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Deoria News: 30 प्रतिशत महिलाओं में मिल रही हीमोग्लोबिन की कमी
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खानपान में लापरवाही के कारण आ रही समस्या, प्रसव के दौरान बढ़ रहा जोखिम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्भावस्था के दौरान खानपान में हो रही लापरवाही के कारण 30 प्रतिशत महिलाएं हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार हैं। प्रसव के लिए मेडिकल कालेज में आ रही महिलाओं की जांच में यह जानकारी सामने आ रही है। ऐसी महिलाओं को चिकित्सक प्रसव से पूर्व करीब एक हफ्ते भर्ती कराकर आयरन आदि दवाओं के माध्यम से हीमोग्लोबिन की पूर्ति करा रहे हैं। आवश्यकतानुसार उन्हें ब्लड भी चढ़ाया जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज की महिला ओपीडी में रोजाना 60 से 70 गर्भवती महिलाएं परामर्श लेने आती हैं। इनमें पांच से सात महिलाओं का रोजाना प्रसव कराया जाता है। जो महिलाएं गर्भ ठहरने के कुछ माह बाद चिकित्सक से परामर्श लेती रहती हैं उनमें लगभग हीमोग्लोबिन की मात्रा सही पाई जाती है। वहीं जो महिलाएं अचानक प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल काॅलेज आ रही हैं, उनमें हीमोग्लोबिन की कमी मिल रही है। नाॅर्मल डिलीवरी न होने पर ऑपरेशन के दौरान जोखिम बढ़ जा रहा है। तत्काल आई महिलाओं को गोरखपुर के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
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प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण
आयरन की कमी के कारण प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। चिकित्सक के अनुसार समान्यतया शरीर को रोज 10 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है, लेकिन जब कोई महिला प्रेगनेंट होती है तो उसको रोज 27 मिलीग्राम की जरूरत होती है। गर्भ में पल रहा शिशु लगातार विकास कर रहा होता है। जिसके कारण महिला के शरीर में आयरन की जरूरत दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है।
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हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण:
- सांस लेने में परेशानी होना
- होंठों, नाखून और त्वचा में पीलापन आ जाना
- घबराहट और चक्कर आना
- जल्दी थक जाना
- कमजोरी महसूस होना
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ऐसे दूर करें हीमोग्लोबिन की कमी
गर्भावस्था में एनीमिया हो जाने पर सबसे पहले आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ताकि आपका डॉक्टर आपकी स्थिति के हिसाब से आपको फॉलिक एसिड के साथ आयरन सप्लीमेंट की सलाह दे सके। उसके बाद आपको अपने खाने में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और आयरन से भरपूर सब्जियों का सेवन करना चाहिए। अगर आप वेजीटेरियन हैं तो बींस, काबुली चना, सोया बींस, काले चने, कच्चे केले की सब्जी का सेवन भरपूर में मात्रा में करने से हीमोग्लोबिन की कमी दूर होगी।
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कोट:
मेडिकल कॉलेज आने वाली गर्भवती महिलाओं में 30 प्रतिशत हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार हैं। परामर्श के लिए आई महिलाओं को आयरन की दवा दी जाती है। साथ ही आयरन से भरपूर पोषक तत्व खाने की सलाह दी जाती है। प्रसव के लिए आई महिलाओं को भर्ती कर दवा व ब्लड चढवाकर हीमोग्लोबिन की पूर्ति कराई जाती है। - डॉ. पूनम बाला, महिला चिकित्साधिकारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्भावस्था के दौरान खानपान में हो रही लापरवाही के कारण 30 प्रतिशत महिलाएं हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार हैं। प्रसव के लिए मेडिकल कालेज में आ रही महिलाओं की जांच में यह जानकारी सामने आ रही है। ऐसी महिलाओं को चिकित्सक प्रसव से पूर्व करीब एक हफ्ते भर्ती कराकर आयरन आदि दवाओं के माध्यम से हीमोग्लोबिन की पूर्ति करा रहे हैं। आवश्यकतानुसार उन्हें ब्लड भी चढ़ाया जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज की महिला ओपीडी में रोजाना 60 से 70 गर्भवती महिलाएं परामर्श लेने आती हैं। इनमें पांच से सात महिलाओं का रोजाना प्रसव कराया जाता है। जो महिलाएं गर्भ ठहरने के कुछ माह बाद चिकित्सक से परामर्श लेती रहती हैं उनमें लगभग हीमोग्लोबिन की मात्रा सही पाई जाती है। वहीं जो महिलाएं अचानक प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल काॅलेज आ रही हैं, उनमें हीमोग्लोबिन की कमी मिल रही है। नाॅर्मल डिलीवरी न होने पर ऑपरेशन के दौरान जोखिम बढ़ जा रहा है। तत्काल आई महिलाओं को गोरखपुर के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
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प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण
आयरन की कमी के कारण प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। चिकित्सक के अनुसार समान्यतया शरीर को रोज 10 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है, लेकिन जब कोई महिला प्रेगनेंट होती है तो उसको रोज 27 मिलीग्राम की जरूरत होती है। गर्भ में पल रहा शिशु लगातार विकास कर रहा होता है। जिसके कारण महिला के शरीर में आयरन की जरूरत दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है।
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हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण:
- सांस लेने में परेशानी होना
- होंठों, नाखून और त्वचा में पीलापन आ जाना
- घबराहट और चक्कर आना
- जल्दी थक जाना
- कमजोरी महसूस होना
ऐसे दूर करें हीमोग्लोबिन की कमी
गर्भावस्था में एनीमिया हो जाने पर सबसे पहले आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ताकि आपका डॉक्टर आपकी स्थिति के हिसाब से आपको फॉलिक एसिड के साथ आयरन सप्लीमेंट की सलाह दे सके। उसके बाद आपको अपने खाने में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और आयरन से भरपूर सब्जियों का सेवन करना चाहिए। अगर आप वेजीटेरियन हैं तो बींस, काबुली चना, सोया बींस, काले चने, कच्चे केले की सब्जी का सेवन भरपूर में मात्रा में करने से हीमोग्लोबिन की कमी दूर होगी।
कोट:
मेडिकल कॉलेज आने वाली गर्भवती महिलाओं में 30 प्रतिशत हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार हैं। परामर्श के लिए आई महिलाओं को आयरन की दवा दी जाती है। साथ ही आयरन से भरपूर पोषक तत्व खाने की सलाह दी जाती है। प्रसव के लिए आई महिलाओं को भर्ती कर दवा व ब्लड चढवाकर हीमोग्लोबिन की पूर्ति कराई जाती है। - डॉ. पूनम बाला, महिला चिकित्साधिकारी।