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Deoria News: गर्मी में चिड़चिड़ाहट और गुस्से के मरीजों की बढ़ी संख्या
Wed, 08 May 2024 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 08 May 2024 02:29 AM IST
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फोटो
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बढ़ते तापमान का असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को मानसिक रोग की ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी थी। आम दिनों की अपेक्षा मंगलवार को मरीजों की भीड़ ज्यादा थी। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को दिक्कत न हो, डाॅक्टर समय से ओपीडी में बैठ गए थे। इस दौरान गर्मी और उमस से पीड़ित मरीजों की संख्या ज्यादा थी।
मंगलवार सुबह से ही पर्ची बनवाने के काउंटर पर विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीज पहुंचे। पर्ची बनवाने को लेकर काउंटर पर गहमागहमी थी। वहीं, गर्मी और उमस से कई तरह की बीमारियों से पीड़ित करीब 150 मरीज मानसिक रोग की ओपीडी में पहुंचे थे। इनमें से ज्यादातर मरीज गर्मी से परेशान थे। उन्हें चिड़चिड़ाहट, भूलने की बीमारी थी। याददाश्त कमजोर होने, सोचने की शक्ति कमजोर होने, व्यवहार में अनियमितता की बीमारी से पीड़ित मरीज ओपीडी के बाहर मौजूद थे।
अधिक तापमान मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर में होता है परिवर्तन
डॉ. अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि गर्मियों में उन्माद से पीड़ित मरीजों और जाड़े में डिप्रेशन के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। खासकर गर्मियों में नींद पूरी नहीं हाेने के कारण चिड़चिड़ाहट ज्यादा होती है। बताया कि गर्मी के दिनों में बढ़ते तापमान का असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। अधिक तापमान के कारण मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर में परिवर्तन, नींद पूरी न होने के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। गर्मी में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन जैसे चिढ़चिढ़ापन, गुस्सा, आक्रमकता बढ़ जाती है।
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ऐसा देखा गया है कि बाइपोलर मूड डिसऑर्डर के मैनिक एपिसोड (उन्माद) के अटैक्स बढ़ जाते हैं। इसमें मरीज बहुत ज्यादा बोलने लगता है। बड़ी-बड़ी बातें करता है। हिंसात्मक भी को सकता है। गर्मी में आग लगने आदि घटनाओं से हुए नुकसान से काफी लोग सदमे में आकर मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं। साथ में डिप्रेशन, एंजायटी डिसऑर्डर जैसे कि चिंता, घबराहट आदि की बीमारियां होने की भी आशंका बढ़ जाती है। गर्मी में मानसिक रोगियों में आत्मघात के विचार और आशंकाओं में भी वृद्धि देखी गई है। गर्मी के दिनों में मानसिक रोगियों की मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
ऐसे करें बचाव
डाॅ. अनूप कहते हैं कि इसलिए गर्मी में रात में सोते समय कमरा ठंडा रखने का प्रयास करें। अनिद्रा, उदासी, चिन्ता, घबराहट, गुस्सा आदि महसूस होने पर तुरंत मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। उन्होंने साथ ही अपील कि सभी लोग जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। ताकि प्रत्येक वर्ष बढ़ती भीषण गर्मी पर अंकुश लग सके।
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बढ़ते तापमान का असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को मानसिक रोग की ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी थी। आम दिनों की अपेक्षा मंगलवार को मरीजों की भीड़ ज्यादा थी। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को दिक्कत न हो, डाॅक्टर समय से ओपीडी में बैठ गए थे। इस दौरान गर्मी और उमस से पीड़ित मरीजों की संख्या ज्यादा थी।
मंगलवार सुबह से ही पर्ची बनवाने के काउंटर पर विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीज पहुंचे। पर्ची बनवाने को लेकर काउंटर पर गहमागहमी थी। वहीं, गर्मी और उमस से कई तरह की बीमारियों से पीड़ित करीब 150 मरीज मानसिक रोग की ओपीडी में पहुंचे थे। इनमें से ज्यादातर मरीज गर्मी से परेशान थे। उन्हें चिड़चिड़ाहट, भूलने की बीमारी थी। याददाश्त कमजोर होने, सोचने की शक्ति कमजोर होने, व्यवहार में अनियमितता की बीमारी से पीड़ित मरीज ओपीडी के बाहर मौजूद थे।
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अधिक तापमान मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर में होता है परिवर्तन
डॉ. अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि गर्मियों में उन्माद से पीड़ित मरीजों और जाड़े में डिप्रेशन के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। खासकर गर्मियों में नींद पूरी नहीं हाेने के कारण चिड़चिड़ाहट ज्यादा होती है। बताया कि गर्मी के दिनों में बढ़ते तापमान का असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। अधिक तापमान के कारण मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर में परिवर्तन, नींद पूरी न होने के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। गर्मी में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन जैसे चिढ़चिढ़ापन, गुस्सा, आक्रमकता बढ़ जाती है।
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ऐसा देखा गया है कि बाइपोलर मूड डिसऑर्डर के मैनिक एपिसोड (उन्माद) के अटैक्स बढ़ जाते हैं। इसमें मरीज बहुत ज्यादा बोलने लगता है। बड़ी-बड़ी बातें करता है। हिंसात्मक भी को सकता है। गर्मी में आग लगने आदि घटनाओं से हुए नुकसान से काफी लोग सदमे में आकर मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं। साथ में डिप्रेशन, एंजायटी डिसऑर्डर जैसे कि चिंता, घबराहट आदि की बीमारियां होने की भी आशंका बढ़ जाती है। गर्मी में मानसिक रोगियों में आत्मघात के विचार और आशंकाओं में भी वृद्धि देखी गई है। गर्मी के दिनों में मानसिक रोगियों की मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
ऐसे करें बचाव
डाॅ. अनूप कहते हैं कि इसलिए गर्मी में रात में सोते समय कमरा ठंडा रखने का प्रयास करें। अनिद्रा, उदासी, चिन्ता, घबराहट, गुस्सा आदि महसूस होने पर तुरंत मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। उन्होंने साथ ही अपील कि सभी लोग जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। ताकि प्रत्येक वर्ष बढ़ती भीषण गर्मी पर अंकुश लग सके।