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Deoria News: जिले में बढ़ी आवारा कुत्तों की संख्या
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शहर के मालवीय रोड पर घूम रहे कुत्ते।संवाद
- रोजाना 100 से अधिक लोग हो रहे शिकार, मेडिकल काॅलेज व सीएचसी में पहुंच रहे इलाज के लिए
: गर्मी में पानी नहीं मिलने से चिड़चिड़े हो जाते हैं कुत्ते
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। आवारा कुत्तों की समस्या शहर में वर्षों पुरानी है। नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग इस समस्या से आज तक शहर को मुक्त नहीं कर पाए हैं। स्थिति यह है कि रात के समय शहर की कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर दो पहिया वाहनों का आवागमन मुश्किल हो जाता है।
आवारा कुत्ते महिला, वृद्धों और बच्चों को निशाना बनाते हैं। खासकर गर्मी में कुत्ते आमजन के लिए अधिक हमलावर होते हैं। मेडिकल कॉलेज में आवारा कुत्तों के काटने पर रैबीज के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसका मरीज को अलग-अलग समय के अंतराल में कुल तीन इंजेक्शन लगवाने होते हैं।
जिले में जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अब आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिल रहा है। वैसे हम आए दिन कुत्तों के हमले में घायल होने की खबर सुनते हैं। कहीं आवारा कुत्ते बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं, तो कभी वह वाहन से जाने वालों पर हमला कर देते हैं।
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इसी बीच शनिवार को कुत्तों के झुंड ने एक चार वर्षीय मासूम को नोंच-नोंच कर मौत के घाट उतार दिया। आवारा कुत्तों के आतंक को देखते हुए लोग गलियों से निकलना कम कर दे रहे हैं। यही हाल देवरिया शहर का है। आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। शहर में कई स्थानों पर अक्सर आवारा कुत्तों के झुंडों को बैठे देखा जा सकता है। आलम यह है कि आवारा कुत्तों से परेशान होकर लोग सुबह व देर रात को घरों से निकलने से भी कतराने लगे हैं। बस स्टैंड, मार्केट, अस्पताल आदि के बीचो-बीच आवारा कुत्तों की भरमार है।
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बाइक या कार के पीछे भागते दिखते हैं
ये आवारा कुत्ते अक्सर आने-जाने वाले लोगों पर झपट पड़ते हैं कई बार ये आवारा कुत्ते एक दूसरे कुत्ते से लड़ते-लड़ते बीच सड़क में भी आ जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों का इनमें उलझकर गिरने का खतरा बना रहता है। कई बार ये लोगों की बाइक या कार के पीछे भागते हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रतिदिन 50 से 100 लोग लेते है इंजेक्शन
देवरिया। जिले में रोजाना 100 से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले लोगों में से करीब 20 फीसदी बच्चे होते हैं। कुत्ते की लार में मौजूद रेबीज वायरस से हाइड्रोफोबिया हो सकता है। यह एक लाइलाज बीमारी है और इसकी वजह से मरीज की मौत तक हो सकती है।
जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक दस हजार से अधिक लोगों को रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इनमें से ज्यादातर इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगवाए गए। प्रतिदिन की बात करें तो मेडिकल में करीब 100 और बाकी जिले के सीएचसी में कुल मिलाकर 50 इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी अस्पताल में ये इंजेक्शन निशुल्क है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए 350 से 500 रुपये तक फीस ली जाती है।
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72 घंटे के भीतर इंजेक्शन लगवाना जरूरी
डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रैबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया और उसने 72 घंटे के भीतर अपना इलाज नहीं करवाया तो उसके बाद वैक्सीन या एआरवी का टीका लगवाने का कोई फायदा नहीं है।
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पानी से लगता है डर
रैबीज वायरस से संक्रमण के बाद व्यक्ति का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। इसकी वजह से व्यक्ति या तो जल्द कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है।
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बच्चों से बताएं, छिपाएं नहीं कुत्ते का काटना
गाजियाबाद में हुई घटना में पता चला कि एक बच्चे को कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने घर पर बताया नहीं। बाद में रैबीज से उसकी मौत हो गई। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चे को जागरूक करना चाहिए कि अगर कुत्ता काटता है तो तुरंत बताएं।
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रेबीज के संक्रमण के लक्षण
पानी से डर लगना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता, भ्रम की स्थिति, खाना-पानी निगलने में कठिनाई, लार निकलना, पानी से डर लगना, अनिद्रा, लकवा मार जाना।
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जानवर के काटने पर क्या करें
काटे हुए स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डेटॉल से साफ करें, जितना जल्दी हो सके वैक्सीन एआरवी का टीका लगवाएं।
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क्या न करें
काटे हुए स्थान पर मिर्च न बांधे, घाव ज्यादा होने पर भी उस पर टांके न लगवाएं।
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कुत्तों पर नगर पालिका का नहीं है ध्यान
इस सबके बावजूद भी नगर पालिका इन कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठा रहा। यूं तो कुत्ते को सबसे वफादार जानवर माना जाता है, लेकिन अगर यह वफादारी भूल जाए तो जानलेवा हो सकता है। शहर के अंदर ऐसी कोई गली और मोहल्ला नहीं जहां आवारा कुत्तों का आतंक न हो। शाम ढलने के बाद शहर के गली-मोहल्लों में पैदल या दुपहिया पर निकलना खतरे से खाली नहीं दोपहर में भी ये कुत्ते बच्चों को निशाना बनाने से नहीं चूकते।
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कोट
