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Deoria News: आयुष्मान योजना में भ्रष्टाचार का घुन...एक साल में कर दिया 3.54 करोड़ का इलाज
Fri, 01 Dec 2023 11:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 01 Dec 2023 11:04 PM IST
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शासन में पहुंची शिकायत तो डीएम ने सीएमओ से मांगा इलाज कराने वाले मरीजों का ब्योरा
प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में शामिल जिले के 17 निजी अस्पतालों पर इलाज की है सुविधा
देवरिया। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में भ्रष्टाचार का घुन लग गया है। योजना लागू होने (5 फरवरी 2018) के शुरूआती दिनों से शामिल जिले के कई निजी अस्पतालों ने अभी तक अधिकतम 63 लाख रुपये का इलाज किया है, वहीं, एक से दो साल पहले योजना में शामिल हुए निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज और जांच के खर्च का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच गया है। जिले के एक अस्पताल में योजना के तहत बीते तीन माह में एक हजार मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया है, तो एक अन्य अस्पताल ने एक साल में 3.54 करोड़ का इलाज किया है। इलाज के नाम पर धांधली और सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायत शासन में पहुंचने के बाद इस मामले में डीएम ने सख्त रूख अपनाया।
6 नवंबर को डीएम अखंड प्रताप सिंह ने सीएमओ को चिट्ठी भेजकर कहा कि आयुष्मान योजना में शामिल कई निजी अस्पतालों में फर्जी बिल बाउचर के नाम पर मरीजों के इलाज का भुगतान की शिकायत मिल रही है। ऐसे में 1 अप्रैल 2022 से 31 अक्तूबर 2023 तक जिन मरीजों का इलाज हुआ है उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ ब्योरा उपलब्ध कराया जाए। सख्ती के बाद अब करोड़ों का इलाज और जांच करने वाले निजी अस्पतालों के बकाया भुगतान में तेजी की जा रही है। वहीं, इलाज कराने वाले रोगियों का ब्योरा देने में करीब एक माह बाद भी टाल मटोल किया जा रहा है।
गरीबों को पांच लाख तक के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 5 फरवरी 2018 को आयुष्मान योजना शुरू की गई । इलाज में सहूलियत के लिए सरकारी अस्पतालों के अलावा मानक पूरा करने वाले जिले के 17 निजी अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया। लेकिन कुछ समय बाद ही इलाज, जांच और डॉयलिसिस के नाम पर आयुष्मान योजना की आड़ में धांधली के मामले सामने आने लगे।
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सूत्रों के अनुसार, सीएमओ कार्यालय और निजी कंपनियों के वर्करों की मिलीभगत से इलाज के नाम पर यह खेल चल रहा है। अगर निष्पक्ष तरीके से गैर विभागीय अफसरों से जांच करा दी जाए तो आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आएगा और निजी कंपनी के वर्कर समेत कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
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इलाज के नाम पर ऐसे होता है खेल
जिले के निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना में शामिल जिन मरीजों का इलाज होता है। उनका सत्यापन हेरिटेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर करते हैं। इनकी जांच के बाद मुख्य कार्यपालक अधिकारी आयुष्मान भारत (सीईओ), लखनऊ के स्तर से भुगतान किया जाता है। सूत्रों की मानें तो जो निजी अस्पताल कुल भुगतान का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा निजी कंपनी के कोआर्डिनेटर के माध्यम से लखनऊ तक नहीं पहुंचाते, उनका क्लेम कमी दिखाकर रोक दिया जाता है। भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल निजी अस्पताल वालों का सत्यापन और क्लेम आंख मूंद कर पास किया जाता है। धांधली में शामिल निजी अस्पताल संचालक विशेषज्ञ डॉक्टरों की फर्जी मुहर और पैड का इस्तेमाल करते हैं।
