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Deoria News: शिक्षकों ने की संसद के शीतकालीन सत्र में टीईटी का मुद्दा उठाने की मांग
Fri, 28 Nov 2025 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 28 Nov 2025 11:50 PM IST
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देवरिया के सांसद को ज्ञापन सौंपते राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सदस्य, फोटो:संवाद
देवरिया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शुक्रवार को देवरिया के सांसद शशांक मणि व सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर से मिलकर ज्ञापन सौंपा। इसमें कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने मांग की गई। साथ ही शीतकालीन सत्र में संसद में इस मुद्दे को उठाने की मांग की।
जिला संयोजक ने कहा कि कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास भूतलक्षी और अव्यवहारिक है, जिससे पूरे देश में लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, आजीविका व पदोन्नति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि शिक्षकों की नियुक्ति जिस समय जिस अर्हता के साथ हुई थी। उसके बाद उस अर्हता में परिवर्तन किसी भी दशा में उचित नहीं है जो शिक्षक लंबे अरसे से बुनियादी शिक्षा की मजबूती के लिए अपना संपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके मन में इस निर्णय से नौकरी जाने का भय व असमंजस उनके लिए अवसाद का कारण बन गया है। ऐसे आदेश से बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
जिला सह संयोजक विवेक मिश्र ने कहा कि ये वरिष्ठ शिक्षक लंबे समय से विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं। केंद्र सरकार और एनटीसीटीई के अधिसूचना में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों की सेवाशर्तों में टीईटी था ही नहीं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 2011 से पहले से सेवारत शिक्षकों पर भी इसे लागू कर दिया गया।
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जिला संयोजक ने कहा कि कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास भूतलक्षी और अव्यवहारिक है, जिससे पूरे देश में लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, आजीविका व पदोन्नति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि शिक्षकों की नियुक्ति जिस समय जिस अर्हता के साथ हुई थी। उसके बाद उस अर्हता में परिवर्तन किसी भी दशा में उचित नहीं है जो शिक्षक लंबे अरसे से बुनियादी शिक्षा की मजबूती के लिए अपना संपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके मन में इस निर्णय से नौकरी जाने का भय व असमंजस उनके लिए अवसाद का कारण बन गया है। ऐसे आदेश से बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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जिला सह संयोजक विवेक मिश्र ने कहा कि ये वरिष्ठ शिक्षक लंबे समय से विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं। केंद्र सरकार और एनटीसीटीई के अधिसूचना में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों की सेवाशर्तों में टीईटी था ही नहीं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 2011 से पहले से सेवारत शिक्षकों पर भी इसे लागू कर दिया गया।
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