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Deoria News: त्रेता युग के माने जाते हैं खुखुंदू मठिया के शिवलिंग
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प्राचीन शिव मंदिर मठिया,खुखुंदू, श्रोत संवाद
- यहां रुद्राभिषेक कराने का है बड़ा ही महत्व
- पूरे सावन माह में शिवभक्तों की उमड़ेगी भीड़, मेला जैसा रहेगा माहौल, तैयारियां पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। क्षेत्र के जैन मंदिर रोड से दक्षिण दिशा में स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर मठिया में सोमवार से बड़ी तादाद में शिवभक्तों का रेला भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए उमड़ेगा। यहां रुद्राभिषेक कराने का बड़ा ही महत्व होता है। पूरे सावन माह भर यहां के तीनों मंदिरों में शिवभक्त रोजाना रुद्राभिषेक कराते नजर आते हैं। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर्व पर भी मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है।
जनश्रुतियों के मुताबिक मठिया का अति प्राचीन शिव मंदिर त्रेता युग का माना जाता है। यहां पांच शिवलिंग है, जिसमें तीन अलग-अलग मंदिरों और दो चबूतरे पर स्थापित है। यहां रुद्राभिषेक कराना बड़ा ही पुण्यकारी माना जाता है। दूर-दूर से शिवभक्त यहां मनोकामनाएं पूर्ण होने पर रुद्राभिषेक कराने आते रहते हैं। शिव मंदिरों की तकरीबन चार से पांच फीट मोटी-मोटी दीवारें प्राचीनता को दर्शाते हुए दूर से ही भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं।
वैसे तो आसपास के पचास से साठ गांवों के शिवभक्त प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने पहुंचते हैं। मगर सावन माह भर यहां शिवभक्तों का रेला भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए उमड़ता है। मंदिर के पुजारी डंकेश्वर गिरी ने बताया कि सावन माह की पूरी तैयारियां हो चुकी है। उन्होंने शिवभक्तों से शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की है। वैसे सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस फोर्स भी तैनात रहती है।
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इनसेट...
ऐसे है शिव मंदिर का इतिहास
खुखुंदू। मंदिर के पुजारी डंकेश्वर गिरी और रिटायर्ड संस्कृति प्रवक्ता पंडित अशरफी पांडेय के मुताबिक मठिया का शिव मंदिर और उसमें स्थापित शिवलिंग त्रेता युग के माने जाते है। परिसर और मंदिरों की मोटी-मोटी दीवारें प्राचीनता की प्रतीक है। क्षेत्र के प्रकांड विद्वान और स्थानीय गांव निवासी रहे स्व. पंडित रामपूजन पांडेय उर्फ डमरी पंडित की ''कुत्कुस्थ'' पुस्तिका में भी मंदिर का विस्तृत उल्लेख है। देशाटन के दौरान बिहार प्रांत के ईश्वरीय राय नामक व्यक्ति के स्वप्न आने पर यहां जंगलों के बीच खुदाई कराई गई। खोदाई के दौरान शिवलिंगों के मिलने पर वहीं मंदिरों का अलग-अलग निर्माण कराकर तीन शिवलिंगों की मंदिरों में जबकि दो शिवलिंगों को चबूतरे पर स्थापित कराया गया। संवाद
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- पूरे सावन माह में शिवभक्तों की उमड़ेगी भीड़, मेला जैसा रहेगा माहौल, तैयारियां पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। क्षेत्र के जैन मंदिर रोड से दक्षिण दिशा में स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर मठिया में सोमवार से बड़ी तादाद में शिवभक्तों का रेला भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए उमड़ेगा। यहां रुद्राभिषेक कराने का बड़ा ही महत्व होता है। पूरे सावन माह भर यहां के तीनों मंदिरों में शिवभक्त रोजाना रुद्राभिषेक कराते नजर आते हैं। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर्व पर भी मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है।
जनश्रुतियों के मुताबिक मठिया का अति प्राचीन शिव मंदिर त्रेता युग का माना जाता है। यहां पांच शिवलिंग है, जिसमें तीन अलग-अलग मंदिरों और दो चबूतरे पर स्थापित है। यहां रुद्राभिषेक कराना बड़ा ही पुण्यकारी माना जाता है। दूर-दूर से शिवभक्त यहां मनोकामनाएं पूर्ण होने पर रुद्राभिषेक कराने आते रहते हैं। शिव मंदिरों की तकरीबन चार से पांच फीट मोटी-मोटी दीवारें प्राचीनता को दर्शाते हुए दूर से ही भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं।
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वैसे तो आसपास के पचास से साठ गांवों के शिवभक्त प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने पहुंचते हैं। मगर सावन माह भर यहां शिवभक्तों का रेला भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए उमड़ता है। मंदिर के पुजारी डंकेश्वर गिरी ने बताया कि सावन माह की पूरी तैयारियां हो चुकी है। उन्होंने शिवभक्तों से शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की है। वैसे सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस फोर्स भी तैनात रहती है।
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ऐसे है शिव मंदिर का इतिहास
खुखुंदू। मंदिर के पुजारी डंकेश्वर गिरी और रिटायर्ड संस्कृति प्रवक्ता पंडित अशरफी पांडेय के मुताबिक मठिया का शिव मंदिर और उसमें स्थापित शिवलिंग त्रेता युग के माने जाते है। परिसर और मंदिरों की मोटी-मोटी दीवारें प्राचीनता की प्रतीक है। क्षेत्र के प्रकांड विद्वान और स्थानीय गांव निवासी रहे स्व. पंडित रामपूजन पांडेय उर्फ डमरी पंडित की ''कुत्कुस्थ'' पुस्तिका में भी मंदिर का विस्तृत उल्लेख है। देशाटन के दौरान बिहार प्रांत के ईश्वरीय राय नामक व्यक्ति के स्वप्न आने पर यहां जंगलों के बीच खुदाई कराई गई। खोदाई के दौरान शिवलिंगों के मिलने पर वहीं मंदिरों का अलग-अलग निर्माण कराकर तीन शिवलिंगों की मंदिरों में जबकि दो शिवलिंगों को चबूतरे पर स्थापित कराया गया। संवाद