फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   In the ongoing battle of the chair UP: Nitish

यूपी में चल रही कुर्सी की लड़ाई: नीतीश

Sun, 18 Sep 2016 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया Updated Sun, 18 Sep 2016 11:33 PM IST
विज्ञापन
In the ongoing battle of the chair UP: Nitish
राजनैतिक सम्मेलन में बोलो नीतीश - फोटो : अमर उजाला
 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यूपी में कुर्सी की लड़ाई चल रही है। समाजवादी पार्टी में क्या चल रहा है, इससे हमें मतलब नहीं, न ही रखने की जरूरत है। लेकिन जब असर जनता पर पड़ने लगे तो मतलब रखनी पड़ती है। नीतीश रविवार को पथरदेवा के आचार्य नरेंद्रदेव इंटर कॉलेज मैदान में जदयू के राजनैतिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसमें शरद यादव को आना था लेकिन नहीं आए। नीतीश के साथ वरिष्ठ नेता केसी त्यागी  थे। 
विज्ञापन

खचाखच भरे मैदान में नीतीश ने किसानों और महिलाओं को साधने की कोशिश की। बिहार में शराब बंदी इफेक्ट के बारे में बताया तो यूपी में किसानों की दुर्दशा का मामला उठाया। कांग्रेस और भाजपा पर टिप्पणी से बचे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में हाल ही में झगड़ा हुआ है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का नाम न लेते हुए इशारों में कहा कि लोगों को मजबूत करने की जरूरत है, न कि परिवार को। नीतीश यहीं नहीं रुके, कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद हम लोगों ने महा गठबंधन बनाया। मुलायम को नेता चुना। उन्हें माला भी पहनाया लेकिन बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते हुए पता नहीं क्यों वे अलग हो गए। जब मैं सुनता हूं कि यूपी में सांप्रदायिक दंगे हुए हैं तो तकलीफ होती है। यहां के लोगों को बांट कर रखा जाता है ताकि चुनावों में वोटों का ध्रुवीकरण हो और वे राजनीतिक लाभ उठा सकें। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। 
विज्ञापन

नीतीश ने बसपा पर वार करते हुए कहा कि काशीराम ने जब यूपी में मिशन की शुरुआत की थी, तो शराब बंदी मुख्य मुद्दा था लेकिन मायावती ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए मशहूर है। यूपी सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही है। पेराई सत्र चालू होने के कई महीने बाद समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचे। किसान अपनी पूंजी निकालने के चक्कर में जल्दबाजी में गन्ना मिलों को दे देते हैं। ऐसे में उसे आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed