{"_id":"683367a56b8f12c6e80be534","slug":"the-accident-took-away-dreams-silence-in-the-village-eyes-filled-with-tearssobs-echoing-deoria-news-c-208-1-sdn1004-154492-2025-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: हादसे ने छीने सपने, गांव में सन्नाटा छलक रहीं आंखें...गूंज रहीं सिसकियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: हादसे ने छीने सपने, गांव में सन्नाटा छलक रहीं आंखें...गूंज रहीं सिसकियां
Mon, 26 May 2025 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 26 May 2025 12:25 AM IST
विज्ञापन
सूनी पड़ी जनुआ गांव की सड़क।
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। करंट लगने से सेना के जवान समेत तीन युवकों की मौत के तीसरे दिन रविवार को भी लार थाना क्षेत्र के जनुआ गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
सिर्फ महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई दे रही है। रिश्तेदारों और बाहरी लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। वहीं ग्रामीणों के घरों में तीसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले।
सभी के चेहरे पर गम साफ झलक रहा है। जनुआ गांव में रविवार की सुबह सेना के जवान मोनू पांडेय के परिवार के लोग दरवाजे पर गमगीन बैठे थे। मां सुशीला देवी घर के बरामदे में बदहवास पड़ी थीं। होश में आने के बाद बेटे की याद आंखों से आंसू गिरने लगते थे।
ढांढ़स बंधाने पहुंचीं महिलाएं उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थीं। कुछ दूरी पर बैठी बहन कुमकुम व सुधा की आंखें नम थीं। पिता कृष्णबिहारी समझाते हुए खुद फफक पड़ रहे थे।
विज्ञापन
घर के चौखट पर बैठी शिवम पांडेय की मां प्रेमशिला देवी, बहन रूबी, मुन्नी और सोनम सिसक रही थीं। बड़े भाई रोशन पांडेय और पिता अपना आंसू छिपा रहे थे। उधर, पवन कुशवाहा के घर पर दो बेटों को खो चुकी मां इंदू देवी सदमे में निर्माणाधीन मकान की दीवार के सहारे बरामदे में खामोश बैठी थीं।
इकलौते भाई को खोने के बाद बड़ी बहन गुड़िया, शोभा और शिल्पी उसकी हर बात को याद कर रो पड़ती थीं। व पिता रामप्रवेशबेटे का तीर हाथ में लिए तख्ते पर बैठे थे। घर पहुंचे रिश्तेदारों से बात कर रहे थे। हादसे की जानकारी देते समय आखों से आंसू पोछ रहे थे।
विज्ञापन
देवरिया। करंट लगने से सेना के जवान समेत तीन युवकों की मौत के तीसरे दिन रविवार को भी लार थाना क्षेत्र के जनुआ गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
सिर्फ महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई दे रही है। रिश्तेदारों और बाहरी लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। वहीं ग्रामीणों के घरों में तीसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले।
सभी के चेहरे पर गम साफ झलक रहा है। जनुआ गांव में रविवार की सुबह सेना के जवान मोनू पांडेय के परिवार के लोग दरवाजे पर गमगीन बैठे थे। मां सुशीला देवी घर के बरामदे में बदहवास पड़ी थीं। होश में आने के बाद बेटे की याद आंखों से आंसू गिरने लगते थे।
विज्ञापन
ढांढ़स बंधाने पहुंचीं महिलाएं उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थीं। कुछ दूरी पर बैठी बहन कुमकुम व सुधा की आंखें नम थीं। पिता कृष्णबिहारी समझाते हुए खुद फफक पड़ रहे थे।
विज्ञापन
घर के चौखट पर बैठी शिवम पांडेय की मां प्रेमशिला देवी, बहन रूबी, मुन्नी और सोनम सिसक रही थीं। बड़े भाई रोशन पांडेय और पिता अपना आंसू छिपा रहे थे। उधर, पवन कुशवाहा के घर पर दो बेटों को खो चुकी मां इंदू देवी सदमे में निर्माणाधीन मकान की दीवार के सहारे बरामदे में खामोश बैठी थीं।
इकलौते भाई को खोने के बाद बड़ी बहन गुड़िया, शोभा और शिल्पी उसकी हर बात को याद कर रो पड़ती थीं। व पिता रामप्रवेशबेटे का तीर हाथ में लिए तख्ते पर बैठे थे। घर पहुंचे रिश्तेदारों से बात कर रहे थे। हादसे की जानकारी देते समय आखों से आंसू पोछ रहे थे।