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Deoria News: चढ़ावे के इंतजार में अलमारी में कैद हैं नामांतरण की 200 से अधिक फाइलें

Mon, 03 Jul 2023 11:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jul 2023 11:45 PM IST
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More than 200 files of nomination are imprisoned in the cupboard waiting for offering
पालिका अध्यक्ष ने दिया दोबारा नामांतरण सप्ताह आयोजित करने का निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नामांतरण सप्ताह आयोजित कराकर भी पालिका अध्यक्ष लंबित फाइलों का निस्तारण नहीं करा पाईं। अब उन्हें पता चला है कि नामांतरण की 200 से अधिक फाइलें अलमारी में कैद हैं। इसलिए उन्होंने दोबारा से नामांतरण सप्ताह आयोजित करने का निर्देश दिया है, ताकि इन फाइलों का निस्तारण किया जा सके।
दरअसल, नामांतरण की पत्रावलियों के निस्तारण में नगर पालिका के बाबुओं का खेल लंबा है। नामांतरण कराने के लिए चक्कर लगाने वालों का आरोप होता है कि चढ़ावा चढ़ाने पर काम जल्दी हो जाता है। सूत्रों का कहना है कि बाबू उन्हीं फाइलों को आलमारी से बाहर निकालते हैं जिनका चढ़ावा चढ़ जाता है। नहीं तो फाइल अलमारी में कैद होकर रह जाती है और लोग चक्कर लगाते रह जाते हैं। इन आरोपों में कितना दम है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर पालिका अध्यक्ष नामांतरण सप्ताह आयोजित करके भी लंबित फाइलों का निस्तारण नहीं करा पाईं। 26 जून से आयोजित हुए नामांतरण सप्ताह में बाबू केवल 73 फाइलें ही प्रस्तुत कर पाए।
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शहर में भवन व भू-स्वामियों से नगर पालिका कर वसूलती है। गृह स्वामी की मृत्यु या संपत्ति हस्तांतरित होने पर मालिकाना हक जताने वाले लोग संपत्ति नामांतरण के लिए नगर पालिका में आवेदन करते हैं। आवेदन करने के बाद पत्रावली निस्तारण के लिए 45 दिन का समय निर्धारित है। इसके बावजूद तमाम लोगों की फाइलें कई वर्षों से में लंबित हैं। बताया जा रहा है कि ऐसी फाइलों की संख्या 300 से अधिक है।
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कर निर्धारण अधिकारी बोलीं, मेरे पास बाबू नहीं लाते थे फाइल
देवरिया। नगर पालिका में लंबित नामांतरण की पत्रावलियों के मामले को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। अध्यक्ष अलका सिंह ने कर निर्धारण अधिकारी शशिकला को पत्र जारी कर चेतावनी दी तो जवाब में उन्होंने पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया। कर निर्धारण अधिकारी ने पिछले कई पत्रों का हवाला देकर कहा कि मैं लगातार इस बात को लिखती रही हूं कि मेरे पास नामांतरण से संबंधित कोई पत्रावली नहीं आती है। इस संबंध में मैंने शासन तक को लिखा है। आपने कभी मामले का संज्ञान नहीं लिया। प्रकाशन के उपरांत पत्रावली का निस्तारण कौन करता है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। समस्त जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षक और डिमांड लिपिक की है। पत्रावली मेरे बजाय ईओ के समक्ष प्रस्तुत होती है।

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नामांतरण की पत्रावलियों के निस्तारण की जिम्मेदारी कर निर्धारण अधिकारी की भी है। उनके पास फाइलें नहीं जाती थीं इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अब पता चला है कि नामांतरण की 200 से अधिक फाइलें लंबित हैं। दोबारा नामांतरण सप्ताह आयोजित करने का निर्देश ईओ, कर निर्धारण अधिकारी समेत संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को दिया गया है। सभी मिल बैठकर पत्रावलियों का निस्तारण करेंगे।
- अलका सिंह, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद देवरिया।
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