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बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों से मिले जलशक्ति राज्यमंत्री
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जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने रुद्रपुर के बाढ़ प्रभावितों में बांटी राहत सामग्री
- फोटो : DEORIA
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों से मिले जलशक्ति राज्यमंत्री
जनता के बीच मौजूद रहे शासन प्रशासन, लापरवाही क्षम्य नहीं : दिनेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/बरहज/मईल। जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने सोमवार को क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। बाढ़ पीड़ितों से मिल कर उन्होंने बंधे और नदियों के जलस्तर का हाल जाना। राज्यमंत्री ने सिलहटा-करनपुरा बांध, पटवनिया, केवटलिया, मदनपुर, गायघाट के पीड़ितों से मिलकर उनमें राहत सामग्री बांटी।
केवटलिया पहुंचे जलशक्ति मंत्री को क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश निषाद ने बाढ़ से प्रभावित हालात से अवगत कराया। करनपुरा-सिलहटा बांध पर पायलट प्रोजेक्ट कार्य से बंधा मजबूत स्थिति में है। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को लगातार निगरानी करने रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों को दिक्कतें हुईं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम ध्रुव कुमार शुक्ला, सदानंद सिंह, सुनील कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
उधर, बरहज और मईल कार्यालय के अनुसार जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्र शाका और अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित मईल के बकुची, भदिला प्रथम और मदनपुर के पटवनिया गांव का दौरा किया। जहां लोगों से सरकार की ओर से मिलने वाले राहत सामग्री के अलावा आवागमन के लिए लगाए गए नाव आदि के बारे में जानकारी ली। राज्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन की ओर से मुहैया कराए गए लाभ का ब्योरा लिया। साथ ही बाढ़ के पानी से डूबी फसल के नुकसान का आकलन कराने के लिए कहा।
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इस मौके पर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, एसपी संकल्प शर्मा, एसडीएम गजेंद्र सिंह, सीओ पंचम लाल, थानाध्यक्ष जयशंकर मिश्र, मईल सुभाष चंद्र पांडेय, अरविंद सिंह, वीरेंद्र चौधरी, शक्ति सिंह, अनुज चौधरी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ग्रस्त गांवों में नाव से पहुंच रहे स्वास्थकर्मी
बरहज/देवरिया। जिले के बरहज ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) महेन के अंतर्गत आने वाले तीन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे कई संपर्क मार्गों पर पानी आने और जगह-जगह मार्ग उखड़ कर बहने से आवागमन बाधित हो गया है। ऐसी स्थिति में सोलह हजार की आबादी के बीच नाव से पहुंचकर स्वास्थ्य कर्मी बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
विकास खंड क्षेत्र के महेन पीएचसी क्षेत्र के परसिया देवार में तकरीबन सात हजार की आबादी, विशुनपुर देवर में छह हजार की आबादी और भदिला में तीन हजार की आबादी है। नदी के पानी के चलते इन गांवों से संपर्क टूट गया है। इन क्षेत्रों में डायरिया की आशंका बनी हुई है।
एमओआईसी के नेतृत्व में इन गांवों में नियमित टीकाकरण और लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमें तैनात की गईं हैं। टीम में एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट, आशा, एएनएम नाव से पहुंच रहे हैं।
एमओआईसी डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि सर्दी, खांसी, जुकाम, चर्म रोग, उल्टी, दस्त, बुखार से पीड़ित मरीजों को दवाओं का वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन तीनों गांवों में करीब 1500 लोगों का इलाज कर रहे हैं।
बाढ़ग्रस्त गांवों पर विशेष नजर
