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Deoria News: मासूम के गले में फंसी अंगूठी, डॉक्टरों ने निकाला
Mon, 18 Mar 2024 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 18 Mar 2024 11:31 PM IST
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बच्ची के गले निकाली गई अंगूठी
- फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में सोमवार को डॉक्टरों ने नौ माह की बच्ची के खाने की नली में फंसी अंगूठी को निकाला। इसके बाद बच्ची और परिजनों ने राहत की सांस ली। पहली बार इतनी कम उम्र की बच्ची के गले में फंसी अंगूठी को निकाला गया है। इससे पहले एक साल के बच्चे के गले में फंसे सिक्के को निकाला गया था। प्राइवेट में इसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के ग्राम पड़री नंदू विश्वकर्मा की नौ माह की पुत्री घर पर खेल रही थी। इसी बीच सुबह करीब 11 बजे उसे अंगूठी मिल गई और खेलते समय उसे निगल लिया। इसके बाद बच्ची रोने लगी। परिजनों को अंगूठी निगलने की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। बच्ची को उल्टी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इसके बाद बच्ची को लेकर मां माधुरी और चाचा शुभम विश्वकर्मा बच्ची को लेकर पास के खुखुंदू स्थित पीएचसी पर ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे निकालने में असमर्थता जताते हुए मेडिकल कॉलेज देवरिया भेज दिया। वहां से परिजन बच्ची को लेकर दोपहर बाद करीब दो बजे पहुंचे। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने कर्मचारियों को ओटी में तैयारी शुरू करने को कहा और प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल को जानकारी दी तो वह तत्काल एनेस्थीसिया देने के लिए अपने कार्यालय से पहुंच गए। इसके बाद प्राचार्य और डॉ. प्रदीप कुमार की टीम ने अर्ध बेहोशी में बच्ची के गले में फंसी अंगूठी को निकाला। टीम में स्टाफ नर्स पूजा, सुनीता, विनोद शामिल रहे। इसके बाद परिजनों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। निजी अस्पतालों में इसके लिए उन्हें 18 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में सोमवार को डॉक्टरों ने नौ माह की बच्ची के खाने की नली में फंसी अंगूठी को निकाला। इसके बाद बच्ची और परिजनों ने राहत की सांस ली। पहली बार इतनी कम उम्र की बच्ची के गले में फंसी अंगूठी को निकाला गया है। इससे पहले एक साल के बच्चे के गले में फंसे सिक्के को निकाला गया था। प्राइवेट में इसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के ग्राम पड़री नंदू विश्वकर्मा की नौ माह की पुत्री घर पर खेल रही थी। इसी बीच सुबह करीब 11 बजे उसे अंगूठी मिल गई और खेलते समय उसे निगल लिया। इसके बाद बच्ची रोने लगी। परिजनों को अंगूठी निगलने की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। बच्ची को उल्टी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इसके बाद बच्ची को लेकर मां माधुरी और चाचा शुभम विश्वकर्मा बच्ची को लेकर पास के खुखुंदू स्थित पीएचसी पर ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे निकालने में असमर्थता जताते हुए मेडिकल कॉलेज देवरिया भेज दिया। वहां से परिजन बच्ची को लेकर दोपहर बाद करीब दो बजे पहुंचे। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने कर्मचारियों को ओटी में तैयारी शुरू करने को कहा और प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल को जानकारी दी तो वह तत्काल एनेस्थीसिया देने के लिए अपने कार्यालय से पहुंच गए। इसके बाद प्राचार्य और डॉ. प्रदीप कुमार की टीम ने अर्ध बेहोशी में बच्ची के गले में फंसी अंगूठी को निकाला। टीम में स्टाफ नर्स पूजा, सुनीता, विनोद शामिल रहे। इसके बाद परिजनों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। निजी अस्पतालों में इसके लिए उन्हें 18 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते।
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