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कहां लगें उद्योग यहां तो बस र्गइं आवासीय कॉलोनियां
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कहां लगें उद्योग यहां तो बस र्गइं आवासीय कॉलोनियां
मास्टर प्लान की अनदेखी औद्योगिक विकास पर पड़ेगी भारी
शहर की बेतरतीब बसावट से बढ़ेगी उद्यमियों की परेशानी
बैकुंठनाथ शुक्ल
देवरिया। जिस आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को लेकर 40 साल पहले शहर का मास्टर प्लान तैयार हुआ, उसके नक्शे धरातल से मेल नहीं खा रहे। नियत प्राधिकारी कार्यालय ने उद्योग के लिए चिह्नित स्थानों पर आवासीय कॉलोनियां बसा दी हैं। अब सरकार जब स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लोकल को ग्लोबल बनाने की मुहिम छेड़ रही है तो उद्यमियों के सामने मास्टर प्लान की कई मुश्किलें मुंहबाए खड़ी हो रहीं हैं।
उद्यमियों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि औद्योगिक एरिया के अलावा दूसरे जगहों पर उद्योग लगाने के लिए नक्शा आसानी से पास नहीं हो पाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने में भी कठिनाई आएगी। अगर एनओसी मिल भी जाता है तो आबादी के बीच प्रदूषण बढ़ने पर उसे निरस्त किए जाने की आशंका बनी रहेगी। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को इस तरह की मुश्किलें नहीं आती हैं। मास्टर प्लान से नक्शा आसानी से पास होता ही है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने में भी कठिनाई नहीं होती। मौजूदा समय में पुरवां चौराहा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़कर विनियमित क्षेत्र में कोई दूसरा इलाका उद्योग के लिए आरक्षित नहीं है। अलग-अलग जगहों पर उद्योग लगाने से उद्यमियों को कई जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी।
इनसेट
उद्योग के लिए जरूरी सेवाएं
ट्रांसपोर्ट के साधन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, रॉ मैटेरियल, पर्याप्त जगह, कुशल श्रमिक, बैंक, पेयजल व सुरक्षा यह उद्योग विकास के लिए नितांत आवश्यक सेवाएं हैं। यही कारण है कि मास्टर प्लान के नक्शे में उद्योग के लिए अलग से जगह आरक्षित की जाती है। नगर क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए 12.7 हेक्टेयर जमीन अलग-अलग जगहों पर चिह्नित है। जो संपूर्ण क्षेत्रफल का 0.8 प्रतिशत है।
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इनसेट
उद्योग के लिए छह जगह चिह्नित है जमीन
मास्टर प्लान के नक्शे में औद्योगिक विकास के लिए छह जगह जमीन चिह्नित की गई है। रेलवे माल गोदाम से पूरब रेलवे लाइन किनारे वृहद व लाइन से उत्तर लघु उद्योग के लिए जमीन चिह्नित है। पुरवां में मध्यम, लघु उद्योग व चीनी मिल भुजौली कालोनी में वृहद, रुद्रपुर रोड कतरारी के समीप और सिंधी मिल कॉलोनी में लघु एवं सेवा उद्योग एरिया मास्टर प्लान में दर्शाया गया है।
उद्योग के लिए नीति तैयार करे जिला प्रशासन
आईआईए के जिलाध्यक्ष जेपी जायसवाल का कहना है कि जिस तरह प्रदेश सरकार उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। वैसे ही जिला प्रशासन को भी स्थानीय स्तर पर नीति तैयार करनी होगी। ताकि मास्टर प्लान उद्यमियों की राह में रोड़ा न बने। अलग भूभाग चयन कर उद्योग के लिए आरक्षित करना होगा। तभी उद्यमियों को सभी सहूलियतें मिल पाएंगी।
वर्जन
मास्टर प्लान में उद्योग के लिए जो भूभाग चिह्नित किए गए हैं, उसे उद्योग विभाग ने अधिग्रहीत नहीं किया। अब वहां आवासीय कॉलोनियां बन गईं हैं। उद्योग विभाग जहां भी जमीन अधिग्रहण करेगा उसे आरक्षित कर दिया जाएगा। उद्यमियों को जहां उद्योग लगाने होते हैं, उसकी अनुमति डीएम के यहां से दे दी जाती है।
- राकेश कुमार श्रीवास्तव, जेई मास्टर प्लान।
वर्जन
शहर में उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण का कोई शासनादेश नहीं है। औद्योगिक एरिया में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को तमाम सहूलियतें एक साथ मिल जाती हैं। इनके विकास का रोडमैप तैयार करने में भी आसानी होती है। अलग-अलग जगहों पर उद्योग लगने से सबको एक जैसी सुविधा नहीं मिल पाती है। कहीं सुरक्षा का अभाव होता है तो कहीं जरूरी सेवाओं का।
