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जिस नाम से स्कूल, उस नाम का गांव ही नहीं
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जिस नाम से स्कूल, उस नाम का गांव ही नहीं
देसही देवरिया (देवरिया)। देसही देवरिया क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के नामों में गड़बड़ी के कुछ अजब-गजब मामले सामने आए हैं। एक विद्यालय पर जिस गांव का नाम लिखा है, उस नाम का गांव पूरे क्षेत्र में नहीं है। जबकि एक ही परिसर में स्थित प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय अलग-अलग नाम से संचालित हो रहे हैं।
क्षेत्र के मुंडेरा उर्फ भगवानपुर गांव में एक ही परिसर में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। दोनों पर गांव का नाम सोहनपुर लिखा गया है, जबकि सोहनपुर नाम से कोई गांव या मजरा क्षेत्र में कहीं भी नहीं है। दूसरी तरफ दिघवा पौटवा में भी एक ही परिसर में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। यहां प्राथमिक पर पौटवा लिखा गया है। पौटवा नाम से कोई गांव नहीं है। जबकि पूर्व माध्यमिक पर दिघवा पौटवा अंकित है।
तीसरा मामला क्षेत्र के जंगल बेलवा गांव का है। यहां प्राथमिक विद्यालय पर नाम सही है, लेकिन बीआरसी अभिलेख में जगन बेलवा दर्ज है। वर्ष 1980 से चल रहे इन विद्यालयों पर तैनात किसी भी शिक्षक या जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान अब तक इन त्रुटियों की तरफ नहीं गया। इससे समझने वालों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इस संबंध में बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने कहा कि यह तो गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर त्रुटियों को सही कराने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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देसही देवरिया (देवरिया)। देसही देवरिया क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के नामों में गड़बड़ी के कुछ अजब-गजब मामले सामने आए हैं। एक विद्यालय पर जिस गांव का नाम लिखा है, उस नाम का गांव पूरे क्षेत्र में नहीं है। जबकि एक ही परिसर में स्थित प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय अलग-अलग नाम से संचालित हो रहे हैं।
क्षेत्र के मुंडेरा उर्फ भगवानपुर गांव में एक ही परिसर में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। दोनों पर गांव का नाम सोहनपुर लिखा गया है, जबकि सोहनपुर नाम से कोई गांव या मजरा क्षेत्र में कहीं भी नहीं है। दूसरी तरफ दिघवा पौटवा में भी एक ही परिसर में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। यहां प्राथमिक पर पौटवा लिखा गया है। पौटवा नाम से कोई गांव नहीं है। जबकि पूर्व माध्यमिक पर दिघवा पौटवा अंकित है।
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तीसरा मामला क्षेत्र के जंगल बेलवा गांव का है। यहां प्राथमिक विद्यालय पर नाम सही है, लेकिन बीआरसी अभिलेख में जगन बेलवा दर्ज है। वर्ष 1980 से चल रहे इन विद्यालयों पर तैनात किसी भी शिक्षक या जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान अब तक इन त्रुटियों की तरफ नहीं गया। इससे समझने वालों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इस संबंध में बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने कहा कि यह तो गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर त्रुटियों को सही कराने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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