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Deoria News: हनुमान मंदिर प्रकरण में नया मोड़ कमिश्नर करेंगे दोबारा सुनवाई
Mon, 01 Sep 2025 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 01 Sep 2025 11:45 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। चर्चित मनोकामना हनुमान मंदिर प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। राजस्व परिषद ने महंत परमात्मा दास की ओेर से दायर मामले को रिकॉल कर लिया है और कमिश्नर स्तर पर दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
राजस्व परिषद ने साफ कहा है कि इस विवाद का निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए। सुनवाई के दौरान तीसरे पक्ष मुकुंद भास्कर मणि ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण गांधी कुंड नामक संस्था ने कराया था। पहले यहां भगवान शंकर का मंदिर बनाया गया।
इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई। मंदिर सिर्फ तीन से पांच डिसमिल जमीन पर बना था। इसकी देखरेख के लिए एक पुजारी की नियुक्ति की गई थी। तीसरे पक्ष का कहना है कि मंदिर की जमीन की आड़ में महंत परमात्मा दास ने गांधी कुंड पोखरा और आसपास की जमीन पर भी अपना नाम चढ़वा लिया। यह काम वर्ष 1999 में तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार की मिलीभगत से किया गया था।
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बाद में वर्ष 2013 में कमिश्नर ने एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया था, मगर महंत परमात्मा दास ने इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रकरण राजस्व परिषद तक पहुंचा दिया। अब परिषद ने मामले को रिकॉल कर लिया है। फिर से कमिश्नर को इसकी सुनवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस विवाद का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि मंदिर की वास्तविक स्थिति और जमीन के स्वामित्व पर बनी भ्रांतियों का समाधान हो सके।
आदेशों पर उठे सवाल, कानून की अनदेखी का आरोप : हनुमान मंदिर प्रकरण में कानूनी पेच और गहराते नजर आ रहे हैं। तीसरे पक्ष के मुकुंद भास्कर मणि ने आरोप लगाया है कि महंत परमात्मा दास ने खुद को सरयू दास का चेला और मंदिर का सर्वराकार बताते हुए विवादित भूमि पर अवैध रूप से अपना नाम दर्ज कराया था।
उनका कहना है कि यह कार्रवाई वाद संख्या 40/221 अंतर्गत धारा 33/39 उत्तर प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम (आदेश दिनांक 9 अगस्त 1999) तथा तहसीलदार का आदेश दिनांक 17 नवंबर 2005 (धारा 34 वाद संख्या 8811/31/2005) के आधार पर की गई थी। इसमें तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने भी सहयोग किया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई गई कि जिस भूखंड और पोखरे पर विवाद है, वहां जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू ही नहीं होता।
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देवरिया। चर्चित मनोकामना हनुमान मंदिर प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। राजस्व परिषद ने महंत परमात्मा दास की ओेर से दायर मामले को रिकॉल कर लिया है और कमिश्नर स्तर पर दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
राजस्व परिषद ने साफ कहा है कि इस विवाद का निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए। सुनवाई के दौरान तीसरे पक्ष मुकुंद भास्कर मणि ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण गांधी कुंड नामक संस्था ने कराया था। पहले यहां भगवान शंकर का मंदिर बनाया गया।
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इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई। मंदिर सिर्फ तीन से पांच डिसमिल जमीन पर बना था। इसकी देखरेख के लिए एक पुजारी की नियुक्ति की गई थी। तीसरे पक्ष का कहना है कि मंदिर की जमीन की आड़ में महंत परमात्मा दास ने गांधी कुंड पोखरा और आसपास की जमीन पर भी अपना नाम चढ़वा लिया। यह काम वर्ष 1999 में तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार की मिलीभगत से किया गया था।
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बाद में वर्ष 2013 में कमिश्नर ने एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया था, मगर महंत परमात्मा दास ने इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रकरण राजस्व परिषद तक पहुंचा दिया। अब परिषद ने मामले को रिकॉल कर लिया है। फिर से कमिश्नर को इसकी सुनवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस विवाद का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि मंदिर की वास्तविक स्थिति और जमीन के स्वामित्व पर बनी भ्रांतियों का समाधान हो सके।
आदेशों पर उठे सवाल, कानून की अनदेखी का आरोप : हनुमान मंदिर प्रकरण में कानूनी पेच और गहराते नजर आ रहे हैं। तीसरे पक्ष के मुकुंद भास्कर मणि ने आरोप लगाया है कि महंत परमात्मा दास ने खुद को सरयू दास का चेला और मंदिर का सर्वराकार बताते हुए विवादित भूमि पर अवैध रूप से अपना नाम दर्ज कराया था।
उनका कहना है कि यह कार्रवाई वाद संख्या 40/221 अंतर्गत धारा 33/39 उत्तर प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम (आदेश दिनांक 9 अगस्त 1999) तथा तहसीलदार का आदेश दिनांक 17 नवंबर 2005 (धारा 34 वाद संख्या 8811/31/2005) के आधार पर की गई थी। इसमें तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने भी सहयोग किया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई गई कि जिस भूखंड और पोखरे पर विवाद है, वहां जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू ही नहीं होता।