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Deoria News: स्वास्थ्य सेवाओं की रैकिंग में जिले को 40वां स्थान
Thu, 16 Mar 2023 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 16 Mar 2023 12:22 AM IST
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14 पायदान ऊपर तो चढ़े पर नहीं बना पाए टॉपटेन में जगह
सबसे खराब हाल जन्म अनुपात की रिपोर्टिंग का
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले की स्वास्थ्य सेवा प्रदेश के टॉप टेन जनपदों में अपना स्थान नहीं बना पाई है। हां, एक बात जरूर है कि रैंकिंग 54वें पायदान से सुधर कर 40वें पर पहुंच गई है। सबसे खराब स्थिति जन्म अनुपात का है। इसमें जिला लुढ़ककर 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
जनवरी की रैंकिंग मंगलवार को जारी हुई। इसमें जिले को 40वां स्थान प्रदेश स्तर पर मिला है। सबसे खराब स्थिति जन्म अनुपात की रिपोर्ट की रही है। गर्भवती और अन्य मरीजों को जरूरी सुविधा मुहैया कराने में जिले को बेहतर स्थान मिला है। क्षय रोगियों की रिपोर्टिंग में हालत खराब नहीं है। इसमें 39वां स्थान है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि कई महीनों से अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था लड़खड़ाने से सबसे खराब स्थिति में जनपद का स्थान रहा है।
ऑपरेशन से प्रसव के मामले में जिले को 42वां स्थान मिला है। आयुष्मान कार्ड से सुविधा में 25वां स्थान मिला है। एंटी नेटल केयर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। बच्चों के नियमित टीकाकरण में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है। परिवार नियोजन के स्थायी साधन में 34वां व अस्थायी में 61वां स्थान मिला है।
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इन बिंदुओं पर जारी हुआ रिपोर्ट कार्ड
डिलीवरी रेट, एचआई स्क्रीनिंग, आशा की उपस्थिति, प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव, परिवार नियोजन, टीकाकरण, जन्म अनुपात, आशाओं का मानदेय वितरण है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर उठ रहे सवाल
देवरिया। प्रदेश स्तर पर टाॅपटेन जनपद का स्थान न बन पाने से स्वास्थ्य महकमा के छापेमारी सहित अन्य कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रैंकिंग खराब आने की सबसे बड़ी वजह है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे मरीजों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच, झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई भी कारगर तरीके से नहीं हो पा रही है। महज पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ही कार्रवाई हुई। कई अस्पताल ऐसे रहे, जहां आशाओं के झांसे में फंसकर गर्भवती निजी अस्पताल पहुंच गईं और उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ी। आईजीआरएस पर आई शिकायतों को भी गंभीरता से न लेकर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई है।
कोट
स्वास्थ्य सेवा की रैंकिंग में सुधार हुआ है। जिला पहले 54वें स्थान पर था। इस बार 40वें स्थान पर है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ और अस्पताल पर ऑपरेशन से प्रसव शुरू किया जाएगा। ताकि जिले की रैंकिंग और बेहतर हो सके।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ
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सबसे खराब हाल जन्म अनुपात की रिपोर्टिंग का
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले की स्वास्थ्य सेवा प्रदेश के टॉप टेन जनपदों में अपना स्थान नहीं बना पाई है। हां, एक बात जरूर है कि रैंकिंग 54वें पायदान से सुधर कर 40वें पर पहुंच गई है। सबसे खराब स्थिति जन्म अनुपात का है। इसमें जिला लुढ़ककर 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
जनवरी की रैंकिंग मंगलवार को जारी हुई। इसमें जिले को 40वां स्थान प्रदेश स्तर पर मिला है। सबसे खराब स्थिति जन्म अनुपात की रिपोर्ट की रही है। गर्भवती और अन्य मरीजों को जरूरी सुविधा मुहैया कराने में जिले को बेहतर स्थान मिला है। क्षय रोगियों की रिपोर्टिंग में हालत खराब नहीं है। इसमें 39वां स्थान है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि कई महीनों से अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था लड़खड़ाने से सबसे खराब स्थिति में जनपद का स्थान रहा है।
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ऑपरेशन से प्रसव के मामले में जिले को 42वां स्थान मिला है। आयुष्मान कार्ड से सुविधा में 25वां स्थान मिला है। एंटी नेटल केयर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। बच्चों के नियमित टीकाकरण में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है। परिवार नियोजन के स्थायी साधन में 34वां व अस्थायी में 61वां स्थान मिला है।
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इन बिंदुओं पर जारी हुआ रिपोर्ट कार्ड
डिलीवरी रेट, एचआई स्क्रीनिंग, आशा की उपस्थिति, प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव, परिवार नियोजन, टीकाकरण, जन्म अनुपात, आशाओं का मानदेय वितरण है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर उठ रहे सवाल
देवरिया। प्रदेश स्तर पर टाॅपटेन जनपद का स्थान न बन पाने से स्वास्थ्य महकमा के छापेमारी सहित अन्य कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रैंकिंग खराब आने की सबसे बड़ी वजह है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे मरीजों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच, झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई भी कारगर तरीके से नहीं हो पा रही है। महज पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ही कार्रवाई हुई। कई अस्पताल ऐसे रहे, जहां आशाओं के झांसे में फंसकर गर्भवती निजी अस्पताल पहुंच गईं और उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ी। आईजीआरएस पर आई शिकायतों को भी गंभीरता से न लेकर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई है।
कोट
स्वास्थ्य सेवा की रैंकिंग में सुधार हुआ है। जिला पहले 54वें स्थान पर था। इस बार 40वें स्थान पर है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ और अस्पताल पर ऑपरेशन से प्रसव शुरू किया जाएगा। ताकि जिले की रैंकिंग और बेहतर हो सके।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