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The attendants created a ruckus for taking more medical fees
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नोनापार निवासी आरपीएफ कांस्टेबल की चुनार में मौत
भटनी। नोनापार गांव निवासी आरपीएफ कांस्टेबल की बुधवार को चुनार में मौत हो गई। उनकी तैनाती देवरिया स्टेशन पर थी। वह मिर्जापुर के चुनार में फायरिंग स्टेशन पर ट्रेनिंग करने गए थे। विभाग के अधिकारियों ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है। जानकारी पर परिवारीजनों का रो-रोकर रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार व परिजन चुनार के लिए निकल गए है।
भटनी थाना क्षेत्र के नोनापार गांव निवासी सूर्यदेव तिवारी (57) आरपीएफ में हेड कांस्टेबल थे। वर्तमान में उनकी तैनाती देवरिया रेलवे स्टेशन पर थी। तीन दिन पूर्व वह मिर्जापुर के चुनार में फायरिंग ट्रेनिंग करने गए थे। बुधवार को उनकी पत्नी विनोद बाला तिवारी के मोबाइल फोन पर आरपीएफ अधिकारियों ने उनके पति की मौत हो जाने की जानकारी दी।
यह खबर मिलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह चिल्लाने लगीं। शोर सुनकर बच्चे उनके पास पहुंचे तो पिता की मौत की खबर पाकर बेटा रविशंकर तिवारी, सर्वेश्वर तिवारी, बेटी सीमा व नैना रोने लगीं। घर से रोने की आवाज सुनकर दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुट गई। पड़ोसियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बढ़ाया। बाद में परिवारीजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक चुनार के लिए रवाना हो गए।
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भटनी। नोनापार गांव निवासी आरपीएफ कांस्टेबल की बुधवार को चुनार में मौत हो गई। उनकी तैनाती देवरिया स्टेशन पर थी। वह मिर्जापुर के चुनार में फायरिंग स्टेशन पर ट्रेनिंग करने गए थे। विभाग के अधिकारियों ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है। जानकारी पर परिवारीजनों का रो-रोकर रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार व परिजन चुनार के लिए निकल गए है।
भटनी थाना क्षेत्र के नोनापार गांव निवासी सूर्यदेव तिवारी (57) आरपीएफ में हेड कांस्टेबल थे। वर्तमान में उनकी तैनाती देवरिया रेलवे स्टेशन पर थी। तीन दिन पूर्व वह मिर्जापुर के चुनार में फायरिंग ट्रेनिंग करने गए थे। बुधवार को उनकी पत्नी विनोद बाला तिवारी के मोबाइल फोन पर आरपीएफ अधिकारियों ने उनके पति की मौत हो जाने की जानकारी दी।
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यह खबर मिलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह चिल्लाने लगीं। शोर सुनकर बच्चे उनके पास पहुंचे तो पिता की मौत की खबर पाकर बेटा रविशंकर तिवारी, सर्वेश्वर तिवारी, बेटी सीमा व नैना रोने लगीं। घर से रोने की आवाज सुनकर दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुट गई। पड़ोसियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बढ़ाया। बाद में परिवारीजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक चुनार के लिए रवाना हो गए।
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