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Deoria News: सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर कई प्रांतों से पहुंचेंगे जायरीन
Sun, 05 May 2024 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 05 May 2024 12:38 AM IST
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खुखुंदू के सेल्हरापुर सैय्यद यासीन शाह बाबा का दरगाह। संवाद
- खुखुंदू थाना क्षेत्र के सेल्हरापुर में सालाना उर्स आज से
- उर्स में धर्म के लोगों के अलावा हिंदूओं का भी बड़ा जत्था होता है शामिल
फोटो समाचार...
खुखुंदू। क्षेत्र के सेल्हरापुर सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर 43वां सालाना उर्स धूमधाम से मनाया जाएगा। रविवार सुबह से ही यहां मुंबई, मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार के विभिन्न जनपदों से बड़ी तादाद में जायरीन (श्रद्धालु) पहुंचने लगेंगे।
सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर रविवार शाम को परचम कुसाई (झंडा बदलकर) कर उर्स का शुभारंभ होगा। इसके बाद फिर सोमवार और मंगलवार दो दिनों तक उर्स चलेगा। इस दौरान बड़ा मेला लगता है। इसमें हर धर्म के लोग शिरकत करते हैं। बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रहती है।
सेल्हारापुर में प्रसिद्ध सूफी संत सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर गत वर्षों की तरह इस वर्ष भी रविवार शाम से सालाना उर्स का शुभारंभ होगा। उर्स में रविवार सुबह से ही दूर-दराज के जायरीन पहुंचने लगेंगे। बाबा की दरगाह पर वैसे तो प्रत्येक बृहस्पतिवार को बड़ी तादाद में लोग पहुंचकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी दुआ कबूल होने पर अगरबत्ती दिखा गुलाब का फूल चढ़ाने की परंपरा है। दरगाह के अंदर महिलाओं के जाने पर रोक है। महिलाएं बाहर से हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लिए मन्नतें मांगती हैं। फिर फूलों को लेकर बाबा की दरगाह पर चढ़ाया जाता है। गद्दीनसीन (दरगाह के पुजारी) सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि उर्स में आने वाले जायरीन के ठहरने की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। रविवार से ही यहां भंडारा चलने लगेगा। संवाद
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...इनसेट......
सेल्हापुर सैय्यद बाबा का इतिहास
खुखुंदू। दरगाह के गद्दीनसीन सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि सैय्यद बाबा का इतिहास चार से पांच सौ साल पुराना है। वर्तमान में जहां दरगाह है। यहां पहले जंगल था। सैय्यद बाबा इसी जंगल में रहते थे। जंगल में रहते-रहते उन्होंने यहीं समाधि ले ली। यहां जो भी बाबा की दरगाह पर आकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी मन्नतें बाबा अवश्य पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता सैय्यद जमील अहमद को बीस साल तक संतान नहीं हुई। फिर उन्होंने बाबा की दरगाह पर माथा टेका। इसके बाद मेरा जन्म हुआ। इसके पूर्व दरगाह शरीफ के गद्दीनशीन सैय्यद जमील अहमद ही थे। जबकि लगातार 43 सालों से मेरी देखरेख में सालाना उर्स आयोजित हो रहा है। वर्तमान में दरगाह के आसपास बड़ी आबादी बस गई है।
....इनसेट........
मुंबई, मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार से आते हैं जायरीन
खुखुंदू। सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि इस बार भी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के भिंड यूपी के बस्ती, कुशीनगर, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर,गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, झासी, लखनऊ, कानपुर, जालौन, बिहार के पटना, छपरा, सिवान, गोपालगंज सहित विभिन्न जनपदों से बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचेंगे। दरगाह पर सोमवार और मंगलवार दो दिनों तक मेला लगेगा। मन्नतें पूरी होने लोग चादर और गुलाब का फूल चढ़ाते हैं। उधर, उर्स को लेकर पुलिस प्रशासन भी सतर्क है। इंस्पेक्टर दिलीप सिंह ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रहेगी।
इनसेट....
वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ और खलीलाबाद से आएंगे कव्वाल
खुखुंदू। उर्स में वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ और खलीलाबाद से कव्वाल आएंगे। वाराणसी से सहाबुद्दीन, आजमगढ़ से निजाम चिस्ती, जौनपुर से शुलगन साक्री और खलीलाबाद से गुड्डू कव्वाल कव्वाली प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन करेंगे। इसके अलावा बहराइच और देवाशरीफ से सूफी मस्तान भी पहुंचकर अपने करतब दिखाएंगे।
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- उर्स में धर्म के लोगों के अलावा हिंदूओं का भी बड़ा जत्था होता है शामिल
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खुखुंदू। क्षेत्र के सेल्हरापुर सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर 43वां सालाना उर्स धूमधाम से मनाया जाएगा। रविवार सुबह से ही यहां मुंबई, मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार के विभिन्न जनपदों से बड़ी तादाद में जायरीन (श्रद्धालु) पहुंचने लगेंगे।
सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर रविवार शाम को परचम कुसाई (झंडा बदलकर) कर उर्स का शुभारंभ होगा। इसके बाद फिर सोमवार और मंगलवार दो दिनों तक उर्स चलेगा। इस दौरान बड़ा मेला लगता है। इसमें हर धर्म के लोग शिरकत करते हैं। बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रहती है।
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सेल्हारापुर में प्रसिद्ध सूफी संत सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर गत वर्षों की तरह इस वर्ष भी रविवार शाम से सालाना उर्स का शुभारंभ होगा। उर्स में रविवार सुबह से ही दूर-दराज के जायरीन पहुंचने लगेंगे। बाबा की दरगाह पर वैसे तो प्रत्येक बृहस्पतिवार को बड़ी तादाद में लोग पहुंचकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी दुआ कबूल होने पर अगरबत्ती दिखा गुलाब का फूल चढ़ाने की परंपरा है। दरगाह के अंदर महिलाओं के जाने पर रोक है। महिलाएं बाहर से हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लिए मन्नतें मांगती हैं। फिर फूलों को लेकर बाबा की दरगाह पर चढ़ाया जाता है। गद्दीनसीन (दरगाह के पुजारी) सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि उर्स में आने वाले जायरीन के ठहरने की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। रविवार से ही यहां भंडारा चलने लगेगा। संवाद
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सेल्हापुर सैय्यद बाबा का इतिहास
खुखुंदू। दरगाह के गद्दीनसीन सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि सैय्यद बाबा का इतिहास चार से पांच सौ साल पुराना है। वर्तमान में जहां दरगाह है। यहां पहले जंगल था। सैय्यद बाबा इसी जंगल में रहते थे। जंगल में रहते-रहते उन्होंने यहीं समाधि ले ली। यहां जो भी बाबा की दरगाह पर आकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी मन्नतें बाबा अवश्य पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता सैय्यद जमील अहमद को बीस साल तक संतान नहीं हुई। फिर उन्होंने बाबा की दरगाह पर माथा टेका। इसके बाद मेरा जन्म हुआ। इसके पूर्व दरगाह शरीफ के गद्दीनशीन सैय्यद जमील अहमद ही थे। जबकि लगातार 43 सालों से मेरी देखरेख में सालाना उर्स आयोजित हो रहा है। वर्तमान में दरगाह के आसपास बड़ी आबादी बस गई है।
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मुंबई, मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार से आते हैं जायरीन
खुखुंदू। सैय्यद शकील अहमद शाह ने बताया कि इस बार भी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के भिंड यूपी के बस्ती, कुशीनगर, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर,गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, झासी, लखनऊ, कानपुर, जालौन, बिहार के पटना, छपरा, सिवान, गोपालगंज सहित विभिन्न जनपदों से बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचेंगे। दरगाह पर सोमवार और मंगलवार दो दिनों तक मेला लगेगा। मन्नतें पूरी होने लोग चादर और गुलाब का फूल चढ़ाते हैं। उधर, उर्स को लेकर पुलिस प्रशासन भी सतर्क है। इंस्पेक्टर दिलीप सिंह ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रहेगी।
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वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ और खलीलाबाद से आएंगे कव्वाल
खुखुंदू। उर्स में वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ और खलीलाबाद से कव्वाल आएंगे। वाराणसी से सहाबुद्दीन, आजमगढ़ से निजाम चिस्ती, जौनपुर से शुलगन साक्री और खलीलाबाद से गुड्डू कव्वाल कव्वाली प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन करेंगे। इसके अलावा बहराइच और देवाशरीफ से सूफी मस्तान भी पहुंचकर अपने करतब दिखाएंगे।