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तीन माह में कर दिया एक हजार मोतियाबिंद का ऑपरेशन
सीसी रोड के चटनी गढ़ही के पास अशोक अस्पताल संचालित होता है। यहां सिर्फ मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है। आयुष्मान योजना में शामिल इस अस्पताल में दो साल में करीब एक करोड़ रुपये का ऑपरेशन कर दिया गया है। बीते तीन माह में आयुष्मान योजना के तहत करीब एक हजार मोतियाबिंद वाले मरीजों की आंख का ऑपरेशन इस अस्पताल में हुआ है। यह गौर करने वाली बात है कि मेडिकल कॉलेज में इतने विशेषज्ञ डॉक्टर और सुविधाएं होने के बाद भी दो माह में इतने मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं किए गए हैं। जिस व्यक्ति का यह अस्पताल है। वह रूद्रपुर सीएचसी पर लैब टेक्नीशिन है। वहीं एटलस ग्लोबल स्पेशियालिटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर ने एक साल में 3.54 करोड़ का इलाज किया है।
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सत्यापन रिपोर्ट का डाटा मांगा तो रफूचक्कर हुआ कंपनी का जिला कोआर्डिनेटर
डीएम अखंड प्रताप सिंह के सामने आयुष्मान योजना में शामिल मरीजों के इलाज के फर्जी बिल बाउचर के जरिए भुगतान लेने का मामला पहुंचा तो वह गंभीर हुए। डीएचएस की बैठक में हेरिटेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर अमरदीप चौबे से डीएम ने पूछताछ शुरू की और सत्यापन रिपोर्ट का डाटा मांगा तो वह रफूचक्कर हो गया। उसकी जगह पर कंपनी ने दूसरे कोऑर्डिनेटर को भेजा है। आयुष्मान के नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. कार्तिकेय पांडेय योजना में शामिल निजी अस्पताल संचालकों से कई बार ब्यौरा मांग चुके हैं, लेकिन वे नहीं दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह खेल लखनऊ के मुख्य कार्यपालक कार्यालय, आयुष्मान योजना चल रहा है, क्योंकि क्लेम पास करने से लेकर भुगतान तक का अधिकारी इन्ही लोगों के हाथ में है।
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आयुष्मान योजना में शामिल हैं ये अस्पताल
आयुष्मान योजना में आरोग्य अस्पताल सलेमपुर, आस्था हॉस्पिटल न्यू कालोनी,अब्दुल हामिद मेडिकल केयर सेंटर, शांति हॉस्पिटल न्यू कालोनी,आबिदा हॉस्पिटल एव रिसर्च सेंटर, अशोक अस्पताल चटनी गढही,एटलस नोबल हॉस्पिटल मल्टीसीटी एंड ट्रामा सेंटर पुरवा चौराहा, बाबा राघव दास हॉस्पिटल, सिटी हॉस्पिटल औरी चौरा, डॉ. अमरनाथ मल्ल हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर रूद्रपुर, आरोग्य हॉस्पिटल,पल्स हॉस्पिटल, समृद्धि एकाग्र हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, वेदांक मल्टी स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर,मेडिवेब हॉस्पिटल सीसी रोड शामिल है।
अब तक 46362 मरीजों के इलाज पर खर्च हुए 75 करोड़ रुपये
अभी तक जिले में 6.20 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड बन चुके हैं, जबकि 1093515 का लक्ष्य है। 2018 में लागू हुई योजना के बाद से अब तक 46362 मरीजों के इलाज पर विभिन्न अस्पतालों में 75 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। इस योजना में शामिल लोगों को पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज की सुविधा है।
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आयुष्मान मरीजों के इलाज के बाद सत्यापन करने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की है और मुख्य कार्यपालक अधिकारी, लखनऊ के यहां से भुगतान होता है। इसमें सीएमओ कार्यालय का कोई रोल नहीं है। डीएम ने पुराने मरीजों के इलाज का डाटा मांगा है। वह आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालक के यहां से मिलेगा। उन्हें चिट्ठी भेजी गई है, जो डाटा कार्यालय में था, उसे उपलब्ध करा दिया गया है। -डॉ. राजेश झा सीएमओ