- केके अमर, उपायुक्त उद्योग।
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मास्टर प्लान की अनदेखी औद्योगिक विकास पर पड़ेगी भारी
शहर की बेतरतीब बसावट से बढ़ेगी उद्यमियों की परेशानी
बैकुंठनाथ शुक्ल
देवरिया। जिस आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को लेकर 40 साल पहले शहर का मास्टर प्लान तैयार हुआ, उसके नक्शे धरातल से मेल नहीं खा रहे। नियत प्राधिकारी कार्यालय ने उद्योग के लिए चिह्नित स्थानों पर आवासीय कॉलोनियां बसा दी हैं। अब सरकार जब स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लोकल को ग्लोबल बनाने की मुहिम छेड़ रही है तो उद्यमियों के सामने मास्टर प्लान की कई मुश्किलें मुंहबाए खड़ी हो रहीं हैं।
उद्यमियों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि औद्योगिक एरिया के अलावा दूसरे जगहों पर उद्योग लगाने के लिए नक्शा आसानी से पास नहीं हो पाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने में भी कठिनाई आएगी। अगर एनओसी मिल भी जाता है तो आबादी के बीच प्रदूषण बढ़ने पर उसे निरस्त किए जाने की आशंका बनी रहेगी। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को इस तरह की मुश्किलें नहीं आती हैं। मास्टर प्लान से नक्शा आसानी से पास होता ही है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने में भी कठिनाई नहीं होती। मौजूदा समय में पुरवां चौराहा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़कर विनियमित क्षेत्र में कोई दूसरा इलाका उद्योग के लिए आरक्षित नहीं है। अलग-अलग जगहों पर उद्योग लगाने से उद्यमियों को कई जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी।
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उद्योग के लिए जरूरी सेवाएं
ट्रांसपोर्ट के साधन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, रॉ मैटेरियल, पर्याप्त जगह, कुशल श्रमिक, बैंक, पेयजल व सुरक्षा यह उद्योग विकास के लिए नितांत आवश्यक सेवाएं हैं। यही कारण है कि मास्टर प्लान के नक्शे में उद्योग के लिए अलग से जगह आरक्षित की जाती है। नगर क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए 12.7 हेक्टेयर जमीन अलग-अलग जगहों पर चिह्नित है। जो संपूर्ण क्षेत्रफल का 0.8 प्रतिशत है।
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उद्योग के लिए छह जगह चिह्नित है जमीन
मास्टर प्लान के नक्शे में औद्योगिक विकास के लिए छह जगह जमीन चिह्नित की गई है। रेलवे माल गोदाम से पूरब रेलवे लाइन किनारे वृहद व लाइन से उत्तर लघु उद्योग के लिए जमीन चिह्नित है। पुरवां में मध्यम, लघु उद्योग व चीनी मिल भुजौली कालोनी में वृहद, रुद्रपुर रोड कतरारी के समीप और सिंधी मिल कॉलोनी में लघु एवं सेवा उद्योग एरिया मास्टर प्लान में दर्शाया गया है।
उद्योग के लिए नीति तैयार करे जिला प्रशासन
आईआईए के जिलाध्यक्ष जेपी जायसवाल का कहना है कि जिस तरह प्रदेश सरकार उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। वैसे ही जिला प्रशासन को भी स्थानीय स्तर पर नीति तैयार करनी होगी। ताकि मास्टर प्लान उद्यमियों की राह में रोड़ा न बने। अलग भूभाग चयन कर उद्योग के लिए आरक्षित करना होगा। तभी उद्यमियों को सभी सहूलियतें मिल पाएंगी।
वर्जन
मास्टर प्लान में उद्योग के लिए जो भूभाग चिह्नित किए गए हैं, उसे उद्योग विभाग ने अधिग्रहीत नहीं किया। अब वहां आवासीय कॉलोनियां बन गईं हैं। उद्योग विभाग जहां भी जमीन अधिग्रहण करेगा उसे आरक्षित कर दिया जाएगा। उद्यमियों को जहां उद्योग लगाने होते हैं, उसकी अनुमति डीएम के यहां से दे दी जाती है।
- राकेश कुमार श्रीवास्तव, जेई मास्टर प्लान।
वर्जन
शहर में उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण का कोई शासनादेश नहीं है। औद्योगिक एरिया में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को तमाम सहूलियतें एक साथ मिल जाती हैं। इनके विकास का रोडमैप तैयार करने में भी आसानी होती है। अलग-अलग जगहों पर उद्योग लगने से सबको एक जैसी सुविधा नहीं मिल पाती है। कहीं सुरक्षा का अभाव होता है तो कहीं जरूरी सेवाओं का।
- केके अमर, उपायुक्त उद्योग।