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Deoria News: कुत्ते-बंदरों से खुद करें बचाव, सरकारी सिस्टम में नहीं हैं इंतजाम
Sun, 16 Nov 2025 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 16 Nov 2025 11:45 PM IST
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रुद्रपुर के इमामबाड़ा चौराहे से पुन्नी साहू चौराहे पर सुबह घूमते आवारा कुत्ते, फोटो संवाद
देवरिया। कुत्ता-बिल्ली और बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है लेकिन इनको पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए जिले में किसी प्रकार की ठोस व्यवस्था नहीं है। पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों का कहना है कि निराश्रित पशुओं को पकड़ने, बंध्याकरण की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की है।
वहीं पंचायतीराज विभाग का कहना है कि कुत्ते-बिल्ली पकड़ने की जिम्मेदारी की जानकारी नहीं है। इन सबके बीच जिले भर में हर महीने करीब पांच हजार लोगों को एंटी रैबीज की डोज लगवानी पड़ रही है। अकेले मेडिकल कॉलेज में ही रोजाना 150 से अधिक लोग टीका लगवाने आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में हर महीने करीब पांच हजार लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कुत्ता, बिल्ली या बंदर जैसे जानवर काट लेते हैं और उन्हें मजबूरन एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि आवारा जानवरों का खतरा किस हद तक बढ़ चुका है। बावजूद इसके नगर निकायों और पंचायत स्तर पर इन जानवरों को पकड़ने, उनकी नसबंदी करने या सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ताजा मामला खुखुंदू क्षेत्र का है। यहां दो दिन में ही 30 से अधिक लोगों पर पागल कुत्ता हमला कर चुका है लेकिन किसी जिम्मेदार ने पकड़वाने का प्रयास नहीं किया।
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इससे पहले सलेमपुर इलाके में एक और चिंताजनक मामला सामने आया था। वहां के गांव बनरही-दुबौली में आवारा कुत्ते ने कई गायों को काट लिया था, जिसके चलते उनकी मौत हो गई थी। गायों के मरने से पहले उनके दूध का प्रसाद तमाम लोगों ने ग्रहण कर लिया था। पशुओं की मौत के बाद लोग अस्पताल में टीकाकरण के लिए लाइन लगाए थे।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजकुमार जायसवाल का कहना है कि जानवरों के काटने से होने वाली बीमारी रैबीज अभी भी पूरी दुनिया में लाइलाज है।
मेडिकल कॉलेज सहित 38 अस्पतालों में एंटी रैबीज की सुविधा : शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक कुत्तों का आतंक है। रोजाना करीब 150 लोग कुत्ताें के काटने से पीड़ित हो रहे हैं और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले में 38 अस्पतालों में एंटी रेबिज का इंजेक्शन लगता है। मेडिकल कॉलेज में 30-35 मरीजों हर रोज आते हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज के अलावा 16 सीएचसी व पंद्रह पीएचसी तथा छह न्यू पीएचसी पर एंटी रैबीज की सुविधा है।
इसमें सीएचसी रुद्रपुर, सलेमपुर, गौरीबाजार, लीलापुर, जसुई, बरहज, सोनाड़ी, बतरौली, लार, परसिया चंदौर, सिधुआ, भुड़वार, पथरदेवा, तरकुलवा, पिपरा दौलाकदम, धमउर तथा पीएचसी मझगांवा, भलुअनी, खुखुंदू, भाटपाररानी, बैतालपुर, रामलक्षन, मदनपुर, एकौना, महेन, भागलपुर शामिल हैं।
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वहीं पंचायतीराज विभाग का कहना है कि कुत्ते-बिल्ली पकड़ने की जिम्मेदारी की जानकारी नहीं है। इन सबके बीच जिले भर में हर महीने करीब पांच हजार लोगों को एंटी रैबीज की डोज लगवानी पड़ रही है। अकेले मेडिकल कॉलेज में ही रोजाना 150 से अधिक लोग टीका लगवाने आते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में हर महीने करीब पांच हजार लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कुत्ता, बिल्ली या बंदर जैसे जानवर काट लेते हैं और उन्हें मजबूरन एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि आवारा जानवरों का खतरा किस हद तक बढ़ चुका है। बावजूद इसके नगर निकायों और पंचायत स्तर पर इन जानवरों को पकड़ने, उनकी नसबंदी करने या सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ताजा मामला खुखुंदू क्षेत्र का है। यहां दो दिन में ही 30 से अधिक लोगों पर पागल कुत्ता हमला कर चुका है लेकिन किसी जिम्मेदार ने पकड़वाने का प्रयास नहीं किया।
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इससे पहले सलेमपुर इलाके में एक और चिंताजनक मामला सामने आया था। वहां के गांव बनरही-दुबौली में आवारा कुत्ते ने कई गायों को काट लिया था, जिसके चलते उनकी मौत हो गई थी। गायों के मरने से पहले उनके दूध का प्रसाद तमाम लोगों ने ग्रहण कर लिया था। पशुओं की मौत के बाद लोग अस्पताल में टीकाकरण के लिए लाइन लगाए थे।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजकुमार जायसवाल का कहना है कि जानवरों के काटने से होने वाली बीमारी रैबीज अभी भी पूरी दुनिया में लाइलाज है।
मेडिकल कॉलेज सहित 38 अस्पतालों में एंटी रैबीज की सुविधा : शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक कुत्तों का आतंक है। रोजाना करीब 150 लोग कुत्ताें के काटने से पीड़ित हो रहे हैं और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले में 38 अस्पतालों में एंटी रेबिज का इंजेक्शन लगता है। मेडिकल कॉलेज में 30-35 मरीजों हर रोज आते हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज के अलावा 16 सीएचसी व पंद्रह पीएचसी तथा छह न्यू पीएचसी पर एंटी रैबीज की सुविधा है।
इसमें सीएचसी रुद्रपुर, सलेमपुर, गौरीबाजार, लीलापुर, जसुई, बरहज, सोनाड़ी, बतरौली, लार, परसिया चंदौर, सिधुआ, भुड़वार, पथरदेवा, तरकुलवा, पिपरा दौलाकदम, धमउर तथा पीएचसी मझगांवा, भलुअनी, खुखुंदू, भाटपाररानी, बैतालपुर, रामलक्षन, मदनपुर, एकौना, महेन, भागलपुर शामिल हैं।