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डीएम के बुलाने पर नहीं आए जलनिगम के एक्सईएन
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डीएम के बुलाने पर नहीं आए जलनिगम के एक्सईएन
देवरिया। शहर को जलभराव से निजात दिलाने के लिए रविवार की शाम डीएम जेपी सिंह, सीडीओ के साथ अचानक अमेठी रोड पर चटनी गढ़ही के आगे पहुंच गए। उन्होंने नाला निर्माण की प्रगति देखने के लिए जलनिगम के अधिशासी अभियंता प्रदीप चौरसिया को बुलाया, लेकिन वह मौके पर नहीं आएं। डीएम ने नाराजगी जताई और जलनिगम के अधिशासी अभियंता का एक दिन का वेतन रोकने और उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यदायी संस्था को कार्य में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी रवींद्र कुमार को कार्यों में प्रगति लाने के लिए नोडल अधिकारी बनाया है।
कई साल से शहर जलभराव से जूझ रहा है। दो वर्ष पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लोगों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए शहर में एक जनसभा के दौरान भरोसा दिया था। नगर पालिका ने इसके लिए तीन सौ करोड़ की परियोजना तैयार कर शासन को भेजा था। इसमें तीन बड़ेे नालों का निर्माण होना है। पहला कचहरी शिव मंदिर से राघव नगर दुर्गा मंदिर होते हुए कतरारी तक, दूसरा चटनी गढ़ही, अमेठी होते कुर्ना नाला तक तथा तीसरा रामगुलाम टोला से कुर्ना नाला तक है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हो गई। इसमें 41 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी मिली है, जिसमें साढ़े चार करोड़ रुपये धन मिल भी गया है।
दो साल में इसका निर्माण होना था, लेकिन कार्य देरी से शुरू हुआ है। ऐसे में एक बार फिर जल भराव से शहर जूझ सकता है। डीएम जेपी सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही जलभराव की समस्या पर अधिकारियों से जानकारी ली और मौके पर नाला निर्माण देखने पहुंच गए। उन्होंने जब अधिशासी अभियंता को बुलाया तो वह नहीं आ सके। मौके पर कोई मजदूर कार्य करते नहीं पाया गया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी आदि मौजूद रहे।
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देवरिया। शहर को जलभराव से निजात दिलाने के लिए रविवार की शाम डीएम जेपी सिंह, सीडीओ के साथ अचानक अमेठी रोड पर चटनी गढ़ही के आगे पहुंच गए। उन्होंने नाला निर्माण की प्रगति देखने के लिए जलनिगम के अधिशासी अभियंता प्रदीप चौरसिया को बुलाया, लेकिन वह मौके पर नहीं आएं। डीएम ने नाराजगी जताई और जलनिगम के अधिशासी अभियंता का एक दिन का वेतन रोकने और उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यदायी संस्था को कार्य में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी रवींद्र कुमार को कार्यों में प्रगति लाने के लिए नोडल अधिकारी बनाया है।
कई साल से शहर जलभराव से जूझ रहा है। दो वर्ष पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लोगों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए शहर में एक जनसभा के दौरान भरोसा दिया था। नगर पालिका ने इसके लिए तीन सौ करोड़ की परियोजना तैयार कर शासन को भेजा था। इसमें तीन बड़ेे नालों का निर्माण होना है। पहला कचहरी शिव मंदिर से राघव नगर दुर्गा मंदिर होते हुए कतरारी तक, दूसरा चटनी गढ़ही, अमेठी होते कुर्ना नाला तक तथा तीसरा रामगुलाम टोला से कुर्ना नाला तक है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हो गई। इसमें 41 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी मिली है, जिसमें साढ़े चार करोड़ रुपये धन मिल भी गया है।
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दो साल में इसका निर्माण होना था, लेकिन कार्य देरी से शुरू हुआ है। ऐसे में एक बार फिर जल भराव से शहर जूझ सकता है। डीएम जेपी सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही जलभराव की समस्या पर अधिकारियों से जानकारी ली और मौके पर नाला निर्माण देखने पहुंच गए। उन्होंने जब अधिशासी अभियंता को बुलाया तो वह नहीं आ सके। मौके पर कोई मजदूर कार्य करते नहीं पाया गया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी आदि मौजूद रहे।
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