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बीमा कंपनियों का मुआवजा देने से इनकार
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बीमा कंपनियों का मुआवजा देने से इनकार
देवरिया/ लार। अतिवृष्टि से बर्बाद हुईं किसानों की खरीफ की फसलों का मुआवजा देने से बीमा कंपनियां इनकार कर रही हैं। कंपनी इसे आपदा नहीं मान रही है। ऐसे में बैंकों से ऋण लेकर खेती करने वाले किसान कर्ज तले दबे हुए हैं। उन्हें बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। इस बात से परेशान किसान शनिवार को डीएम से मिलकर बीमा कंपनियों से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की थी, ताकि आपदा से नुकसान हुई फसलों की लागत किसानों को मिल सके। योजना का लाभ पाने के लिए जिले के किसानों ने बैंकों से ऋण लेकर खेती कर फसलों का बीमा करवाया था। पहले रबी और अब अतिवृष्टि से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। आरोप है कि कंपनी के सर्वेयरों ने इसे प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। भागलपुर के किसान रमेश चंद्र पांडेय, त्रिगुणा नंद पांडेय, प्रहलाद तिवारी, मनोज कुमार पांडेय, रामशीष त्रिपाठी ने डीएम अमित किशोर से मिल कर बीमा कंपनियों से फसलों की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
13 जनवरी वर्ष 2016 को लागू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी वर्ष 2016 को लागू की थी। योजना को लागू करने का मकसद किसानों को खराब मौसम के चलते फसल नुकसान से सुरक्षा कवच प्रदान कर किसानों को समृद्ध करना था। किसान एक हेक्टेयर खेत में रोपाई की गई धान की फसल बीमा का कराते हैं तो उनको 1214 रुपये का वार्षिक प्रीमियम देना था। शेष सात हजार रुपये प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकार को देना था। इसमें कुल 65 हजार रुपये का इंश्योरेंस होता था।
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देवरिया/ लार। अतिवृष्टि से बर्बाद हुईं किसानों की खरीफ की फसलों का मुआवजा देने से बीमा कंपनियां इनकार कर रही हैं। कंपनी इसे आपदा नहीं मान रही है। ऐसे में बैंकों से ऋण लेकर खेती करने वाले किसान कर्ज तले दबे हुए हैं। उन्हें बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। इस बात से परेशान किसान शनिवार को डीएम से मिलकर बीमा कंपनियों से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की थी, ताकि आपदा से नुकसान हुई फसलों की लागत किसानों को मिल सके। योजना का लाभ पाने के लिए जिले के किसानों ने बैंकों से ऋण लेकर खेती कर फसलों का बीमा करवाया था। पहले रबी और अब अतिवृष्टि से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। आरोप है कि कंपनी के सर्वेयरों ने इसे प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। भागलपुर के किसान रमेश चंद्र पांडेय, त्रिगुणा नंद पांडेय, प्रहलाद तिवारी, मनोज कुमार पांडेय, रामशीष त्रिपाठी ने डीएम अमित किशोर से मिल कर बीमा कंपनियों से फसलों की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
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13 जनवरी वर्ष 2016 को लागू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी वर्ष 2016 को लागू की थी। योजना को लागू करने का मकसद किसानों को खराब मौसम के चलते फसल नुकसान से सुरक्षा कवच प्रदान कर किसानों को समृद्ध करना था। किसान एक हेक्टेयर खेत में रोपाई की गई धान की फसल बीमा का कराते हैं तो उनको 1214 रुपये का वार्षिक प्रीमियम देना था। शेष सात हजार रुपये प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकार को देना था। इसमें कुल 65 हजार रुपये का इंश्योरेंस होता था।
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