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आयुष्मान योजना में चयनित अस्पतालों में इलाज के नाम पर फर्जी बिल बाउचर के जरिए भुगतान कराने की शिकायत मिली है। सीएमओ और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर, 18 माह के अंदर जिन मरीजों का इलाज हुआ है, उनका मोबाइल नंबर के साथ डाटा मांगा गया है। अभी तय इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी गोपनीय जांच चल रही है। -अखंड प्रताप सिंह डीएम
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प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में शामिल जिले के 17 निजी अस्पतालों पर इलाज की है सुविधा
देवरिया। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में भ्रष्टाचार का घुन लग गया है। योजना लागू होने (5 फरवरी 2018) के शुरूआती दिनों से शामिल जिले के कई निजी अस्पतालों ने अभी तक अधिकतम 63 लाख रुपये का इलाज किया है, वहीं, एक से दो साल पहले योजना में शामिल हुए निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज और जांच के खर्च का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच गया है। जिले के एक अस्पताल में योजना के तहत बीते तीन माह में एक हजार मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया है, तो एक अन्य अस्पताल ने एक साल में 3.54 करोड़ का इलाज किया है। इलाज के नाम पर धांधली और सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायत शासन में पहुंचने के बाद इस मामले में डीएम ने सख्त रूख अपनाया।
6 नवंबर को डीएम अखंड प्रताप सिंह ने सीएमओ को चिट्ठी भेजकर कहा कि आयुष्मान योजना में शामिल कई निजी अस्पतालों में फर्जी बिल बाउचर के नाम पर मरीजों के इलाज का भुगतान की शिकायत मिल रही है। ऐसे में 1 अप्रैल 2022 से 31 अक्तूबर 2023 तक जिन मरीजों का इलाज हुआ है उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ ब्योरा उपलब्ध कराया जाए। सख्ती के बाद अब करोड़ों का इलाज और जांच करने वाले निजी अस्पतालों के बकाया भुगतान में तेजी की जा रही है। वहीं, इलाज कराने वाले रोगियों का ब्योरा देने में करीब एक माह बाद भी टाल मटोल किया जा रहा है।
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गरीबों को पांच लाख तक के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 5 फरवरी 2018 को आयुष्मान योजना शुरू की गई । इलाज में सहूलियत के लिए सरकारी अस्पतालों के अलावा मानक पूरा करने वाले जिले के 17 निजी अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया। लेकिन कुछ समय बाद ही इलाज, जांच और डॉयलिसिस के नाम पर आयुष्मान योजना की आड़ में धांधली के मामले सामने आने लगे।
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सूत्रों के अनुसार, सीएमओ कार्यालय और निजी कंपनियों के वर्करों की मिलीभगत से इलाज के नाम पर यह खेल चल रहा है। अगर निष्पक्ष तरीके से गैर विभागीय अफसरों से जांच करा दी जाए तो आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आएगा और निजी कंपनी के वर्कर समेत कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
इलाज के नाम पर ऐसे होता है खेल
जिले के निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना में शामिल जिन मरीजों का इलाज होता है। उनका सत्यापन हेरिटेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर करते हैं। इनकी जांच के बाद मुख्य कार्यपालक अधिकारी आयुष्मान भारत (सीईओ), लखनऊ के स्तर से भुगतान किया जाता है। सूत्रों की मानें तो जो निजी अस्पताल कुल भुगतान का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा निजी कंपनी के कोआर्डिनेटर के माध्यम से लखनऊ तक नहीं पहुंचाते, उनका क्लेम कमी दिखाकर रोक दिया जाता है। भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल निजी अस्पताल वालों का सत्यापन और क्लेम आंख मूंद कर पास किया जाता है। धांधली में शामिल निजी अस्पताल संचालक विशेषज्ञ डॉक्टरों की फर्जी मुहर और पैड का इस्तेमाल करते हैं।
तीन माह में कर दिया एक हजार मोतियाबिंद का ऑपरेशन
