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Deoria News: गोद में ट्रेजरी कार्यालय पहुंची वृद्धा, बोली-जिंदा हूं
Fri, 11 Nov 2022 03:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Nov 2022 03:52 PM IST
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ीवित प्रमाण पत्र देने के लिए गोद में वृद्ध महिला को ट्रेजरी कार्यालय लेकर पहुंचे घर के सदस्य। संव
- फोटो : DEORIA
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ऑनलाइन व्यवस्था धड़ाम होने के कारण पेंशनधारकों को खुद को जिंदा साबित करने के लिए दूसरे के कंधों और गोद का सहारा लेकर ट्रेजरी ऑफिस पहुंचना पड़ रहा है। इतना ही नहीं ई-केवाईसी के चक्कर में बुजुर्गों को घंटों इंतजार भी करना पड़ रहा है। हर रोज करीब 80 से सौ की संख्या में बुजुर्ग दूर-दराज क्षेत्रों से आ रहे हैं। इनके लिए न तो बैठने का इंतजाम है और न ही कोई मददगार।
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जिले के करीब 21 हजार पेंशनधारकों के लिए नवंबर माह खुद को जिंदा साबित करने वाला माह बन कर रह गया है। इसमें से करीब छह ऐसे पेंशनधारक हैं, जो सौ की उम्र पार कर चुके हैं और डबल पेंशन का फायदा उठा रहे हैं। जबकि एक हजार के करीब 80 की उम्र पार करने वाले पेंशनधारक हैं, जो बीस प्रतिशत सामान्य पेंशन से अधिक पाते हैं।
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इन सभी के लिए ई-केवाईसी, आधार से खाते का लिंक और जिंदा होने का प्रमाणपत्र देना होता है। इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी है लेकिन सर्वर काम न करने के कारण अधिकतर पेंशनधाराकों को जिला मुख्यालय के कोषागार पर आना होता है।
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इन दिनों ट्रेजरी ऑफिस पर भीड़ लग रही है। बुजुर्ग दूसरों के कंधे के सहारे ऑफिस पहुंच कर घंटों इंतजार कर रहे हैं। इतना नहीं, कोई बीमार है तो कोई खुद चल नहीं पा रहा है। ऑफिस आईं रमावाती ने बताया कि बिना खाए आई हूं। घंटों इंतजार करने के बाद काम हुआ है।
सुभावती ने बताया कि घर के लोगों को पता ही नहीं है कि ऑनलाइन भी जमा प्रमाणपत्र जमा होता है। विश्वनाथ ने बताया कि ऑनलाइन अपलोड न होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था के मंत्री लालसा यादव ने बताया कि ऑनलाइन काम न होने की वजह से दिक्कत आ रही है। अगर यह ठीक हो जाए तो काफी राहत मिलेगी।
पेंशन का वर्गीकरण
80 साल उम्र पर 20 प्रतिशत बढ़ जाती है।
85 साल की उम्र पर 30 प्रतिशत बढ़ती है।
90 साल की उम्र में 40 प्रतिशत बढ़ोत्तरी।
95 साल की उम्र में 50 प्रतिशत बढ़ती है
100 साल की उम्र 100 प्रतिशत ठीक डबल होता है।
ट्रेजरी अफसर पर भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी को सरंक्षण देने का दाग, एक कर्मचारी निलंबित
ट्रेजरी ऑफिस के एक पटल सहायक का रुपये लेते हुए कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद आरोपी कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए निदेशक कोषागार को पत्र भेजकर बताया कि वरिष्ठ कोषाधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह संरक्षण दे रहे हैं। पूरे मामले की जांच के बाद निदेशक ने लेखाकार को निलंबित कर दिया है।
जिलाधिकारी ने निदेशक कोषागार को पत्र भेज कर सात नवंबर को बताया था कि तीन नवंबर को कोषागार के कर्मचारी शारदेश कुमार सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह पेंशनधारक से रुपये लेते हुए दिख रहे हैं। यह प्रकरण वरिष्ठ कोषाधिकारी कुलदीप सरोज के संज्ञान में था लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर डीएम ने निदेशक को जानकारी दी कि वरिष्ठ कोषाधिकारी का यह रवैया भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी को संरक्षण देना वाला है। कार्रवाई न होने पर कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। पूरा मामला शासन तक पहुंचने के बाद निदेशक कोषागार नील रतन कुमार ने गंभीरता से लेते हुए पटल सहायक शारदेश कुमार सिंह के खिलाफ जांच बैठा दी।
मामले की जांच अपर निदेशक कोषागार गोरखपुर मंडल ने की। इसके बाद जांच आख्या निदेशक को सौंप दी। इसमें दोषी पाए जाने पटल सहायक शारदेश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी मेरे उच्चाधिकारी हैं। मेरे ऊपर लगे आरोप पर कुछ नहीं कह सकता हूं। पूरे प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई हुई है। ट्रेजरी ऑफिस आने वाले बुजुर्गों का सहयोग कर्मचारी करते हैं। ऑनलाइन प्रमाणपत्र जमा किया जा सकता है। -कुलदीप सरोज, वरिष्ठ कोषाधिकारी
जिलाधिकारी ने निदेशक कोषागार को पत्र भेज कर सात नवंबर को बताया था कि तीन नवंबर को कोषागार के कर्मचारी शारदेश कुमार सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह पेंशनधारक से रुपये लेते हुए दिख रहे हैं। यह प्रकरण वरिष्ठ कोषाधिकारी कुलदीप सरोज के संज्ञान में था लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर डीएम ने निदेशक को जानकारी दी कि वरिष्ठ कोषाधिकारी का यह रवैया भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी को संरक्षण देना वाला है। कार्रवाई न होने पर कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। पूरा मामला शासन तक पहुंचने के बाद निदेशक कोषागार नील रतन कुमार ने गंभीरता से लेते हुए पटल सहायक शारदेश कुमार सिंह के खिलाफ जांच बैठा दी।
मामले की जांच अपर निदेशक कोषागार गोरखपुर मंडल ने की। इसके बाद जांच आख्या निदेशक को सौंप दी। इसमें दोषी पाए जाने पटल सहायक शारदेश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी मेरे उच्चाधिकारी हैं। मेरे ऊपर लगे आरोप पर कुछ नहीं कह सकता हूं। पूरे प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई हुई है। ट्रेजरी ऑफिस आने वाले बुजुर्गों का सहयोग कर्मचारी करते हैं। ऑनलाइन प्रमाणपत्र जमा किया जा सकता है। -कुलदीप सरोज, वरिष्ठ कोषाधिकारी