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Deoria News: पीना पड़ रहा जहर, नहीं चेत रहे अफसर

Thu, 28 Dec 2023 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 28 Dec 2023 12:03 AM IST
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Have to drink poison, officers are not alert
जिले के एक तिहाई लोग पी रहे आर्सेनिक और फ्लोराइड मिला पानी
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घरों तक नहीं पहुंच रहा साफ पानी, रोज 50 लाख रुपये का खरीदकर पी रहे


देवरिया। जिले के एक तिहाई हिस्से के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक मिली है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। इसके बावजूद साफ पानी मुहैया कराने की योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। हाल यह है कि जिले के लोग हर रोज करीब 50 लाख रुपये का पानी खरीदकर पी रहे हैं।

हर घर नल योजना के तहत सभी घरों में पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी जल निगम की है। जिले में 1200 करोड़ रुपये की लागत से 872 पानी टंकी का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि 160 पानी की टंकी पहले से बनी हुई हैं। इसमें 40 से अधिक पानी की टंकी में खराबी की वजह से सप्लाई प्रभावित है।
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वर्ष 2021-22 में पानी की शुद्धता की जांच जल निगम की ओर से कराई गई थी। इसमें बरहज तहसील के महेन बाबू, खुदिया बुजुर्ग, करजहां, गौरीबाजार के बरवा, भागलपुर ब्लॉक के जिरासो, मुरासो, रामपुर कारखाना के पांडेयचक समेत 100 से अधिक गांवों में पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की अधिक मात्रा मिली थी। इसके अलावा स्कूलों पर लगे करीब 300 इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी में आयरन की मात्रा अधिक पाई गई थी। केंद्रीय जल आयोग की टीम भी इन गांवों में जांच के लिए पहुंची थी। खराब पानी का असर क्षेत्र के लोगों की सेहत पर दिखा।
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तब निर्णय लिया गया कि इन गांवों में साफ पानी मुहैया कराने के लिए पानी टंकी बनवाई जाए। जिरासो, खुदिया बुजुर्ग, बीरवा गांव में पानी की टंकी बनी, लेकिन इससे घरों में आपूर्ति नहीं हो पाई। मजबूरन लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। जो संपन्न हैं वह या तो घरों में वाटर प्यूरिफायर लगवा लिए हैं या फिर आरओ प्लांट से पानी खरीदकर पीते हैं।

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जल निगम के प्रयोगशाला प्रभारी के अनुसार आर्सेनिक का प्रभाव जिले के 100 से अधिक गांवों में एक साल पहले तक था, जिसमें बरहज, भागलपुर, गौरीबाजार, बनकटा ब्लॉक क्षेत्र के गांव शामिल रहे। सबसे खराब पानी की गुणवत्ता जिरासो गांव की मिली थी, जहां पानी की टंकी का निर्माण कराया गया। इन दिनों पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। मानसून आने और मानसून जाने के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है। जनवरी के बाद पानी की जांच के लिए अभियान चलेगा।
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आर्सेनिक का मतलब मीठा जहर
आर्सेनिक युक्त पानी पीने से शरीर पर काले चकत्ते, खुजली जैसी बीमारी होती है। यही कैंसर का कारण भी बनता है। आर्सेनिक से प्रभावित लोगों की स्किन फटने लगती है। आर्सेनिक दूसरे रूप में मीठा जहर है।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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जल जीवन मिशन के तहत हो रहा पानी टंकियों का निर्माण
जल जीवन मिशन के तहत जिले के सभी घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाना है। जल जीवन मिशन के सहायक अभियंता सुनील कुमार के अनुसार अभी तक तीन लाख घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचा दिया गया है। इसमें एक लाख घरों तक पानी पहुंच रहा है, बाकी घरों तक पानी की सप्लाई जल्द पहुंचने की उम्मीद है। 27 गांव में जमीन नहीं मिलने के कारण पानी टंकी का निर्माण कार्य रुका है। मार्च 2024 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन निर्माण कार्य की प्रगति धीमी होने के कारण दिसंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया है।
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जिरासो गांव की पानी की गुणवत्ता काफी खराब है। 13 साल पहले गांव में लाखों की लागत से पानी टंकी का निर्माण जल निगम की ओर से कराया गया। घरों तक कनेक्शन भी दिया गया है। लेकिन बीस दिन में ही पानी की टंकी से सप्लाई आना बंद हो गया। शिकायत के बाद भी अभी तक नहीं बन सका।
-जगत जायसवाल, जिरासो
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-गांव में शुद्ध पेयजल के लिए लगी पानी की टंकी किसी काम की नहीं है। बनने के 20 दिन बाद ही पाइप फट गया। अभी तक नहीं बन सका है। पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। जल निगम के अफसर इसको लेकर लापरवाह हैं। जल जीवन मिशन के नाम पर लूट खसोट कर रहे हैं। महेंद्र यादव, मुरासो
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सलेमपुर के सांसद संसद में उठा चुके हैं मुद्दा
सलेमपुर नगर पंचायत में पानी टंकी 25 सालों से बंद है। आठ माह पहले सांसद रविंद्र कुशवाहा इसे चालू कराने की मांग सांसद की थी। उन्होंने कहा कि चार बार पिता सांसद रहे और दो बार से मैं हूं। शिकायत के बावजूद अभी तक पानी की टंकी चालू नहीं कराई जा सकी है।

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जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। दिसंबर 2024 तक पानी टंकियों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले के हर घर को पानी का कनेक्शन देना है। विभाग की जानकारी में सिर्फ 40 पानी की टंकी बंद है, जिसकी मरम्मत कराई जाएगी। पानी की गुणवत्ता जिले के कुछ गांवों में खराब मिली थी। सेंट्रल ग्राउंड वाटर डिर्पाटमेंट भी इसकी जांच के लिए जिले में आई थी। इन दिनों पानी टंकी बनने से पहले बोरवेल की जांच कराई जा रही है तो गुणवत्ता ठीक मिल रही है। अखिल आनंद, एक्सईएन, जल निगम ग्रामीण देवरिया
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