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Deoria News: देवरिया बाईपास का विवाद दो माह में सुलझाने का आदेश

Sun, 26 Jul 2026 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sun, 26 Jul 2026 11:58 PM IST
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Order issued to resolve the Deoria bypass dispute within two months.
निर्माणाधीन देवरिया बाईपास। 
देवरिया/बैतालपुर। देवरिया बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने इसे दो महीने के भीतर नए सिरे से पूरा करने का आदेश दिया है। साथ ही, पूरे मामले को नियत प्राधिकारी (एडीएम व एसडीएम) के पास भेज दिया है।
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याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि धारा 3जी (3) के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित नहीं की गई।
जवाब में सरकार की ओर से दाखिल पूरक प्रति शपथ पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि 28 दिसंबर 2023 को प्रकाशित समाचार पत्र में धारा 3जी(3) के स्थान पर भूलवश केवल धारा 3डी का उल्लेख कर दिया गया था।
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इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिवादियों का यह स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जा सकता। धारा 3डी और धारा 3जी(3) अलग-अलग चरणों की कानूनी प्रक्रियाएं हैं और उद्देश्य भी अलग है।
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धारा 3डी के तहत प्रकाशित सूचना को धारा 3जी(3) की अनिवार्य सार्वजनिक सूचना का विकल्प नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से दो माह के भीतर राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया दोबारा पूरी की जाए।
मुआवजे या प्रोजेक्ट पर नहीं दिया निर्णय : कोर्ट ने मुआवजे की राशि या उसके निर्धारण के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने कहा है कि मुआवजे से जुड़े सभी मुद्दों का निर्णय सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार करेगा।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता सुरेश सिंह ने पक्ष रखा, जबकि किसानों की ओर से अधिवक्ता पारसनाथ राय और नरेश नारायण सिंह ने पैरवी की।

फैसले के बाद प्रभावित किसानों में खुशी का माहौल है। किसानों ने इसे कानून और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए किसी की जमीन अधिग्रहित नहीं की जा सकती।
भूमि बचाओ संघर्ष समिति ने भी इस निर्णय को किसानों के अधिकारों की रक्षा करने वाला ऐतिहासिक फैसला बताया है।
यह निर्णय भविष्य में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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