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में दवाओं की भरपूर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उनका प्रयोग हो सके। चिकित्साधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाढ़ग्रस्त गांवों में दवा लेकर नाव से पहुंचे और राहत पहुंचाएं। इन क्षेत्रों में डायरिया की आशंका रहती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में दवा लेकर स्वास्थ्यकर्मी गांवों में पहुंच रहे हैं। मैं स्वयं इन गांवों में पहुंचकर स्थिति की जानकारी ले रहा हूं।
फोटो समाचार
24 घंटे में सरयू के जलस्तर में आई 35 सेमी की कमी
बरहज। सरयू नदी पिछले दो दिनों से तेजी से पीछे हट रही है। पानी खाली होने पर टूटी सड़कें बाढ़ की तबाही की गवाही दे रही हैं। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 35 सेमी कमी दर्ज की गई है। जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका प्रबल हो गई है।
सरयू में उमड़ रहे सैलाब के कारण नदी पिछले करीब एक सप्ताह से तबाही मचाने पर आमादा थी। सोमवार को नदी खतरे के निशान 66.50 से 1.65 मीटर ऊपर 68.15 मीटर पर बह रही थी। खेत-खलिहान, घरों, सड़कों तक नदी के पहुंचने के कारण चारों ओर पानी गया था।
रविवार से नदी के पीछे हटने से तटवर्ती गांवों के लोग कुछ हद तक राहत महसूस की है। लेकिन सड़कों पर उमड़ने वाले सैलाब की गवाही बरहज-कपरवार के बीच रामजानकी मार्ग, बिनवापुरी के निकट रुद्रपुर जाने वाली सड़क सहित करीब दो दर्जन संपर्क और मुख्य सड़कें बदहाल हो गई हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में जलभराव जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। उनसे उठने वाली दुर्गंध के कारण जीवन मोहाल हो गया है। वहीं, संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय सता रहा है। परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा कटइलवा, कोटवां का मल्लाह टोला, नौका टोला, मठियां, बेलडॉड, परसियां तिवारी, कुवाईच टोला, भदिला प्रथम, महेन, गोरखपुर के कोलखास आदि गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
बाढ़ से प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप है। इससे लोग अंधेरे में जीवन काट रहे हैं। वहीं, इलेक्ट्रानिक उपकरण और मोबाइल सेवा बाधित हो गई है। बेमौसम आई बाढ़ को लेकर राहत के बाद भी लोगों के चेहरों पर खौफ दिखाई दे रहा है।
इस संबंध में सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने कहा कि जलस्तर में तेजी से कमी आ रही है। जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
कपरवार पुलिस चौकी पर स्वास्थ्य टीम की तैनाती
बरहज। बाढ़ प्रभावित गांवों में फैलने वाली जलजनित बीमारियों को लेकर प्रशासन अलर्ट है। जिलाधिकारी जेपी सिंह के निर्देश पर सोमवार को कपरवार पुलिस चौकी पर स्वास्थ्य टीम तैनात की गई है। स्वास्थ्य टीम के पास पहुंचे कुवाईच टोला, बिनवापुरी, मठियां, पश्चिमपुरा आदि गांवों के मरीज मौसमी बुखार, खांसी, सर्दी आदि से पीड़ित थे। चिकित्सकों का कहना है कि 30-35 मरीजों ने दवा ली है। टीम में डॉ. हेमंत शुक्ल, डॉ. राहुल, रवि महावत, सुषमा राय, अजय कुमार तिवारी आदि शामिल हैं।
बाढ़ में भहराई घर की दीवार
बरहज। पिछले करीब एक सप्ताह से आई बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी के पीछे हटने से लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस की है। लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। रविवार की रात कपरवार-पश्चिमपुरा स्थित झींगुर शाह बाबा के मजार के निकट शमशाद पुत्र मरहूम अब्दुल रहमान के बाढ़ के पानी से घिरे मकान की पूर्वी दीवार गिर गई। इससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शमशाद के पुत्रों सलामुद्दीन और कलामुद्दीन का कहना है कि दीवार गिरने से सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को हो रही हैं। किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर परिवार की जीविका चलती है।
फोटो समाचार।
आपदा में भाजपा को मिला लूट का अवसर : खोखा सिंह
सिर्फ फोटो शूट करा रहे शासन, प्रशासन के लोग, बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का सोमवार को समाजवादी पार्टी के नेताओं ने दौरा किया। उन्होंने शासन-प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों को मामूली राहत सामग्री देने का आरोप लगाया। सपाइयों ने क्षेत्र में किसानों की बर्बाद फसल का मुआवजा देने की मांग की।
पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने पिड़रा पुल के कटान स्थल, केवटलिया, कृतपुरा, सरया, गायघाट आदि गांवों का दौरा किया। पूर्व विधायक ने कहा कि पिड़रा पुल से एक माह से आवागमन बंद है। गोर्रा नदी सड़क को काट चुकी है। बचाव के नाम पर धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा। कटान स्थलों पर सिर्फ शासन प्रशासन के लोग फोटो शूट करा रहे हैं। बचाव कार्य के नाम पर भाजपा को लूट का अवसर मिला है। बाढ़ राहत पैकेट में मामूली सामग्री दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि नदी और बंधे के बीच किसानों की खेती बर्बाद हो चुकी है। किसानों की फसल को लेकर जिम्मेदार मौन हैं। पिछले साल भी बर्बाद हुई किसानों की फसल का मुआवजा नहीं दिया गया। पूर्व विधायक ने किसानों की नष्ट हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलने पर तहसील में आंदोलन करने की चेतावनी दी। इस दौरान हरेंद्र सिंह त्याग, महंथ यादव, शब्बीर अहमद, जितेश यादव, रामबिलास यादव आदि मौजूद रहे।
फोटो समाचार
नदी घाट पर महिलाओं ने चढ़ाई कड़ाही, किया पूजा-अर्चन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी में बाढ़ आने से पक्के घाट जलमग्न हो गए थे, जिससे श्रद्धालु नहीं पहुंच पा रहे थे। नदी के जलस्तर में कमी से पक्के घाटों से पानी हटने के कारण सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी, जिससे नदी घाट की रौनक वापस आ गई। दूर-दराज से आई महिलाओं ने घाट पर माता सरयू को कड़ाही चढ़ाने के साथ पूजा-अर्चन किया।
नदी के पक्के घाटों पर मांगलिक कार्यक्रमों आदि को लेकर हर रोज लोगों की भीड़ जुटती है। पिछले कुछ दिनों से सरयू में सैलाब उमड़ने के कारण परशुराम घाट, आरती, तुलसी, सीता, रामघाट सहित 12 घाटों की सीढ़ियां और सड़कें जलमग्न हो गई थीं। पिछले 24 घंटे से नदी के निरंतर पीछे हटने के कारण बाढ़ का पानी सड़क और घाट से नीचे चला गया है। घाट से पानी हटने की जानकारी होने पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जबकि घाट पर दुकानें भी सज गई थीं।
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जनता के बीच मौजूद रहे शासन प्रशासन, लापरवाही क्षम्य नहीं : दिनेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/बरहज/मईल। जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने सोमवार को क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। बाढ़ पीड़ितों से मिल कर उन्होंने बंधे और नदियों के जलस्तर का हाल जाना। राज्यमंत्री ने सिलहटा-करनपुरा बांध, पटवनिया, केवटलिया, मदनपुर, गायघाट के पीड़ितों से मिलकर उनमें राहत सामग्री बांटी।
केवटलिया पहुंचे जलशक्ति मंत्री को क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश निषाद ने बाढ़ से प्रभावित हालात से अवगत कराया। करनपुरा-सिलहटा बांध पर पायलट प्रोजेक्ट कार्य से बंधा मजबूत स्थिति में है। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को लगातार निगरानी करने रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों को दिक्कतें हुईं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम ध्रुव कुमार शुक्ला, सदानंद सिंह, सुनील कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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उधर, बरहज और मईल कार्यालय के अनुसार जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटिक ने क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्र शाका और अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित मईल के बकुची, भदिला प्रथम और मदनपुर के पटवनिया गांव का दौरा किया। जहां लोगों से सरकार की ओर से मिलने वाले राहत सामग्री के अलावा आवागमन के लिए लगाए गए नाव आदि के बारे में जानकारी ली। राज्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन की ओर से मुहैया कराए गए लाभ का ब्योरा लिया। साथ ही बाढ़ के पानी से डूबी फसल के नुकसान का आकलन कराने के लिए कहा।