सीसी रोड के चटनी गढ़ही के पास अशोक अस्पताल संचालित होता है। यहां सिर्फ मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है। आयुष्मान योजना में शामिल इस अस्पताल में दो साल में करीब एक करोड़ रुपये का ऑपरेशन कर दिया गया है। बीते तीन माह में आयुष्मान योजना के तहत करीब एक हजार मोतियाबिंद वाले मरीजों की आंख का ऑपरेशन इस अस्पताल में हुआ है। यह गौर करने वाली बात है कि मेडिकल कॉलेज में इतने विशेषज्ञ डॉक्टर और सुविधाएं होने के बाद भी दो माह में इतने मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं किए गए हैं। जिस व्यक्ति का यह अस्पताल है। वह रूद्रपुर सीएचसी पर लैब टेक्नीशिन है। वहीं एटलस ग्लोबल स्पेशियालिटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर ने एक साल में 3.54 करोड़ का इलाज किया है।
सत्यापन रिपोर्ट का डाटा मांगा तो रफूचक्कर हुआ कंपनी का जिला कोआर्डिनेटर
डीएम अखंड प्रताप सिंह के सामने आयुष्मान योजना में शामिल मरीजों के इलाज के फर्जी बिल बाउचर के जरिए भुगतान लेने का मामला पहुंचा तो वह गंभीर हुए। डीएचएस की बैठक में हेरिटेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर अमरदीप चौबे से डीएम ने पूछताछ शुरू की और सत्यापन रिपोर्ट का डाटा मांगा तो वह रफूचक्कर हो गया। उसकी जगह पर कंपनी ने दूसरे कोऑर्डिनेटर को भेजा है। आयुष्मान के नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. कार्तिकेय पांडेय योजना में शामिल निजी अस्पताल संचालकों से कई बार ब्यौरा मांग चुके हैं, लेकिन वे नहीं दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह खेल लखनऊ के मुख्य कार्यपालक कार्यालय, आयुष्मान योजना चल रहा है, क्योंकि क्लेम पास करने से लेकर भुगतान तक का अधिकारी इन्ही लोगों के हाथ में है।
आयुष्मान योजना में शामिल हैं ये अस्पताल
आयुष्मान योजना में आरोग्य अस्पताल सलेमपुर, आस्था हॉस्पिटल न्यू कालोनी,अब्दुल हामिद मेडिकल केयर सेंटर, शांति हॉस्पिटल न्यू कालोनी,आबिदा हॉस्पिटल एव रिसर्च सेंटर, अशोक अस्पताल चटनी गढही,एटलस नोबल हॉस्पिटल मल्टीसीटी एंड ट्रामा सेंटर पुरवा चौराहा, बाबा राघव दास हॉस्पिटल, सिटी हॉस्पिटल औरी चौरा, डॉ. अमरनाथ मल्ल हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर रूद्रपुर, आरोग्य हॉस्पिटल,पल्स हॉस्पिटल, समृद्धि एकाग्र हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, वेदांक मल्टी स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर,मेडिवेब हॉस्पिटल सीसी रोड शामिल है।
अब तक 46362 मरीजों के इलाज पर खर्च हुए 75 करोड़ रुपये
अभी तक जिले में 6.20 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड बन चुके हैं, जबकि 1093515 का लक्ष्य है। 2018 में लागू हुई योजना के बाद से अब तक 46362 मरीजों के इलाज पर विभिन्न अस्पतालों में 75 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। इस योजना में शामिल लोगों को पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज की सुविधा है।
आयुष्मान मरीजों के इलाज के बाद सत्यापन करने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की है और मुख्य कार्यपालक अधिकारी, लखनऊ के यहां से भुगतान होता है। इसमें सीएमओ कार्यालय का कोई रोल नहीं है। डीएम ने पुराने मरीजों के इलाज का डाटा मांगा है। वह आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालक के यहां से मिलेगा। उन्हें चिट्ठी भेजी गई है, जो डाटा कार्यालय में था, उसे उपलब्ध करा दिया गया है। -डॉ. राजेश झा सीएमओ
आयुष्मान योजना में चयनित अस्पतालों में इलाज के नाम पर फर्जी बिल बाउचर के जरिए भुगतान कराने की शिकायत मिली है। सीएमओ और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर, 18 माह के अंदर जिन मरीजों का इलाज हुआ है, उनका मोबाइल नंबर के साथ डाटा मांगा गया है। अभी तय इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी गोपनीय जांच चल रही है। -अखंड प्रताप सिंह डीएम