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Deoria News: अंशुमान के गांव में फैला सन्नाटा, पार्थिव शरीर आने के इंतजार में ग्रामीण

Fri, 21 Jul 2023 12:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jul 2023 12:13 AM IST
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Silence spread in Anshuman's village, villagers waiting for the dead body to arrive
एसडीएम व तहसीलदार ने परिजनों का बंधाया ढांढस
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संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। सियाचिन के ग्लेशियर में बलिदान हुए लार ब्लाक के बरडीहा दलपत निवासी शहीद रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह के गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा फैला हुआ है। अधिकारियों व क्षेत्रीय लोगों सहित जनप्रतिनिधियों के आने-जाने का सिलसिला सुबह से ही शुरू है। सभी अपने वीर सपूत के पार्थिव शरीर के आने के इंतजार में हैं।

बरडीहा के रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह 26 वर्ष की तैनाती सियाचिन ग्लेशियर में थी। बुधवार की तड़के तीन बजे फाइबर ग्लास बंकर में आग लग गई। यह देख अंदर फंसे जवानों को अंशुमान बचाने लगे। उन्होंने तीन जवानों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल दिए। इसके बाद खुद शहीद हो गए। इसकी सूचना मिलते ही गांव सहित इलाके के लोगों की भीड़ दरवाजे पर जुट गई। परिजनों के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर सुबह दस बजे हवाई मार्ग से गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचना था। लेकिन अधिक बर्फबारी होने की वजह से वहां की उड़ाने रद्द हो गई। जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को पैतृक गांव नहीं आ सका। उधर अपने वीर सपूत के आने की सूचना पर इलाके के लोगों की भीड़ जुट गई। सभी उनके आने के इंतजार में दरवाजे पर बैठ पल पल की जानकारी ले रहे थे। उनकी जान कैसे गई, सभी यह जानने को आतुर थे। उधर दोपहर बाद एसडीएम सलेमपुर सीमा पांडेय घर पहुंचीं। दरवाजे पर मौजूद दादा सत्यनारायण सिंह से पोते के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। तभी वह फफक कर रोने लगे। एसडीएम ने उनकाे ढांढस बंधाया। इसके बाद एक-एक कर जानकारी ली। वहीं तहसीलदार सलेमपुर ने अशुमान के घर के आसपास सफाई व पेयजल की व्यवस्था करने को ग्राम प्रधान को निर्देश दिए। देर शाम तक लोगों का आना-जाना शुरू था।
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बर्फबारी होने से बृहस्पतिवार को नहीं आ सका पार्थिव शरीर

अंशुमान का शव बृहस्पतिवार को सियाचिन ग्लेशियर से लेह एयरपोर्ट से हवाई मार्ग द्वारा गोरखपुर एयरपोर्ट पर सुबह दस बजे के करीब आना था। इसकी सूचना पर ग्रामीण व परिवार के लोग गोरखपुर पहुंचे थे। इसी बीच लेह में बर्फबारी शुरू हो गई। जिसके वजह से उड़ान बाधित हो गई। इसके बाद उनका शव नहीं आ सका। हालांकि परिवार के लोग वहीं रुके हुए हैं।
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बरडीहा दलपत में किसी के घर नहीं जले चूल्हे

अंशुमान सिंह की जान जाने की खबर पिता रवि प्रकाश सिंह के मोबाइल पर सेना के अधिकारी द्वारा बताया गया। इस दौरान वह लखनऊ स्थित आवास पर पत्नी मंजू देवी, छोटे बेटे घनश्याम सिंह व बेटी तान्या सिंह के साथ बैठे थे। बेटे के शहीद होने की खबर सुनकर फफक पड़े। यह देख परिवार में चीख-पुकार मच गई। शाम को पैतृक गांव बरडीहा खबर पहुंची तो ग्रामीण सन्न रह गए। सभी से सहज व्यवहार करने व गांव आने पर घर जाकर मिलने वाले अंशुमान के बलिदान होने पर गांव में किसी के घर चूल्हे नहीं जले। जो जहां था वहीं गमजदा होकर बैठा था। सभी उनके व्यवहार कुशल होने की चर्चा कर रहे थे।

जल्द गांव आने का किए थे वादा

गांव के स्वामी देवानंद पीजी कालेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष आशीष सिंह छोटू, कुनाल सिंह, मनीष सिंह ने बताया कि अंशुमान आठ माह पहले घर आए थे। सभी से शादी में चलने को कहा था। लेकिन शादी पठान कोट में होने की वजह से हम नहीं जा सके। बावजूद उन्होंने कहा कि शादी संपन्न होने के बाद आप सभी से मिलने जरूर आऊंगा। वह जब भी समय मिलता था तो फोन से जरूर बात करते थे। पर क्या पता की वह दुबारा गांव नहीं लौट पाएंगे। उनकी कमी हम सभी को हमेशा महसूस होगी।


अंदर फंसे जवानों को बचा खुद को नहीं बचा सके अंशुमान

बुधवार की सुबह तड़के तीन बजे सियाचिन ग्लेशियर पर सेना के फाइबर ग्लास बंकर में आग लग गई। इसमें कई जवान अंदर ही फंस गए। उधर पल भर में आग ने विकराल रूप ले लिए। यह देख अंशुमान अपनी साहस का परिचय देते हुए जवानों को बाहर निकालने में जुट गए। उन्होंने कई जवानों को बाहर निकाल अस्पताल के लिए भेजवाए। इसी दौरान वह आग के चपेट में आ गए। जिसके बाद शहीद हो गए।



आज आएगा पार्थिव शरीर

शहीद का पार्थिव शरीर परिजनों के मुताबिक सियाचिन की उच्चाई से उतार लेह एयरपोर्ट पर रखा गया है। यहां से आज सुबह दस बजे के करीब गोरखपुर एयरपोर्ट लाया जाएगा। यहां से सेना के वाहन से देवरिया के रास्ते पैतृक गांव बरडीहा दलपत लाया जाएगा।
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