{"_id":"669c118fe9d32a9a61036c44","slug":"parotid-cyst-removed-through-operation-in-medical-college-deoria-news-c-208-1-sgkp1009-130753-2024-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कर निकाला पैरोटिड सिस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कर निकाला पैरोटिड सिस्ट
विज्ञापन
- एक साल से परेशान थी महिला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में पैरोटिड ग्रंथी से शुक्रवार को ऑपरेशन कर सिस्ट निकाला गया। वह करीब दो सेमी गुणे दो सेमी का था। दो घंटे तक चला ऑपरेशन सफल रहा। महिला एक साल से परेशान थी। उसके कान के नीचे सूजन आ गई थी और दर्द से परेशान थी। ऑपरेशन के बाद उसे राहत मिली है। निजी अस्पताल में इस ऑपरेशन पर 35 से 40 हजार रुपये खर्च करना पड़ता।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में आए दिन ऑपरेशन कर मरीजों को राहत देने का कार्य किया जा रहा है। ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतार लग रही है। शनिवार को पैरोटिड ग्लैंड का ऑपरेशन कर सिस्ट निकाला गया। महुआडी थाना क्षेत्र के विक्रम विशुनपुर की ज्ञांती देवी (38) पत्नी अनिरुद्ध के पैरोटिड ग्लैंड में सिस्ट बन गया था। उसके कान के आगे व नीचे सूजन हो गया था और दर्द भी होता था। वह करीब एक साल से परेशान थी।
निजी अस्पताल में इलाज कराई, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद वह पंद्रह दिन पहले ईएनटी विभाग के ओपीडी में पहुंची। डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने जांच किया। इसके बाद कुछ जांच कराई गई। रिपोर्ट में सूजन निकला। उसे शनिवार को बुलाया और पैरोटिड ग्रंथी का आपरेशन सिस्ट निकाला। ऑपरेशन लंबा था, जो दो घंटे तक चला। ऑपरेशन सफल रहा। इसके बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। ऑपरेशन करने वाली टीम में स्टाफ नर्स सुनीता, सुमैरा, विनोद शामिल रहे।
विज्ञापन
ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पैरोटिड ग्लैंड कान के आगे होती है। यह थूक बनाने का काम करती है। गलसुइया होने, ग्रंथी में इंफेक्शन हाेने व चोट लगने के कारण गांठ बनने की संभावना रहती है। इस ग्रंथी के नीचे चेहरे की नस होती। सिस्ट बनने से कान के आगे व नीचे सूजन होता है, जो बढ़ाता जाता है। अधिक बढ़ने पर चेहरे की नस को दबा देती है, जिससे चेहरा टेढ़ा होने की संभावना रहती है। परेशानी होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में पैरोटिड ग्रंथी से शुक्रवार को ऑपरेशन कर सिस्ट निकाला गया। वह करीब दो सेमी गुणे दो सेमी का था। दो घंटे तक चला ऑपरेशन सफल रहा। महिला एक साल से परेशान थी। उसके कान के नीचे सूजन आ गई थी और दर्द से परेशान थी। ऑपरेशन के बाद उसे राहत मिली है। निजी अस्पताल में इस ऑपरेशन पर 35 से 40 हजार रुपये खर्च करना पड़ता।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में आए दिन ऑपरेशन कर मरीजों को राहत देने का कार्य किया जा रहा है। ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतार लग रही है। शनिवार को पैरोटिड ग्लैंड का ऑपरेशन कर सिस्ट निकाला गया। महुआडी थाना क्षेत्र के विक्रम विशुनपुर की ज्ञांती देवी (38) पत्नी अनिरुद्ध के पैरोटिड ग्लैंड में सिस्ट बन गया था। उसके कान के आगे व नीचे सूजन हो गया था और दर्द भी होता था। वह करीब एक साल से परेशान थी।
विज्ञापन
निजी अस्पताल में इलाज कराई, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद वह पंद्रह दिन पहले ईएनटी विभाग के ओपीडी में पहुंची। डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने जांच किया। इसके बाद कुछ जांच कराई गई। रिपोर्ट में सूजन निकला। उसे शनिवार को बुलाया और पैरोटिड ग्रंथी का आपरेशन सिस्ट निकाला। ऑपरेशन लंबा था, जो दो घंटे तक चला। ऑपरेशन सफल रहा। इसके बाद मरीज को वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। ऑपरेशन करने वाली टीम में स्टाफ नर्स सुनीता, सुमैरा, विनोद शामिल रहे।
विज्ञापन
ईएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पैरोटिड ग्लैंड कान के आगे होती है। यह थूक बनाने का काम करती है। गलसुइया होने, ग्रंथी में इंफेक्शन हाेने व चोट लगने के कारण गांठ बनने की संभावना रहती है। इस ग्रंथी के नीचे चेहरे की नस होती। सिस्ट बनने से कान के आगे व नीचे सूजन होता है, जो बढ़ाता जाता है। अधिक बढ़ने पर चेहरे की नस को दबा देती है, जिससे चेहरा टेढ़ा होने की संभावना रहती है। परेशानी होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।