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विभाजन की त्रासदी से प्रभावित हुआ था राष्ट्रीय मनोबल : डॉ. अजय मणि
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एसएसबीएल इंटर कॉलेज में विभाजन विभीषिका गोष्ठी को प्रधानाचार्य डॉ अजय मणि त्रिपाठी ने संबोधित क
- फोटो : DEORIA
विभाजन की त्रासदी से प्रभावित हुआ था राष्ट्रीय मनोबल : डॉ. अजय मणि
देवरिया। सेवा समिति बनवारी लाल इंटर कालेज में ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ पर रविवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. अजय मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारत के विभाजन से उपजी त्रासदी के कारण आजादी के दशकों तक हमारा राष्ट्रीय मनोबल गिरा रहा। यही कारण रहा कि हम 1962 के युद्ध में चीन को कारगर जवाब नहीं दे सके। भारत का विभाजन नहीं हुआ होता तो हम विश्व नेता की प्रतिष्ठा वर्षों पहले अर्जित कर चुके होते।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जब भारत आर्थिक राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से दुनिया का नेता हो जाएगा तो अखंड भारत का सपना पुन: साकार हो सकता है। डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि भारत का विभाजन केवल माउंटबेटन योजना का परिणाम नहीं है, बल्कि वर्षों के ब्रिटिश षड्यंत्र तथा मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति का फल है। उसका नीतिगत मुकाबला करने में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की नेतृत्वकर्ता कांग्रेस विफल रही। कांग्रेस ने यदि जिन्ना, मोहम्मद अली और इकबाल के इरादों को समय रहते पहचान लिया होता तो विभाजन नहीं हुआ होता।
अनिल मिश्र ने कहा कि विभाजन की विभीषिका का मूल्यांकन करके हम भविष्य के सामाजिक और राजनीतिक नीतियों का निर्माण कर सकते हैं। अशोक चौहान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सीमा पर दोनों ओर के नौजवान सैनिक आए दिन शहीद होते हैं। यह विभाजन की विभीषिका का ही परिणाम है। डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि भारत का विभाजन वह कैंसर है जिसके दुष्परिणाम अभी भी भारतीय राष्ट्र को झेलना पड़ रहा है। संचालन अखिलेश पांडेय ने किया। इस दौरान देवव्रत श्रीवास्तव, बीडी पांडेय, डॉ. शिवधारी प्रसाद, अजय कुमार पांडेय, रमाशंकर चौरसिया संजीव कुमार पाठक आदि मौजूद रहे।
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देवरिया। सेवा समिति बनवारी लाल इंटर कालेज में ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ पर रविवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. अजय मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारत के विभाजन से उपजी त्रासदी के कारण आजादी के दशकों तक हमारा राष्ट्रीय मनोबल गिरा रहा। यही कारण रहा कि हम 1962 के युद्ध में चीन को कारगर जवाब नहीं दे सके। भारत का विभाजन नहीं हुआ होता तो हम विश्व नेता की प्रतिष्ठा वर्षों पहले अर्जित कर चुके होते।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जब भारत आर्थिक राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से दुनिया का नेता हो जाएगा तो अखंड भारत का सपना पुन: साकार हो सकता है। डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि भारत का विभाजन केवल माउंटबेटन योजना का परिणाम नहीं है, बल्कि वर्षों के ब्रिटिश षड्यंत्र तथा मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति का फल है। उसका नीतिगत मुकाबला करने में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की नेतृत्वकर्ता कांग्रेस विफल रही। कांग्रेस ने यदि जिन्ना, मोहम्मद अली और इकबाल के इरादों को समय रहते पहचान लिया होता तो विभाजन नहीं हुआ होता।
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अनिल मिश्र ने कहा कि विभाजन की विभीषिका का मूल्यांकन करके हम भविष्य के सामाजिक और राजनीतिक नीतियों का निर्माण कर सकते हैं। अशोक चौहान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सीमा पर दोनों ओर के नौजवान सैनिक आए दिन शहीद होते हैं। यह विभाजन की विभीषिका का ही परिणाम है। डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि भारत का विभाजन वह कैंसर है जिसके दुष्परिणाम अभी भी भारतीय राष्ट्र को झेलना पड़ रहा है। संचालन अखिलेश पांडेय ने किया। इस दौरान देवव्रत श्रीवास्तव, बीडी पांडेय, डॉ. शिवधारी प्रसाद, अजय कुमार पांडेय, रमाशंकर चौरसिया संजीव कुमार पाठक आदि मौजूद रहे।
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