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Deoria News: तमिलनाडु, महाराष्ट्र के गिरोह का नाबालिग सदस्य दस लाख रुपये के साथ गिरफ्तार
Thu, 01 Jun 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 01 Jun 2023 11:51 PM IST
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टप्पेबाजी का एसपी संकल्प शर्मा ने किया खुलासा ।संवाद
गोरखपुर के व्यापारी से 9 मई को 35 लाख रुपये उड़ाने का मामला, करीब 100 सीसीटीवी कैमरे खंगालने के बाद पुलिस को मिली सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर के कोतवाली रोड से 9 मई को गोरखपुर निवासी व्यापारी से 35 लाख रुपये तमिलनाडु के गिरोह ने झांसा देकर उड़ाए थे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने गिरोह के नाबालिग सदस्य को दस लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया है। मामले का खुलासा पुलिस लाइन में एसपी संकल्प शर्मा ने किया है। सभी आरोपी गोरखपुर के गीडा में किराए का कमरा लेकर रहते थे। गिरोह ने बड़हलगंज में भी घटना को अंजाम दिया था।
गोरखपुर के सूरजकुंड निवासी सुमित गोयल की संतकबीरनगर में फ्लोर मिल है। 9 मई को उनके छोटे भाई अमित गोयल कार चालक राधेश्याम विश्वकर्मा निवासी पीपीगंज गोरखपुर के साथ सुबह बिहार के बगहा में तगादा करने गए थे। करीब तीन व्यवसायियों से 35 लाख 41 रुपये की रकम वसूलने के बाद बैग को कार की अगली सीट पर रखकर देवरिया के लिए निकल पड़े। शाम चार बजे के करीब वह कोतवाली रोड पर जीआईसी गेट के पास पहुंचे। इस जगह पर चालक कार में रुपये लेकर बैठा रहा और अमित गोयल गल्ला व्यवसायी चंदन से मिलने चले गए। अमित के जाने के करीब दो मिनट बाद दो युवक कार के पास आए और चालक को आवाज देकर बताए कि कार की दूसरी साइड के गेट के पास रुपये गिरे हैं। चालक गेट खोलकर दूसरी तरफ रुपये उठाने लगा। चालक के झुकते ही उचक्के कार में रखे रुपये से भरा बैग लेकर भाग गए। घटना के खुलासे के लिए एसपी ने एसओजी को जिम्मेदारी दी। इसके बाद एसओजी ने करीब सौ सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल नंबरों को खंगाला तो सुराग मिल गया। इस पर एसओजी महाराष्ट्र के रवाना हो गई। कई दिनों तक रहने के बाद पुलिस को गिरोह का एक नाबालिग सदस्य हाथ लग गया। पुलिस पूछताछ की तो घटना का खुलासा हो गया। उसने बताया कि गिरोह के विश्वनाथ, अविनाश मरम्मा नायडु, निवासी नंदूपुर महाराष्ट्र, शक्तिवेल, रिशन निवासी त्रिचना पल्ली तमिलनाडु ने रुपये उड़ाए थे। पुलिस ने नाबालिग शातिर की निशानदेही पर दस लाख रुपये बरामद किया है। गिरोह के सभी सदस्य गीडा में किराए का कमरा लेकर रहते थे। घटना के बाद ताला बंद कर फरार हो गए थे। एसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
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कई प्रांतों में फैला है नेटवर्क
टप्पेबाजी करने वाला यह गिरोह कभी भी अपने गृह प्रांत में घटना को अंजाम नहीं देता है। इस गिरोह के सदस्य मध्य प्रदेश, दिल्ली, यूपी, बिहार सहित अन्य प्रांतों में घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। घटना के बाद गिरोह के सदस्य अपने ठिकाने पर पहुंच जाते हैं। पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो जिस गांव का गिरोह है वहां पर 60-70 घर का गांव है। हर घर में गिरोह के लोग मौजूद हैं। इनका मूल रूप से यह अपराध ही पेशा बन गया है।
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इंडस्ट्रियल एरिया के पास लेते हैं कमरा, ताकि न हो शक
तमिलनाडु और महाराष्ट्र के रहने वाले गिरोह के सदस्य जहां भी किराए का कमरा लेते हैं वहां के आसपास औद्योगिक आस्थान होता है। किराए का कमरा लेते समय अपने आपको मजदूर बताते हैं। सुबह निकलने के बाद शाम को अपने कमरे पर पहुंच जाते हैं। इस गिरोह ने गीडा सेक्टर 13 में कमरा ले रखा था। घटना के बाद सभी फरार हो गए थे। गिरोह के सदस्य कार को टारगेट बनाकर चलते हैं। गोरखपुर के व्यापारी के साथ हुई घटना में इस गिरोह ने 80 रुपये नीचे गिराकर चालक को झांसे में लिया था। इसी तरह किसी के कार पर मोबिल फेंक देना और पंचर कर देने का ट्रिक अपनाते हैं। इसके बाद घटना को अंजाम देते हैं।
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सीसीटीवी कैमरा और बीटीएस के सहारे मिली सफलता
