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Deoria News: पूर्व प्राचार्य के लौटने की चर्चा मेडिकल कॉलेज में बढ़ी
Tue, 22 Sep 2026 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:45 PM IST
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देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में पूर्व प्राचार्य के पुन: लौटने की चर्चाओं ने अचानक परिसर का माहौल गरमा दिया है।
महाराष्ट्र के अशोक गावंडे प्रकरण में पूर्व प्राचार्य को शासन से चेतावनी पत्र जारी कर आरोप मुक्त किए जाने की खबर कॉलेज पहुंचने के साथ ही काॅलेज के प्रशासनिक गलियारों से लेकर डॉक्टरों के बीच सुगबुगाहट का दौर तेज हो गया है।
मामला सामने आने के बाद से ही परिसर में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक तरफ जहां पूर्व प्राचार्य के करीबी डॉक्टरों और कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। उन्हें दोबारा मुख्य धारा में आने की संभावना दिखाई देने लगी है। वहीं दूसरी तरफ वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के करीबियों के चेहरों पर शिकन साफ देखी जा सकती है।
पूर्व प्राचार्य को पिछले साल सितंबर में पद से हटाकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ ओपीडी ब्लॉक के पानी की टंकी में मिले अशोक गावंडे के शव के बाद डीएम के रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई थी।
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इस प्रकरण में शासन स्तर पर हुई जांच के बाद पूर्व प्राचार्य को चेतावनी देते हुए मामले से मुक्त कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद कॉलेज परिसर का सियासी और प्रशासनिक पारा चढ़ गया है। कर्मचारियों और डॉक्टरों के बीच इस बात को लेकर देर शाम तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा कि क्या शासन पूर्व प्राचार्य को दोबारा यहां की कमान सौंप सकता है। इस सुगबुगाहट ने कॉलेज के अंदरूनी समीकरण बदल दिए हैं। हर कोई शासन के अगले कदम पर नजर रखे हुए है।
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महाराष्ट्र के अशोक गावंडे प्रकरण में पूर्व प्राचार्य को शासन से चेतावनी पत्र जारी कर आरोप मुक्त किए जाने की खबर कॉलेज पहुंचने के साथ ही काॅलेज के प्रशासनिक गलियारों से लेकर डॉक्टरों के बीच सुगबुगाहट का दौर तेज हो गया है।
मामला सामने आने के बाद से ही परिसर में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक तरफ जहां पूर्व प्राचार्य के करीबी डॉक्टरों और कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। उन्हें दोबारा मुख्य धारा में आने की संभावना दिखाई देने लगी है। वहीं दूसरी तरफ वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के करीबियों के चेहरों पर शिकन साफ देखी जा सकती है।
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पूर्व प्राचार्य को पिछले साल सितंबर में पद से हटाकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ ओपीडी ब्लॉक के पानी की टंकी में मिले अशोक गावंडे के शव के बाद डीएम के रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई थी।
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इस प्रकरण में शासन स्तर पर हुई जांच के बाद पूर्व प्राचार्य को चेतावनी देते हुए मामले से मुक्त कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद कॉलेज परिसर का सियासी और प्रशासनिक पारा चढ़ गया है। कर्मचारियों और डॉक्टरों के बीच इस बात को लेकर देर शाम तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा कि क्या शासन पूर्व प्राचार्य को दोबारा यहां की कमान सौंप सकता है। इस सुगबुगाहट ने कॉलेज के अंदरूनी समीकरण बदल दिए हैं। हर कोई शासन के अगले कदम पर नजर रखे हुए है।