{"_id":"58bbcf04c65010a5d90e6d93ac364430","slug":"hundred-days-work-cycle-reward-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सौ दिन काम किया तो साइकिल इनाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सौ दिन काम किया तो साइकिल इनाम
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Thu, 28 Jan 2016 11:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग होता देखकर सरकार ने काम के बदले मजदूरी के साथ ही साथ इनाम की भी घोषणा की है।
अब मनरेगा के तहत सौ दिन काम करने वाले मजदूरों को साइकिल इनाम में दी जाएगी।
जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने सोनबह मुस्तकीम गांव में चौपाल के दौरान मातहतों से योजना का प्रचार करने को कहा।
मनरेगा के तहत सरकार जॉब कार्ड धारकों को सौ दिनों के रोजगार की गारंटी देती है। मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूर को 161 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है।
जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी 300 रुपये हो गई है। मजदूरी में भारी अंतर का महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पर खास असर पड़ रहा है।
रुद्रपुर ब्लॉक में इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ चार परिवारों ने 100 दिन का रोजगार पूरा किया। जबकि रुद्रपुर में 11784 परिवारों को मनरेगा के तहत जॉब कार्ड जारी किया गया है।
विज्ञापन
2015-16 वित्तीय वर्ष में रुद्रपुर ब्लॉक में 3896 परिवारों ने आवेदन देकर रोजगार की मांग की थी। इनमें से सिर्फ 2870 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सका।
इस वर्ष 33667 मानव दिवसों पर महिला मजदूरों ने काम किया। पिछले चार माह से मनरेगा के तहत पंजीकरण कराकर गांव में रोजगार तलाशने वाले मजदूरों की फांका मस्ती चल रही ।
रुद्रपुर ब्लॉक में वर्तमान में मनरेगा तहत कोई परिवार काम नहीं कर रहा है।
गांव में काम की कमी और मजदूरी की विसंगतियों ने इस योजना से मजदूरों का मोह भंग कर दिया। अब देखना है कि इनाम का आकर्षण कितने मजदूरों को सौ दिन का रोजगार पूरा करने के लिए प्रेरित कर पाता है।
विज्ञापन
अब मनरेगा के तहत सौ दिन काम करने वाले मजदूरों को साइकिल इनाम में दी जाएगी।
जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने सोनबह मुस्तकीम गांव में चौपाल के दौरान मातहतों से योजना का प्रचार करने को कहा।
मनरेगा के तहत सरकार जॉब कार्ड धारकों को सौ दिनों के रोजगार की गारंटी देती है। मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूर को 161 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है।
जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी 300 रुपये हो गई है। मजदूरी में भारी अंतर का महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पर खास असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
रुद्रपुर ब्लॉक में इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ चार परिवारों ने 100 दिन का रोजगार पूरा किया। जबकि रुद्रपुर में 11784 परिवारों को मनरेगा के तहत जॉब कार्ड जारी किया गया है।
विज्ञापन
2015-16 वित्तीय वर्ष में रुद्रपुर ब्लॉक में 3896 परिवारों ने आवेदन देकर रोजगार की मांग की थी। इनमें से सिर्फ 2870 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सका।
इस वर्ष 33667 मानव दिवसों पर महिला मजदूरों ने काम किया। पिछले चार माह से मनरेगा के तहत पंजीकरण कराकर गांव में रोजगार तलाशने वाले मजदूरों की फांका मस्ती चल रही ।
रुद्रपुर ब्लॉक में वर्तमान में मनरेगा तहत कोई परिवार काम नहीं कर रहा है।
गांव में काम की कमी और मजदूरी की विसंगतियों ने इस योजना से मजदूरों का मोह भंग कर दिया। अब देखना है कि इनाम का आकर्षण कितने मजदूरों को सौ दिन का रोजगार पूरा करने के लिए प्रेरित कर पाता है।