कोतवाली से महज चंद कदमों की दूरी पर हुई वारदात पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। एसओजी को इस घटना के खुलासे के लिए शहर के करीब सौ सीसीटीवी कैमरा और एक हजार से अधिक मोबाइल नंबरों को बीटीएस में खंगालना पड़ा। जिस संदिग्ध का फुटेज पुलिस को हाथ लगा था उसके बड़हलगंज की घटना में भी शामिल होने की बात सामने आई थी। इससे फुटेज और मोबाइल नंबरों का लोकेशन भी उसी स्थान पर मिला था। इस पर एसओजी प्रभारी सादिक परवेज, दरोगा अमित कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी धनंजय श्रीवास्तव, राहुल सिंह, प्रशांत शर्मा ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु में करीब दस दिनों तक डेरा जमाया और नाबालिग को हिरासत में ले लिया, लेकिन आरोपी पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए हैं। इसके कारण चारों आरोपी पकड़ में नहीं आए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर के कोतवाली रोड से 9 मई को गोरखपुर निवासी व्यापारी से 35 लाख रुपये तमिलनाडु के गिरोह ने झांसा देकर उड़ाए थे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने गिरोह के नाबालिग सदस्य को दस लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया है। मामले का खुलासा पुलिस लाइन में एसपी संकल्प शर्मा ने किया है। सभी आरोपी गोरखपुर के गीडा में किराए का कमरा लेकर रहते थे। गिरोह ने बड़हलगंज में भी घटना को अंजाम दिया था।
गोरखपुर के सूरजकुंड निवासी सुमित गोयल की संतकबीरनगर में फ्लोर मिल है। 9 मई को उनके छोटे भाई अमित गोयल कार चालक राधेश्याम विश्वकर्मा निवासी पीपीगंज गोरखपुर के साथ सुबह बिहार के बगहा में तगादा करने गए थे। करीब तीन व्यवसायियों से 35 लाख 41 रुपये की रकम वसूलने के बाद बैग को कार की अगली सीट पर रखकर देवरिया के लिए निकल पड़े। शाम चार बजे के करीब वह कोतवाली रोड पर जीआईसी गेट के पास पहुंचे। इस जगह पर चालक कार में रुपये लेकर बैठा रहा और अमित गोयल गल्ला व्यवसायी चंदन से मिलने चले गए। अमित के जाने के करीब दो मिनट बाद दो युवक कार के पास आए और चालक को आवाज देकर बताए कि कार की दूसरी साइड के गेट के पास रुपये गिरे हैं। चालक गेट खोलकर दूसरी तरफ रुपये उठाने लगा। चालक के झुकते ही उचक्के कार में रखे रुपये से भरा बैग लेकर भाग गए। घटना के खुलासे के लिए एसपी ने एसओजी को जिम्मेदारी दी। इसके बाद एसओजी ने करीब सौ सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल नंबरों को खंगाला तो सुराग मिल गया। इस पर एसओजी महाराष्ट्र के रवाना हो गई। कई दिनों तक रहने के बाद पुलिस को गिरोह का एक नाबालिग सदस्य हाथ लग गया। पुलिस पूछताछ की तो घटना का खुलासा हो गया। उसने बताया कि गिरोह के विश्वनाथ, अविनाश मरम्मा नायडु, निवासी नंदूपुर महाराष्ट्र, शक्तिवेल, रिशन निवासी त्रिचना पल्ली तमिलनाडु ने रुपये उड़ाए थे। पुलिस ने नाबालिग शातिर की निशानदेही पर दस लाख रुपये बरामद किया है। गिरोह के सभी सदस्य गीडा में किराए का कमरा लेकर रहते थे। घटना के बाद ताला बंद कर फरार हो गए थे। एसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
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कई प्रांतों में फैला है नेटवर्क
टप्पेबाजी करने वाला यह गिरोह कभी भी अपने गृह प्रांत में घटना को अंजाम नहीं देता है। इस गिरोह के सदस्य मध्य प्रदेश, दिल्ली, यूपी, बिहार सहित अन्य प्रांतों में घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। घटना के बाद गिरोह के सदस्य अपने ठिकाने पर पहुंच जाते हैं। पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो जिस गांव का गिरोह है वहां पर 60-70 घर का गांव है। हर घर में गिरोह के लोग मौजूद हैं। इनका मूल रूप से यह अपराध ही पेशा बन गया है।
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इंडस्ट्रियल एरिया के पास लेते हैं कमरा, ताकि न हो शक
तमिलनाडु और महाराष्ट्र के रहने वाले गिरोह के सदस्य जहां भी किराए का कमरा लेते हैं वहां के आसपास औद्योगिक आस्थान होता है। किराए का कमरा लेते समय अपने आपको मजदूर बताते हैं। सुबह निकलने के बाद शाम को अपने कमरे पर पहुंच जाते हैं। इस गिरोह ने गीडा सेक्टर 13 में कमरा ले रखा था। घटना के बाद सभी फरार हो गए थे। गिरोह के सदस्य कार को टारगेट बनाकर चलते हैं। गोरखपुर के व्यापारी के साथ हुई घटना में इस गिरोह ने 80 रुपये नीचे गिराकर चालक को झांसे में लिया था। इसी तरह किसी के कार पर मोबिल फेंक देना और पंचर कर देने का ट्रिक अपनाते हैं। इसके बाद घटना को अंजाम देते हैं।
सीसीटीवी कैमरा और बीटीएस के सहारे मिली सफलता
कोतवाली से महज चंद कदमों की दूरी पर हुई वारदात पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। एसओजी को इस घटना के खुलासे के लिए शहर के करीब सौ सीसीटीवी कैमरा और एक हजार से अधिक मोबाइल नंबरों को बीटीएस में खंगालना पड़ा। जिस संदिग्ध का फुटेज पुलिस को हाथ लगा था उसके बड़हलगंज की घटना में भी शामिल होने की बात सामने आई थी। इससे फुटेज और मोबाइल नंबरों का लोकेशन भी उसी स्थान पर मिला था। इस पर एसओजी प्रभारी सादिक परवेज, दरोगा अमित कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी धनंजय श्रीवास्तव, राहुल सिंह, प्रशांत शर्मा ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु में करीब दस दिनों तक डेरा जमाया और नाबालिग को हिरासत में ले लिया, लेकिन आरोपी पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए हैं। इसके कारण चारों आरोपी पकड़ में नहीं आए।