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Deoria News: एक नदी... सैकड़ों मजबूरियां… नाव पर टिकी दियारा की जिंदगी
Tue, 30 Dec 2025 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 30 Dec 2025 11:06 PM IST
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ट्रैक्टर और सामान के साथ नाव, दियारा के किसानों की जोखिम भरी जिंदगी की तस्वीर। (फाइल फोटो) संवा
मेहरौनाघाट। सरयू नदी में रविवार को नाव पलटने की घटना ने एक बार फिर देवरिया जिले के चुरिया देवार और बलिया जिले के मनियर दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों की रोजमर्रा की कठिनाइयों को उजागर कर दिया है।
खेती और पशुपालन के लिए यहां के लोग हर दिन नदी पार करते हैं। करीब डेढ़ दशक पहले पीपा पुल की उम्मीद जगी थी, लेकिन आस अब भी अधूरी है।
रविवार को नदी पार करते समय एक नाव पलट गई थी। इससे नाव में सवार नदी में डूबने लगे तो आसपास के मछुआरों ने उनकी जान बचाई। अगर मछुआरे देवदूत बनकर नहीं आते तो कई लोगों की जान जा सकती थी।
आसपास के गांव के लोगों का कहना है कि हमें खेती या अन्य काम के लिए नदी के पार जाना पड़ता है और नाव ही हम लोगों को सहारा है। चुरिया गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पारसनाथ बताते हैं कि सलेमपुर तहसील का अंतिम कोना नदी का कछार है। एक तरफ बलिया जिले का मनियर दियारा है तो दूसरी तरफ से देवरिया जिले का चुरिया और नदौली गांव है।
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यहां तीसरा कोना बिहार के सिवान जिले का गुठनी का है। पूरे इलाके को महाल मंझरिया कहा जाता है। यह करीब 13 हजार एकड़ का इलाका है। इसी इलाके में छोटी गंडक नदी सरयू नदी में मिलती है। इस नाते पूरा इलाका भौगोलिक दृष्टिकोण से बेहद दुर्गम हो जाता है। बरसात में जब नदियां उफान पर होती हैं, तब यहां दूर-दूर तक केवल सैलाब ही दिखता है। चुरिया गांव के सामने सरयू नदी दो हिस्से में बंट जाती है।
ग्रामीण बताते हैं कि चुरिया और नदौली समेत आसपास के कई गांवों के किसानों की खेती नदी की दोनों धाराओं के बीच के टापू पर है। इस उपजाऊ क्षेत्र में लोग सुबह ही कृषि कार्य करने पहुंच जाते हैं और वहां से शाम को घर लौटते हैं। तमाम लोगों ने वहां झोपड़ी बना ली है, जहां लोग अपने खेत व मवेशियों की देखभाल के लिए रहते भी हैं। नदी के इस दोआबा में आने-जाने से लेकर कृषि उपकरण ले जाने तक नाव ही सहारा बनती है। खाद, बीज, फसल और पशुओं के चारे को नाव से ढोना मजबूरी है। कई बार आवश्यकता से अधिक सामान लादना पड़ता है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है। बुवाई और कटाई के समय ट्रैक्टर और कंबाइन मशीन को नदी पार ले जाना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी ने किया था प्रयास : सपा सरकार में मंत्री रहते रामगोविंद चौधरी ने बलिया के मनियर दियारा में पीपा पुल लगवाने का प्रयास किया था। वे नाव से नदी पार कर उन गांवों में गए भी थे, लेकिन प्रयास फाइलों में ही रह गया और सरकार बदल गई। कुछ साल तक मामला ठंडा रहा। अब सलेमपुर की विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने भी चुरिया के पास पीपा पुल बनवाने के लिए प्रयास किया है। इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अभी पुल लगाने का काम शुरू नहीं हुआ है।
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खेती और पशुपालन के लिए यहां के लोग हर दिन नदी पार करते हैं। करीब डेढ़ दशक पहले पीपा पुल की उम्मीद जगी थी, लेकिन आस अब भी अधूरी है।
रविवार को नदी पार करते समय एक नाव पलट गई थी। इससे नाव में सवार नदी में डूबने लगे तो आसपास के मछुआरों ने उनकी जान बचाई। अगर मछुआरे देवदूत बनकर नहीं आते तो कई लोगों की जान जा सकती थी।
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आसपास के गांव के लोगों का कहना है कि हमें खेती या अन्य काम के लिए नदी के पार जाना पड़ता है और नाव ही हम लोगों को सहारा है। चुरिया गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पारसनाथ बताते हैं कि सलेमपुर तहसील का अंतिम कोना नदी का कछार है। एक तरफ बलिया जिले का मनियर दियारा है तो दूसरी तरफ से देवरिया जिले का चुरिया और नदौली गांव है।
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यहां तीसरा कोना बिहार के सिवान जिले का गुठनी का है। पूरे इलाके को महाल मंझरिया कहा जाता है। यह करीब 13 हजार एकड़ का इलाका है। इसी इलाके में छोटी गंडक नदी सरयू नदी में मिलती है। इस नाते पूरा इलाका भौगोलिक दृष्टिकोण से बेहद दुर्गम हो जाता है। बरसात में जब नदियां उफान पर होती हैं, तब यहां दूर-दूर तक केवल सैलाब ही दिखता है। चुरिया गांव के सामने सरयू नदी दो हिस्से में बंट जाती है।
ग्रामीण बताते हैं कि चुरिया और नदौली समेत आसपास के कई गांवों के किसानों की खेती नदी की दोनों धाराओं के बीच के टापू पर है। इस उपजाऊ क्षेत्र में लोग सुबह ही कृषि कार्य करने पहुंच जाते हैं और वहां से शाम को घर लौटते हैं। तमाम लोगों ने वहां झोपड़ी बना ली है, जहां लोग अपने खेत व मवेशियों की देखभाल के लिए रहते भी हैं। नदी के इस दोआबा में आने-जाने से लेकर कृषि उपकरण ले जाने तक नाव ही सहारा बनती है। खाद, बीज, फसल और पशुओं के चारे को नाव से ढोना मजबूरी है। कई बार आवश्यकता से अधिक सामान लादना पड़ता है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है। बुवाई और कटाई के समय ट्रैक्टर और कंबाइन मशीन को नदी पार ले जाना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी ने किया था प्रयास : सपा सरकार में मंत्री रहते रामगोविंद चौधरी ने बलिया के मनियर दियारा में पीपा पुल लगवाने का प्रयास किया था। वे नाव से नदी पार कर उन गांवों में गए भी थे, लेकिन प्रयास फाइलों में ही रह गया और सरकार बदल गई। कुछ साल तक मामला ठंडा रहा। अब सलेमपुर की विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने भी चुरिया के पास पीपा पुल बनवाने के लिए प्रयास किया है। इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अभी पुल लगाने का काम शुरू नहीं हुआ है।