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इस मौके पर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, एसपी संकल्प शर्मा, एसडीएम गजेंद्र सिंह, सीओ पंचम लाल, थानाध्यक्ष जयशंकर मिश्र, मईल सुभाष चंद्र पांडेय, अरविंद सिंह, वीरेंद्र चौधरी, शक्ति सिंह, अनुज चौधरी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ग्रस्त गांवों में नाव से पहुंच रहे स्वास्थकर्मी
बरहज/देवरिया। जिले के बरहज ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) महेन के अंतर्गत आने वाले तीन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे कई संपर्क मार्गों पर पानी आने और जगह-जगह मार्ग उखड़ कर बहने से आवागमन बाधित हो गया है। ऐसी स्थिति में सोलह हजार की आबादी के बीच नाव से पहुंचकर स्वास्थ्य कर्मी बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
विकास खंड क्षेत्र के महेन पीएचसी क्षेत्र के परसिया देवार में तकरीबन सात हजार की आबादी, विशुनपुर देवर में छह हजार की आबादी और भदिला में तीन हजार की आबादी है। नदी के पानी के चलते इन गांवों से संपर्क टूट गया है। इन क्षेत्रों में डायरिया की आशंका बनी हुई है।
एमओआईसी के नेतृत्व में इन गांवों में नियमित टीकाकरण और लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमें तैनात की गईं हैं। टीम में एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट, आशा, एएनएम नाव से पहुंच रहे हैं।
एमओआईसी डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि सर्दी, खांसी, जुकाम, चर्म रोग, उल्टी, दस्त, बुखार से पीड़ित मरीजों को दवाओं का वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन तीनों गांवों में करीब 1500 लोगों का इलाज कर रहे हैं।
बाढ़ग्रस्त गांवों पर विशेष नजर
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में दवाओं की भरपूर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उनका प्रयोग हो सके। चिकित्साधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाढ़ग्रस्त गांवों में दवा लेकर नाव से पहुंचे और राहत पहुंचाएं। इन क्षेत्रों में डायरिया की आशंका रहती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में दवा लेकर स्वास्थ्यकर्मी गांवों में पहुंच रहे हैं। मैं स्वयं इन गांवों में पहुंचकर स्थिति की जानकारी ले रहा हूं।
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24 घंटे में सरयू के जलस्तर में आई 35 सेमी की कमी
बरहज। सरयू नदी पिछले दो दिनों से तेजी से पीछे हट रही है। पानी खाली होने पर टूटी सड़कें बाढ़ की तबाही की गवाही दे रही हैं। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 35 सेमी कमी दर्ज की गई है। जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका प्रबल हो गई है।
सरयू में उमड़ रहे सैलाब के कारण नदी पिछले करीब एक सप्ताह से तबाही मचाने पर आमादा थी। सोमवार को नदी खतरे के निशान 66.50 से 1.65 मीटर ऊपर 68.15 मीटर पर बह रही थी। खेत-खलिहान, घरों, सड़कों तक नदी के पहुंचने के कारण चारों ओर पानी गया था।
रविवार से नदी के पीछे हटने से तटवर्ती गांवों के लोग कुछ हद तक राहत महसूस की है। लेकिन सड़कों पर उमड़ने वाले सैलाब की गवाही बरहज-कपरवार के बीच रामजानकी मार्ग, बिनवापुरी के निकट रुद्रपुर जाने वाली सड़क सहित करीब दो दर्जन संपर्क और मुख्य सड़कें बदहाल हो गई हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में जलभराव जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। उनसे उठने वाली दुर्गंध के कारण जीवन मोहाल हो गया है। वहीं, संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय सता रहा है। परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा कटइलवा, कोटवां का मल्लाह टोला, नौका टोला, मठियां, बेलडॉड, परसियां तिवारी, कुवाईच टोला, भदिला प्रथम, महेन, गोरखपुर के कोलखास आदि गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
बाढ़ से प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप है। इससे लोग अंधेरे में जीवन काट रहे हैं। वहीं, इलेक्ट्रानिक उपकरण और मोबाइल सेवा बाधित हो गई है। बेमौसम आई बाढ़ को लेकर राहत के बाद भी लोगों के चेहरों पर खौफ दिखाई दे रहा है।
