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नारी शक्ति वंदन से जगी आस : 75 साल में चार महिलाएं पहुंचीं सदन, लोकसभा में चुनकर एक भी नहीं
Thu, 21 Sep 2023 12:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 21 Sep 2023 12:23 PM IST
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देवरिया। नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर महिलाओं में खुशी है। इससे उनका सदन तक का रास्ता बेहतर होगा। आजादी के 75 वर्ष के सफर में जिले की चार महिलाएं चुनाव जीतकर विधानसभा और एक महिला उच्च सदन तक पहुंची है। जबकि हर विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवार मैदान में उतरती हैं, पर हार का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए संसद में पेश हो रहे नारी शक्ति वंदन विधेयक के जरिए उनका हक दमदारी से मिलेगा। अभी तक स्थिति यह थी कि दावे तो बहुत होते थे, पर जमीनी हकीकत कुछ और थी। आजादी के बाद 1952 से 2019 के बीच लोकसभा के चुनाव में देवरिया, सलेमपुर, कुशीनगर से कभी भी महिला प्रत्याशी को विजय नहीं मिली। इतना ही नहीं, एक बार कांग्रेस ने शशि शर्मा को लोकसभा का टिकट दिया था। जबकि अन्य दलों ने महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया। निर्दल महिला उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। जबकि देवरिया-कुशीनगर जनपद एक में होने पर शशि शर्मा फाजिलनगर विधानसभा सीट से एक बार विधायक चुनी गईं थीं और पहली महिला उम्मीदवार को जीत मिली थी। विधानसभा के चुनाव पर नजर दौड़ाई जाए तो लालझारी देवी गौरीबाजार से विधायक चुनी गईं थीं। इनके बाद सलेमपुर और रामपुर कारखाना से गजाला लारी विधायक बनीं। पिछले विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने सलेमपुर सुरक्षित सीट से विजयलक्ष्मी गौतम को मैदान में उतारा और वह जीत गईं। रामपुर कारखाना, सलेमपुर, गौरीबाजार को छोड़कर किसी भी विधानसभा सीट पर आज तक महिला उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली है।
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कनकलता बनीं थीं राज्यसभा सदस्य
देवरिया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व लोकसभा में मुख्य सचेतक रहे स्व. मोहन सिंह की पुत्री कनकलता को सपा ने राज्यसभा सदस्य बनाया था। इसके बाद से वह राजनीति में सक्रिय हैं। मोहन सिंह के निधन के बाद सपा ने इन्हें मनोनीत कर उच्च सदन में भेजा था। इसके पहले कोई महिला लोकसभा और उच्च सदन में नहीं पहुंच पाई है।
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फोटो
महिलाओं को नारी शक्ति वंदन विधेयक का अभिनंदन करना चाहिए। इसके पास हो जाने से महिलाओं को राजनीति में बड़ा अवसर मिलेगा। भविष्य के लिए बहुत बड़ी बात होगी। हर महिला को सदन में पहुंचने का अवसर मिलेगा।
- अलका सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष
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महिलाओं को आरक्षण देकर सरकार ने अच्छी पहल की है। 33 फीसदी आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़ेगी और हर दल महिला उम्मीदवार को टिकट देना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक कदम की स्वागत करती हूं।
- इंदू बरनवाल, गृहिणी
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फोटो
देश की आधी आबादी के वोटों की हर चुनाव में अहम भूमिका रहती है। चुनाव में जिसके साथ महिलाओं का वोट होता है वह विजेता होता है। 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी तो इसका फायदा मिलेगा। राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी।
- ज्योति शाही, अधिवक्ता
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फोटो
महिलाओं के लिए यह गौरव की बात है। काफी समय से इसके लिए प्रयास किया जाता रहा था। नारी शक्ति वंदन विधेयक आधी आबादी की सहभागिता के लिए मील का पत्थर साबित होगा, इसका सभी को समर्थन करना चाहिए।
- रजनी पांडेय, भाजपा नेत्री
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महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए संसद में पेश हो रहे नारी शक्ति वंदन विधेयक के जरिए उनका हक दमदारी से मिलेगा। अभी तक स्थिति यह थी कि दावे तो बहुत होते थे, पर जमीनी हकीकत कुछ और थी। आजादी के बाद 1952 से 2019 के बीच लोकसभा के चुनाव में देवरिया, सलेमपुर, कुशीनगर से कभी भी महिला प्रत्याशी को विजय नहीं मिली। इतना ही नहीं, एक बार कांग्रेस ने शशि शर्मा को लोकसभा का टिकट दिया था। जबकि अन्य दलों ने महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया। निर्दल महिला उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। जबकि देवरिया-कुशीनगर जनपद एक में होने पर शशि शर्मा फाजिलनगर विधानसभा सीट से एक बार विधायक चुनी गईं थीं और पहली महिला उम्मीदवार को जीत मिली थी। विधानसभा के चुनाव पर नजर दौड़ाई जाए तो लालझारी देवी गौरीबाजार से विधायक चुनी गईं थीं। इनके बाद सलेमपुर और रामपुर कारखाना से गजाला लारी विधायक बनीं। पिछले विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने सलेमपुर सुरक्षित सीट से विजयलक्ष्मी गौतम को मैदान में उतारा और वह जीत गईं। रामपुर कारखाना, सलेमपुर, गौरीबाजार को छोड़कर किसी भी विधानसभा सीट पर आज तक महिला उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली है।
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कनकलता बनीं थीं राज्यसभा सदस्य
देवरिया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व लोकसभा में मुख्य सचेतक रहे स्व. मोहन सिंह की पुत्री कनकलता को सपा ने राज्यसभा सदस्य बनाया था। इसके बाद से वह राजनीति में सक्रिय हैं। मोहन सिंह के निधन के बाद सपा ने इन्हें मनोनीत कर उच्च सदन में भेजा था। इसके पहले कोई महिला लोकसभा और उच्च सदन में नहीं पहुंच पाई है।
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महिलाओं को नारी शक्ति वंदन विधेयक का अभिनंदन करना चाहिए। इसके पास हो जाने से महिलाओं को राजनीति में बड़ा अवसर मिलेगा। भविष्य के लिए बहुत बड़ी बात होगी। हर महिला को सदन में पहुंचने का अवसर मिलेगा।
- अलका सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष
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महिलाओं को आरक्षण देकर सरकार ने अच्छी पहल की है। 33 फीसदी आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़ेगी और हर दल महिला उम्मीदवार को टिकट देना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक कदम की स्वागत करती हूं।
- इंदू बरनवाल, गृहिणी
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देश की आधी आबादी के वोटों की हर चुनाव में अहम भूमिका रहती है। चुनाव में जिसके साथ महिलाओं का वोट होता है वह विजेता होता है। 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी तो इसका फायदा मिलेगा। राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी।
- ज्योति शाही, अधिवक्ता
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महिलाओं के लिए यह गौरव की बात है। काफी समय से इसके लिए प्रयास किया जाता रहा था। नारी शक्ति वंदन विधेयक आधी आबादी की सहभागिता के लिए मील का पत्थर साबित होगा, इसका सभी को समर्थन करना चाहिए।
- रजनी पांडेय, भाजपा नेत्री