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Deoria News: निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान प्रसूता की मौत, हंगामा
Sun, 13 Apr 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 13 Apr 2025 12:02 AM IST
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प्रसूता सुनैना की फाइल फोटो
अस्पताल बंद कर भागा संचालक, अस्पताल सील, जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित
चौहट्टा वार्ड की रहने वाली थी सुनैना
आशा कार्यकर्ता पर निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी।
रुद्रपुर। नगर के सेमरौना पुल से सटे एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान शुक्रवार की देर रात करीब दो बजे प्रसूता की मौत हो गई। प्रसूता की मौत के बाद संचालक आनन-फानन में शव सहित परिजनों को अस्पताल से बाहर कर ताला बंद कर फरार हो गया। प्रसूता 24 वर्षीय सुनैना नगर के चौहट्टा वार्ड की रहने वाली थी। शनिवार की सुबह परिजन अस्पताल पर हंगामा कर कार्रवाई की मांग करने लगे।
घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार शिवेंद्र कौंडिल्य और सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया। उधर, घटना के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। जांच के लिए डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम बनाई गई है।
चौहट्टा वार्ड निवासी कुश राजभर की बेटी सुनैना की शादी मोहल्ले में गोविंद राजभर से हुई थी। गोविंद पंजाब में एक कंपनी में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। वह पत्नी की डिलीवरी कराने घर आया था। गोविंद का आरोप है कि सीएचसी की एक आशा कार्यकर्ता पत्नी और उसे सेमरौना पुल के पास निजी अस्पताल में ले गई। रात में संचालक एक महिला के साथ ऑपरेशन करने लगा। जबकि उसने बाहर से चिकित्सक बुलाने का झांसा दिया था।
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ऑपरेशन शुरू होते ही वह रुपये की मांग करने लगा। परिजनों ने तत्काल रुपये दिए। कुछ देर बाद वह ऑपरेशन थियेटर से बाहर आया और एक मेल बेबी को दिया। 15 मिनट बाद संचालक ने प्रसूता को बाहर निकलवा दिया। संचालक ने बताया कि हालत गंभीर है, खून की कमी है, दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा। घर वाले कुछ समझ पाते, इसी बीच सभी को अस्पताल से बाहर कर ताला बंद कर भाग गया। प्रसूता को मरा देख परिजन अवाक रह गए। सेनैना के पति ने बताया कि एक आशा मोहल्ले की अन्य महिलाओं को लेकर यहीं आती रही। उसके चक्कर में आ गए। सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराने को भेजा है। तहरीर नहीं मिली है।
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दुधमुंहा बच्चे से छीन गया मां का आंचल
शुक्रवार की रात जन्मे दुधमुंहे बच्चे से उसकी मां का आंचल छीन गया। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने बिना चिकित्सक के ही ऑपरेशन कर प्रसूता की जिंदगी खतरे में डाल दी । प्रसूता की मौत के बाद अब उसके परवरिश और जीवन पर संकट आ गया। मां के मरने के बाद उसके ननिहाल वालों ने सीएचसी में नवजात की जांच कराई। बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है।
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पूर्व में भी संचालक रहा है चर्चा में
न्यू आदर्श अस्पताल का संचालक पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग के छापे और मरीजों के परिजनों के हंगामे को लेकर चर्चा में रहा है, मगर ऊंची रसूख के कारण वह हर बार बच जाता रहा। शनिवार की सुबह भी अस्पताल पर प्रसूता की मौत के बाद कुछ खादी के लोग स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तालमेल बैठाने में जुट देखे गए। संचालक तीन साल पहले सेमरौना पुल पार वह किराये की मकान में अस्पताल संचालित करता था। तब सीएमओ की छापे में छह प्रसूताएं मिलीं थीं और दो आशा कार्यकर्ताओं का नाम सामने आया। विभाग और खादी में अच्छी पकड़ वाले संचालक ने मामला ठंडे बस्ते में डलवा दिया। दो साल से पुल के उत्तर तरफ खुद की मकान में अस्पताल चलाने लगा। संचालक गौरी बाजार में भी अस्पताल खोल कर विवाद में घिरा था।
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सीएचसी अधीक्षक ने किया अस्पताल का निरीक्षण
घटना की जानकारी पर सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. एसके राव ने अस्पताल का निरीक्षण किया। कहा कि संचालक को अस्पताल के कागजात लेकर उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया है। विभाग जांच में जुटा है।
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कोट
मामले की जानकारी होने पर नोडल अधिकारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. आरपी यादव और सीएचसी प्रभारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल को पुलिस की मौजूदगी में सील कर दिया गया है। जांच के लिए नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। इसमें प्रभारी डॉ. एसके राव, डॉ. राहुल पटेल, डॉ. वाईपी यादव शामिल हैं। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एसके सिन्हा, प्रभारी सीएमओ
