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चार साल बाद भी प्रशासन ने नहीं लगवाई शहीद की प्रतिमा
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चार साल बाद भी नहीं लगवाई शहीद की प्रतिमा
कृषि मंत्री ने अपने किए वादे पर नहीं किया अमल, घरवालों ने शुरू किया काम
सीआरपीएफ की टीम ने किया दौरा
हरिश्चन्द्र सिंह
देसही देवरिया। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए देवेंद्र चौरसिया की प्रतिमा लगवाने का कार्य पैतृक गांव में अंत्येष्टि स्थल पर शुरू हो गया है। यह कार्य किसी प्रशासनिक मदद से नहीं बल्कि खुद शहीद का परिवार करा रहा है। सीआरपीएफ टीम के सामने घरवालों का दर्द छलक गया और वे अपने आंखों से दर्द के आंसू नहीं रोक पाए।
देसही देवरिया के जिगनी बाजार गांव के देवेंद्र चौरसिया छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 30 मार्च 2016 को नक्सलियों के बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हो गए थे। शहीद के पिता रिटायर्ड शिक्षक हरिगोविंद चौरसिया और बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने शहीद की प्रतिमा लगवाने के लिए क्षेत्रीय विधायक कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाई। द्वितीय पुण्यतिथि पर आए कृषि मंत्री ने प्रतिमा लगवाने का वादा भी किया था, लेकिन अभी तक नहीं लगी। हालांकि, ग्राम प्रधान ने राजस्वकर्मियों को बुलाकर जमीन की पैमाइश भी कराई। अंत्येष्टि स्थल पर पर्याप्त जमीन है। भेजे गए प्रस्ताव पर किसी को प्रतिमा या स्मारक बनाए जाने से कोई एतराज भी नहीं है। फिर भी प्रशासन मौन बना रहा। थक-हारकर घरवालों ने प्रतिमा खुद लगवाने का काम शुरू कर दिया है। प्रतिमा राजस्थान से बनकर आ गई है। इस कार्य में सहयोग के लिए क्षेत्र के लोग आगे आने लगे हैं। क्षेत्र के एक समाजसेवी मैनुद्दीन खां ने भी सहयोग किया है। शहीद के बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने बताया कि उनके भाई ने देश के खातिर अपनी जान की कुर्बानी दी। उनके परिवार और गांव सहित पूरे क्षेत्र को इस बात पर फख्र है। मगर प्रतिमा नहीं लगवाए जाने का मलाल जरूर है। अब किसी से कोई फरियाद नहीं करनी। प्रतिमा लगाकर परिवार जांबाज सिपाही का सम्मान करेगा। शहीद के परिवार ने सहयोग के लिए आगे आने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह भी कहा कि कि कार्य शुरू हो गया है। उम्मीद है कि 30 मार्च को मनाई जाने वाली चौथी पुण्यतिथि तक प्रतिमा लग जाएगी।
सीआरपीएफ टीम ने घर आकर पूछा कुशलक्षेम
शहीद देवेंद्र चौरसिया के बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने बताया कि शुक्रवार को महाशिरात्रि के दिन चंदौली से कमांडेंट के नेतृत्व में सीआरपीएफ की पांच सदस्यीय टीम परिवार का कुशलक्षेम पूछने घर आई। उनके घर पहुंचते ही 2016 कि उस सुबह की याद एक बार फिर ताजा हो गई जब पिता हरिगोविंद के फोन पर बेटे के शहीद होने की सूचना मिली थी।
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कृषि मंत्री ने अपने किए वादे पर नहीं किया अमल, घरवालों ने शुरू किया काम
सीआरपीएफ की टीम ने किया दौरा
हरिश्चन्द्र सिंह
देसही देवरिया। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए देवेंद्र चौरसिया की प्रतिमा लगवाने का कार्य पैतृक गांव में अंत्येष्टि स्थल पर शुरू हो गया है। यह कार्य किसी प्रशासनिक मदद से नहीं बल्कि खुद शहीद का परिवार करा रहा है। सीआरपीएफ टीम के सामने घरवालों का दर्द छलक गया और वे अपने आंखों से दर्द के आंसू नहीं रोक पाए।
देसही देवरिया के जिगनी बाजार गांव के देवेंद्र चौरसिया छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 30 मार्च 2016 को नक्सलियों के बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हो गए थे। शहीद के पिता रिटायर्ड शिक्षक हरिगोविंद चौरसिया और बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने शहीद की प्रतिमा लगवाने के लिए क्षेत्रीय विधायक कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाई। द्वितीय पुण्यतिथि पर आए कृषि मंत्री ने प्रतिमा लगवाने का वादा भी किया था, लेकिन अभी तक नहीं लगी। हालांकि, ग्राम प्रधान ने राजस्वकर्मियों को बुलाकर जमीन की पैमाइश भी कराई। अंत्येष्टि स्थल पर पर्याप्त जमीन है। भेजे गए प्रस्ताव पर किसी को प्रतिमा या स्मारक बनाए जाने से कोई एतराज भी नहीं है। फिर भी प्रशासन मौन बना रहा। थक-हारकर घरवालों ने प्रतिमा खुद लगवाने का काम शुरू कर दिया है। प्रतिमा राजस्थान से बनकर आ गई है। इस कार्य में सहयोग के लिए क्षेत्र के लोग आगे आने लगे हैं। क्षेत्र के एक समाजसेवी मैनुद्दीन खां ने भी सहयोग किया है। शहीद के बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने बताया कि उनके भाई ने देश के खातिर अपनी जान की कुर्बानी दी। उनके परिवार और गांव सहित पूरे क्षेत्र को इस बात पर फख्र है। मगर प्रतिमा नहीं लगवाए जाने का मलाल जरूर है। अब किसी से कोई फरियाद नहीं करनी। प्रतिमा लगाकर परिवार जांबाज सिपाही का सम्मान करेगा। शहीद के परिवार ने सहयोग के लिए आगे आने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह भी कहा कि कि कार्य शुरू हो गया है। उम्मीद है कि 30 मार्च को मनाई जाने वाली चौथी पुण्यतिथि तक प्रतिमा लग जाएगी।
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सीआरपीएफ टीम ने घर आकर पूछा कुशलक्षेम
शहीद देवेंद्र चौरसिया के बड़े भाई कमलेश चौरसिया ने बताया कि शुक्रवार को महाशिरात्रि के दिन चंदौली से कमांडेंट के नेतृत्व में सीआरपीएफ की पांच सदस्यीय टीम परिवार का कुशलक्षेम पूछने घर आई। उनके घर पहुंचते ही 2016 कि उस सुबह की याद एक बार फिर ताजा हो गई जब पिता हरिगोविंद के फोन पर बेटे के शहीद होने की सूचना मिली थी।
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