पहले आवारा कुत्तों से निपटने के लिए नगर पालिका के पास कोई इंतजाम नहीं था। मासूम बच्ची को नोंच-नोच कर मार डालने की घटना काफी मार्मिक व हृदयविदारक घटना है। कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए जल्द ही एनिमल बर्थ कंट्रोल बनाकर आवारा कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण किया जाएगा।
-अंकिता शुक्ला, ईओ, नगर पालिका
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: गर्मी में पानी नहीं मिलने से चिड़चिड़े हो जाते हैं कुत्ते
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। आवारा कुत्तों की समस्या शहर में वर्षों पुरानी है। नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग इस समस्या से आज तक शहर को मुक्त नहीं कर पाए हैं। स्थिति यह है कि रात के समय शहर की कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर दो पहिया वाहनों का आवागमन मुश्किल हो जाता है।
आवारा कुत्ते महिला, वृद्धों और बच्चों को निशाना बनाते हैं। खासकर गर्मी में कुत्ते आमजन के लिए अधिक हमलावर होते हैं। मेडिकल कॉलेज में आवारा कुत्तों के काटने पर रैबीज के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसका मरीज को अलग-अलग समय के अंतराल में कुल तीन इंजेक्शन लगवाने होते हैं।
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जिले में जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अब आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिल रहा है। वैसे हम आए दिन कुत्तों के हमले में घायल होने की खबर सुनते हैं। कहीं आवारा कुत्ते बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं, तो कभी वह वाहन से जाने वालों पर हमला कर देते हैं।
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इसी बीच शनिवार को कुत्तों के झुंड ने एक चार वर्षीय मासूम को नोंच-नोंच कर मौत के घाट उतार दिया। आवारा कुत्तों के आतंक को देखते हुए लोग गलियों से निकलना कम कर दे रहे हैं। यही हाल देवरिया शहर का है। आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। शहर में कई स्थानों पर अक्सर आवारा कुत्तों के झुंडों को बैठे देखा जा सकता है। आलम यह है कि आवारा कुत्तों से परेशान होकर लोग सुबह व देर रात को घरों से निकलने से भी कतराने लगे हैं। बस स्टैंड, मार्केट, अस्पताल आदि के बीचो-बीच आवारा कुत्तों की भरमार है।
बाइक या कार के पीछे भागते दिखते हैं
ये आवारा कुत्ते अक्सर आने-जाने वाले लोगों पर झपट पड़ते हैं कई बार ये आवारा कुत्ते एक दूसरे कुत्ते से लड़ते-लड़ते बीच सड़क में भी आ जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों का इनमें उलझकर गिरने का खतरा बना रहता है। कई बार ये लोगों की बाइक या कार के पीछे भागते हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रतिदिन 50 से 100 लोग लेते है इंजेक्शन
देवरिया। जिले में रोजाना 100 से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले लोगों में से करीब 20 फीसदी बच्चे होते हैं। कुत्ते की लार में मौजूद रेबीज वायरस से हाइड्रोफोबिया हो सकता है। यह एक लाइलाज बीमारी है और इसकी वजह से मरीज की मौत तक हो सकती है।
जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक दस हजार से अधिक लोगों को रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इनमें से ज्यादातर इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगवाए गए। प्रतिदिन की बात करें तो मेडिकल में करीब 100 और बाकी जिले के सीएचसी में कुल मिलाकर 50 इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी अस्पताल में ये इंजेक्शन निशुल्क है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए 350 से 500 रुपये तक फीस ली जाती है।
72 घंटे के भीतर इंजेक्शन लगवाना जरूरी
डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रैबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया और उसने 72 घंटे के भीतर अपना इलाज नहीं करवाया तो उसके बाद वैक्सीन या एआरवी का टीका लगवाने का कोई फायदा नहीं है।
पानी से लगता है डर
रैबीज वायरस से संक्रमण के बाद व्यक्ति का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। इसकी वजह से व्यक्ति या तो जल्द कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है।
बच्चों से बताएं, छिपाएं नहीं कुत्ते का काटना
गाजियाबाद में हुई घटना में पता चला कि एक बच्चे को कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने घर पर बताया नहीं। बाद में रैबीज से उसकी मौत हो गई। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चे को जागरूक करना चाहिए कि अगर कुत्ता काटता है तो तुरंत बताएं।
रेबीज के संक्रमण के लक्षण
पानी से डर लगना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता, भ्रम की स्थिति, खाना-पानी निगलने में कठिनाई, लार निकलना, पानी से डर लगना, अनिद्रा, लकवा मार जाना।
जानवर के काटने पर क्या करें
काटे हुए स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डेटॉल से साफ करें, जितना जल्दी हो सके वैक्सीन एआरवी का टीका लगवाएं।
क्या न करें
काटे हुए स्थान पर मिर्च न बांधे, घाव ज्यादा होने पर भी उस पर टांके न लगवाएं।
कुत्तों पर नगर पालिका का नहीं है ध्यान
इस सबके बावजूद भी नगर पालिका इन कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठा रहा। यूं तो कुत्ते को सबसे वफादार जानवर माना जाता है, लेकिन अगर यह वफादारी भूल जाए तो जानलेवा हो सकता है। शहर के अंदर ऐसी कोई गली और मोहल्ला नहीं जहां आवारा कुत्तों का आतंक न हो। शाम ढलने के बाद शहर के गली-मोहल्लों में पैदल या दुपहिया पर निकलना खतरे से खाली नहीं दोपहर में भी ये कुत्ते बच्चों को निशाना बनाने से नहीं चूकते।
कोट
पहले आवारा कुत्तों से निपटने के लिए नगर पालिका के पास कोई इंतजाम नहीं था। मासूम बच्ची को नोंच-नोच कर मार डालने की घटना काफी मार्मिक व हृदयविदारक घटना है। कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए जल्द ही एनिमल बर्थ कंट्रोल बनाकर आवारा कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण किया जाएगा।
-अंकिता शुक्ला, ईओ, नगर पालिका