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नहीं रहे रुद्रपुर के नूर राजबली
deoria
Updated Mon, 10 Apr 2017 11:01 PM IST
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घटना
- फोटो : amarujala
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देवरिया/रुद्रपुर।
पैरा ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर दुनिया में देश का मान बढ़ाने वाले ओलंपियन राजबली का सोमवार को निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे। अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान सोमवार की सुबह उनका निधन हो गया। पूर्व ओलंपियन के निधन का समाचार सुनते ही रुद्रपुर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पैत्रिक आवास रुद्रपुर के पिपरा कछार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
राजबली को रुद्रपुर का गौरव कहा जाता है। दोनों पैर से विकलांग राजबली ने देश की आन-बान और शान बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी । 1981 में राजबली ने जापान पैरा ओलंपिक गेम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने तैराकी और गोला क्षेपण स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने सम्मानित किया था। इसके अलावा राजबली ने पेसिफिक गेम के दौरान हांगकांग में भी तैराकी, गोला क्षेपण स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया। राजबली ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 10 स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक जीतकर दुनिया में भारत का लोहा मनवाया।
इनसेट
इधर गुरबत में जी रहे थे राजबली
ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर दुनिया में देश का मान बढ़ाने वाले राजबली इधर गुरबत में जी रहे थे। कानपुर के सूता मिल की नौकरी जाने के बाद उन्होंने गांव में गृहस्थी बसा ली। राजबली का परिवार इधर कई वर्षों से आर्थिक तंगी से परेशान था। अमर उजाला में वर्ष 2012 में राजबली की उपलब्धियां प्रकाशित होने के बाद कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने उनकी आर्थिक मदद की। खबर के प्रभाव से उन्हें सरकारी सहायता भी मिली।
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गोद लेकर पाल रहे थे दो बेटियां
रुद्रपुर। पदक जीत कर देश का सम्मान बढ़ाने वाले राजबली मुफलिसी में भी समाज को संदेश देते रहे। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। बावजूद इसके वह दो बेटियों के पिता थे। उन्होंने बेटियों को गोद लेकर उनका पालन-पोषण किया। राजबली के निधन के बाद दोनों बटियों नंदनी और नेहा के पालन-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी बलवंती देेवी पर आ गई है।
निधन पर शोक जताने वालों का तांता
पूर्व ओलंपियन के निधन पर राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद, विधायक सुरेश तिवारी, पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, मुक्तिनाथ यादव, प्रदीप यादव, पूर्व चेयरमैन डॉ रामभरोसा त्रिपाठी, सुभाष चंद मद्धेशिया, फौजदार शर्मा, चेयरमैन छट्ठेलाल निगम, मनमथ त्रिपाठी, बलराम यादव, सतीश सिंह आदि ने शोक संवेदना जताई।
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पैरा ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर दुनिया में देश का मान बढ़ाने वाले ओलंपियन राजबली का सोमवार को निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे। अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान सोमवार की सुबह उनका निधन हो गया। पूर्व ओलंपियन के निधन का समाचार सुनते ही रुद्रपुर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पैत्रिक आवास रुद्रपुर के पिपरा कछार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
राजबली को रुद्रपुर का गौरव कहा जाता है। दोनों पैर से विकलांग राजबली ने देश की आन-बान और शान बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी । 1981 में राजबली ने जापान पैरा ओलंपिक गेम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने तैराकी और गोला क्षेपण स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने सम्मानित किया था। इसके अलावा राजबली ने पेसिफिक गेम के दौरान हांगकांग में भी तैराकी, गोला क्षेपण स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया। राजबली ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 10 स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक जीतकर दुनिया में भारत का लोहा मनवाया।
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इधर गुरबत में जी रहे थे राजबली
ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर दुनिया में देश का मान बढ़ाने वाले राजबली इधर गुरबत में जी रहे थे। कानपुर के सूता मिल की नौकरी जाने के बाद उन्होंने गांव में गृहस्थी बसा ली। राजबली का परिवार इधर कई वर्षों से आर्थिक तंगी से परेशान था। अमर उजाला में वर्ष 2012 में राजबली की उपलब्धियां प्रकाशित होने के बाद कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने उनकी आर्थिक मदद की। खबर के प्रभाव से उन्हें सरकारी सहायता भी मिली।
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गोद लेकर पाल रहे थे दो बेटियां
रुद्रपुर। पदक जीत कर देश का सम्मान बढ़ाने वाले राजबली मुफलिसी में भी समाज को संदेश देते रहे। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। बावजूद इसके वह दो बेटियों के पिता थे। उन्होंने बेटियों को गोद लेकर उनका पालन-पोषण किया। राजबली के निधन के बाद दोनों बटियों नंदनी और नेहा के पालन-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी बलवंती देेवी पर आ गई है।
निधन पर शोक जताने वालों का तांता
पूर्व ओलंपियन के निधन पर राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद, विधायक सुरेश तिवारी, पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, मुक्तिनाथ यादव, प्रदीप यादव, पूर्व चेयरमैन डॉ रामभरोसा त्रिपाठी, सुभाष चंद मद्धेशिया, फौजदार शर्मा, चेयरमैन छट्ठेलाल निगम, मनमथ त्रिपाठी, बलराम यादव, सतीश सिंह आदि ने शोक संवेदना जताई।