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चौहट्टा वार्ड की रहने वाली थी सुनैना
आशा कार्यकर्ता पर निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी।
रुद्रपुर। नगर के सेमरौना पुल से सटे एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान शुक्रवार की देर रात करीब दो बजे प्रसूता की मौत हो गई। प्रसूता की मौत के बाद संचालक आनन-फानन में शव सहित परिजनों को अस्पताल से बाहर कर ताला बंद कर फरार हो गया। प्रसूता 24 वर्षीय सुनैना नगर के चौहट्टा वार्ड की रहने वाली थी। शनिवार की सुबह परिजन अस्पताल पर हंगामा कर कार्रवाई की मांग करने लगे।
घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार शिवेंद्र कौंडिल्य और सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया। उधर, घटना के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। जांच के लिए डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम बनाई गई है।
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चौहट्टा वार्ड निवासी कुश राजभर की बेटी सुनैना की शादी मोहल्ले में गोविंद राजभर से हुई थी। गोविंद पंजाब में एक कंपनी में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। वह पत्नी की डिलीवरी कराने घर आया था। गोविंद का आरोप है कि सीएचसी की एक आशा कार्यकर्ता पत्नी और उसे सेमरौना पुल के पास निजी अस्पताल में ले गई। रात में संचालक एक महिला के साथ ऑपरेशन करने लगा। जबकि उसने बाहर से चिकित्सक बुलाने का झांसा दिया था।
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ऑपरेशन शुरू होते ही वह रुपये की मांग करने लगा। परिजनों ने तत्काल रुपये दिए। कुछ देर बाद वह ऑपरेशन थियेटर से बाहर आया और एक मेल बेबी को दिया। 15 मिनट बाद संचालक ने प्रसूता को बाहर निकलवा दिया। संचालक ने बताया कि हालत गंभीर है, खून की कमी है, दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा। घर वाले कुछ समझ पाते, इसी बीच सभी को अस्पताल से बाहर कर ताला बंद कर भाग गया। प्रसूता को मरा देख परिजन अवाक रह गए। सेनैना के पति ने बताया कि एक आशा मोहल्ले की अन्य महिलाओं को लेकर यहीं आती रही। उसके चक्कर में आ गए। सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराने को भेजा है। तहरीर नहीं मिली है।
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दुधमुंहा बच्चे से छीन गया मां का आंचल
शुक्रवार की रात जन्मे दुधमुंहे बच्चे से उसकी मां का आंचल छीन गया। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने बिना चिकित्सक के ही ऑपरेशन कर प्रसूता की जिंदगी खतरे में डाल दी । प्रसूता की मौत के बाद अब उसके परवरिश और जीवन पर संकट आ गया। मां के मरने के बाद उसके ननिहाल वालों ने सीएचसी में नवजात की जांच कराई। बच्चा स्वस्थ बताया जा रहा है।
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पूर्व में भी संचालक रहा है चर्चा में
न्यू आदर्श अस्पताल का संचालक पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग के छापे और मरीजों के परिजनों के हंगामे को लेकर चर्चा में रहा है, मगर ऊंची रसूख के कारण वह हर बार बच जाता रहा। शनिवार की सुबह भी अस्पताल पर प्रसूता की मौत के बाद कुछ खादी के लोग स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तालमेल बैठाने में जुट देखे गए। संचालक तीन साल पहले सेमरौना पुल पार वह किराये की मकान में अस्पताल संचालित करता था। तब सीएमओ की छापे में छह प्रसूताएं मिलीं थीं और दो आशा कार्यकर्ताओं का नाम सामने आया। विभाग और खादी में अच्छी पकड़ वाले संचालक ने मामला ठंडे बस्ते में डलवा दिया। दो साल से पुल के उत्तर तरफ खुद की मकान में अस्पताल चलाने लगा। संचालक गौरी बाजार में भी अस्पताल खोल कर विवाद में घिरा था।
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सीएचसी अधीक्षक ने किया अस्पताल का निरीक्षण
घटना की जानकारी पर सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. एसके राव ने अस्पताल का निरीक्षण किया। कहा कि संचालक को अस्पताल के कागजात लेकर उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया है। विभाग जांच में जुटा है।
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कोट
मामले की जानकारी होने पर नोडल अधिकारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. आरपी यादव और सीएचसी प्रभारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल को पुलिस की मौजूदगी में सील कर दिया गया है। जांच के लिए नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। इसमें प्रभारी डॉ. एसके राव, डॉ. राहुल पटेल, डॉ. वाईपी यादव शामिल हैं। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एसके सिन्हा, प्रभारी सीएमओ