इस संबंध में सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने कहा कि जलस्तर में तेजी से कमी आ रही है। जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
कपरवार पुलिस चौकी पर स्वास्थ्य टीम की तैनाती
बरहज। बाढ़ प्रभावित गांवों में फैलने वाली जलजनित बीमारियों को लेकर प्रशासन अलर्ट है। जिलाधिकारी जेपी सिंह के निर्देश पर सोमवार को कपरवार पुलिस चौकी पर स्वास्थ्य टीम तैनात की गई है। स्वास्थ्य टीम के पास पहुंचे कुवाईच टोला, बिनवापुरी, मठियां, पश्चिमपुरा आदि गांवों के मरीज मौसमी बुखार, खांसी, सर्दी आदि से पीड़ित थे। चिकित्सकों का कहना है कि 30-35 मरीजों ने दवा ली है। टीम में डॉ. हेमंत शुक्ल, डॉ. राहुल, रवि महावत, सुषमा राय, अजय कुमार तिवारी आदि शामिल हैं।
बाढ़ में भहराई घर की दीवार
बरहज। पिछले करीब एक सप्ताह से आई बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी के पीछे हटने से लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस की है। लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। रविवार की रात कपरवार-पश्चिमपुरा स्थित झींगुर शाह बाबा के मजार के निकट शमशाद पुत्र मरहूम अब्दुल रहमान के बाढ़ के पानी से घिरे मकान की पूर्वी दीवार गिर गई। इससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शमशाद के पुत्रों सलामुद्दीन और कलामुद्दीन का कहना है कि दीवार गिरने से सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को हो रही हैं। किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर परिवार की जीविका चलती है।
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आपदा में भाजपा को मिला लूट का अवसर : खोखा सिंह
सिर्फ फोटो शूट करा रहे शासन, प्रशासन के लोग, बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का सोमवार को समाजवादी पार्टी के नेताओं ने दौरा किया। उन्होंने शासन-प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों को मामूली राहत सामग्री देने का आरोप लगाया। सपाइयों ने क्षेत्र में किसानों की बर्बाद फसल का मुआवजा देने की मांग की।
पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने पिड़रा पुल के कटान स्थल, केवटलिया, कृतपुरा, सरया, गायघाट आदि गांवों का दौरा किया। पूर्व विधायक ने कहा कि पिड़रा पुल से एक माह से आवागमन बंद है। गोर्रा नदी सड़क को काट चुकी है। बचाव के नाम पर धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा। कटान स्थलों पर सिर्फ शासन प्रशासन के लोग फोटो शूट करा रहे हैं। बचाव कार्य के नाम पर भाजपा को लूट का अवसर मिला है। बाढ़ राहत पैकेट में मामूली सामग्री दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि नदी और बंधे के बीच किसानों की खेती बर्बाद हो चुकी है। किसानों की फसल को लेकर जिम्मेदार मौन हैं। पिछले साल भी बर्बाद हुई किसानों की फसल का मुआवजा नहीं दिया गया। पूर्व विधायक ने किसानों की नष्ट हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलने पर तहसील में आंदोलन करने की चेतावनी दी। इस दौरान हरेंद्र सिंह त्याग, महंथ यादव, शब्बीर अहमद, जितेश यादव, रामबिलास यादव आदि मौजूद रहे।
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नदी घाट पर महिलाओं ने चढ़ाई कड़ाही, किया पूजा-अर्चन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी में बाढ़ आने से पक्के घाट जलमग्न हो गए थे, जिससे श्रद्धालु नहीं पहुंच पा रहे थे। नदी के जलस्तर में कमी से पक्के घाटों से पानी हटने के कारण सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी, जिससे नदी घाट की रौनक वापस आ गई। दूर-दराज से आई महिलाओं ने घाट पर माता सरयू को कड़ाही चढ़ाने के साथ पूजा-अर्चन किया।
नदी के पक्के घाटों पर मांगलिक कार्यक्रमों आदि को लेकर हर रोज लोगों की भीड़ जुटती है। पिछले कुछ दिनों से सरयू में सैलाब उमड़ने के कारण परशुराम घाट, आरती, तुलसी, सीता, रामघाट सहित 12 घाटों की सीढ़ियां और सड़कें जलमग्न हो गई थीं। पिछले 24 घंटे से नदी के निरंतर पीछे हटने के कारण बाढ़ का पानी सड़क और घाट से नीचे चला गया है। घाट से पानी हटने की जानकारी होने पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जबकि घाट पर दुकानें भी सज गई थीं।