कि भक्ति के साथ नारी शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम है।
शालू वर्मा, गौरी वर्मा और रानी गुप्ता समेत करीब 13 महिलाएं और युवतियां इस काम में जुटी हैं। सुबह घर का कामकाज निपटाने के बाद दोपहर तीन बजे से वे पंडाल पहुंच जाती हैं।
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कोई फूलों की माला गुंथती है तो कोई हल्दी-कुमकुम से रंगोली सजाती है। पुरानी चुनरियों को भी खूबसूरत झालरों में बदलकर मां के दरबार को नया रूप दिया जा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि मां का शृंगार करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। पुरुषों ने बांस-बल्ली से पंडाल का ढांचा तैयार किया, जबकि सजावट की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली है। अब तोरण कहां बांधना है और सजावट कैसी होनी चाहिए, इसमें भी उनकी राय ली जाती है। महिलाएं नीचे से डिजाइन बताती हैं और पुरुष ऊंचाई पर सजावट करते हैं।
उनका मानना है कि दुर्गा पूजा नारी शक्ति के सम्मान का भी पर्व है। मां दुर्गा स्वयं शक्ति का प्रतीक हैं और उनके दरबार को सजाने में जुटी महिलाएं इसी भावना को साकार कर रही हैं। शाम को रोशनी से जगमगाते पंडाल में फूलों की खुशबू के साथ महिलाओं की मेहनत, रचनात्मकता और अटूट भक्ति भी झलकती है।
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घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद कोई फूलों की माला गुंथ रही है तो कोई चुनरियों से झालर बनाकर दरबार को सजा रही है। मां के शृंगार में जुटी इन महिलाओं के लिए यह महज सजावट नहीं, बल्कि भक्ति के साथ नारी शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम है।
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शालू वर्मा, गौरी वर्मा और रानी गुप्ता समेत करीब 13 महिलाएं और युवतियां इस काम में जुटी हैं। सुबह घर का कामकाज निपटाने के बाद दोपहर तीन बजे से वे पंडाल पहुंच जाती हैं।
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कोई फूलों की माला गुंथती है तो कोई हल्दी-कुमकुम से रंगोली सजाती है। पुरानी चुनरियों को भी खूबसूरत झालरों में बदलकर मां के दरबार को नया रूप दिया जा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि मां का शृंगार करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। पुरुषों ने बांस-बल्ली से पंडाल का ढांचा तैयार किया, जबकि सजावट की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली है। अब तोरण कहां बांधना है और सजावट कैसी होनी चाहिए, इसमें भी उनकी राय ली जाती है। महिलाएं नीचे से डिजाइन बताती हैं और पुरुष ऊंचाई पर सजावट करते हैं।
उनका मानना है कि दुर्गा पूजा नारी शक्ति के सम्मान का भी पर्व है। मां दुर्गा स्वयं शक्ति का प्रतीक हैं और उनके दरबार को सजाने में जुटी महिलाएं इसी भावना को साकार कर रही हैं। शाम को रोशनी से जगमगाते पंडाल में फूलों की खुशबू के साथ महिलाओं की मेहनत, रचनात्मकता और अटूट भक्ति भी झलकती है।