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Deoria News: खाकी बाबा मंदिर के मुख्य पुजारी मिश्रीहवा बाबा का निधन
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बरियारपुर। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध खाकी बाबा मंदिर महुआपाटन घाट के मुख्य पुजारी मिश्रीहवा बाबा उर्फ रामदास का बृहस्पतिवार सुबह गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही महुआपाटन समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। बाबा का पार्थिव शरीर मंदिर पहुंचने तक हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो चुके थे।
मंदिर पहुंचने के बाद पार्थिव शरीर को श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद शवयात्रा महुआपाटन चौराहा और गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए छोटी गंडक नदी के तट पर पहुंची। शवयात्रा में रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया, विश्व हिंदू परिषद गोरक्षप्रांत के उपाध्यक्ष उपेंद्र शाही समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु, क्षेत्र के गणमान्य लोग और महिलाएं शामिल हुईं। गंडक नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच बाबा का अंतिम संस्कार किया गया।
1975 से मंदिर की सेवा में लगे थे मिश्रीहवा बाबा
मिश्रीहवा बाबा उर्फ रामदास मूल रूप से बिहार के मधेपुरा जिले के निवासी थे। युवावस्था में वर्ष 1975 के आसपास उनका खाकी बाबा मंदिर आना-जाना शुरू हुआ। वर्ष 1980 के आसपास वह अपने गुरु हनुमान दास के सानिध्य में मंदिर में ही रहने लगे। हनुमान दास के निधन के बाद मिश्रीहवा बाबा को मंदिर का उत्तराधिकारी बनाया गया। इसके बाद वह लगातार मंदिर में रहकर श्रद्धालुओं की सेवा और समाजसेवा में जुटे रहे। मिश्रीहवा बाबा ने जनसहयोग से मंदिर के जीर्णोद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय लोगों के बीच उनकी सेवा भावना के कारण उनकी अलग पहचान थी। उनके निधन के बाद उनके परम शिष्य शंकर दास को मंदिर का उत्तराधिकारी बनाया गया है।
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मंदिर पहुंचने के बाद पार्थिव शरीर को श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद शवयात्रा महुआपाटन चौराहा और गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए छोटी गंडक नदी के तट पर पहुंची। शवयात्रा में रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया, विश्व हिंदू परिषद गोरक्षप्रांत के उपाध्यक्ष उपेंद्र शाही समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु, क्षेत्र के गणमान्य लोग और महिलाएं शामिल हुईं। गंडक नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच बाबा का अंतिम संस्कार किया गया।
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1975 से मंदिर की सेवा में लगे थे मिश्रीहवा बाबा
मिश्रीहवा बाबा उर्फ रामदास मूल रूप से बिहार के मधेपुरा जिले के निवासी थे। युवावस्था में वर्ष 1975 के आसपास उनका खाकी बाबा मंदिर आना-जाना शुरू हुआ। वर्ष 1980 के आसपास वह अपने गुरु हनुमान दास के सानिध्य में मंदिर में ही रहने लगे। हनुमान दास के निधन के बाद मिश्रीहवा बाबा को मंदिर का उत्तराधिकारी बनाया गया। इसके बाद वह लगातार मंदिर में रहकर श्रद्धालुओं की सेवा और समाजसेवा में जुटे रहे। मिश्रीहवा बाबा ने जनसहयोग से मंदिर के जीर्णोद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय लोगों के बीच उनकी सेवा भावना के कारण उनकी अलग पहचान थी। उनके निधन के बाद उनके परम शिष्य शंकर दास को मंदिर का उत्तराधिकारी बनाया गया है।
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