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भोपाल में पंचतत्व में विलीन हुए रुद्रपुर के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह
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भोपाल में पंचतत्व में विलीन हुए रुद्रपुर के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह
रुद्रपुर। कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे के शिकार रुद्रपुर के लाल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह शुक्रवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पंचतत्व में विलीन हो गए। भोपाल में उनके अंतिम संस्कार को रुद्रपुर के लोग टीवी पर देख रहे थे। इस दौरान श्मशान घाट पर मासूम बेटे ऋद्धिमान ने मुखाग्नि दी तो लोगों की आंखें भर्र आइं। वरुण सिंह अमर रहे के नारों से क्षेत्र गूंजने लगा। देश के लिए अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर कुर्बानी देने वाले वरुण की याद में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर जारी है। उनकी अंतिम यात्रा भोपाल में उमड़ी भीड़ की तरह ही रुद्रपुर में युवाओं ने कैंडल मार्च निकाल कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
करीब दो किलोमीटर लंबे निकले कैंडल मार्च के दौरान अमर शहीद वरुण अमर रहें के नारे लगते रहे। शुक्रवार को नगर पंचायत अध्यक्ष लालमती देवी की ओर से नगर पंचायत में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। चेयरमैन प्रतिनिधि वीरेंद्र शर्मा, सभासद अंकित मणि, उपेंद्र मास्टर, अजय जायसवाल, सुनील श्रीवास्तव, लल्लन गुप्ता आदि ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
शेरनी मां की कोख से पैदा हुए थे वरुण
आंसू पीकर वीरांगना मां ने दी बेटे को अंतिम विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की मां उमा देवी को पूरा देश सलाम कर रहा है। देश पर अपने जिगर के टुकड़े को कुर्बान करने वाली मां ने आंसू पीकर गर्व के साथ अपने शेर बेटे को अंतिम विदाई दी। उनके साहस का पूरा देश कायल हो गया।
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बेटे का शव भोपाल पहुंचते ही उन्होंने रोने-बिलखने के बजाय अपने बहू गीतांजलि की पीठ पर हाथ रख कर हौसलाअफजाई की। पत्रकारों के सवालों का जवाब काफी दृढ़ता से दिया। कहा कि हमने बेटा खोया नहीं है, बल्कि आजाद कर दिया है। वह देश और एयरफोर्स के लिए बना और देश के लिए कुर्बान हो गया। उसे एयरफोर्स से प्यार था। उसने अपनी पूरी जिंदगी शान से जी और शान से जा रहा है। वहां जहां भी रहे, खुुश रहे। उमा देवी ने बताया कि वरुण प्रीम्येच्योर बेबी था। छह माह के नवजात को पाल कर बड़ा किया। उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति ने उसे जांबाज सैनिक बनाया। मैं सैनिक परिवार से हूं, मैं मानव हूं, बेटे के जाने का दुख स्वाभाविक है, फिर दिल से कह रही हूं, मुझे कोई दुख नहीं है। वरुण ने हमें सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। देश के लिए मेरा परिवार पीढ़ियों को कुर्बान करने के लिए तैयार रहेगा।
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रुद्रपुर। कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे के शिकार रुद्रपुर के लाल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह शुक्रवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पंचतत्व में विलीन हो गए। भोपाल में उनके अंतिम संस्कार को रुद्रपुर के लोग टीवी पर देख रहे थे। इस दौरान श्मशान घाट पर मासूम बेटे ऋद्धिमान ने मुखाग्नि दी तो लोगों की आंखें भर्र आइं। वरुण सिंह अमर रहे के नारों से क्षेत्र गूंजने लगा। देश के लिए अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर कुर्बानी देने वाले वरुण की याद में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर जारी है। उनकी अंतिम यात्रा भोपाल में उमड़ी भीड़ की तरह ही रुद्रपुर में युवाओं ने कैंडल मार्च निकाल कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
करीब दो किलोमीटर लंबे निकले कैंडल मार्च के दौरान अमर शहीद वरुण अमर रहें के नारे लगते रहे। शुक्रवार को नगर पंचायत अध्यक्ष लालमती देवी की ओर से नगर पंचायत में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। चेयरमैन प्रतिनिधि वीरेंद्र शर्मा, सभासद अंकित मणि, उपेंद्र मास्टर, अजय जायसवाल, सुनील श्रीवास्तव, लल्लन गुप्ता आदि ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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शेरनी मां की कोख से पैदा हुए थे वरुण
आंसू पीकर वीरांगना मां ने दी बेटे को अंतिम विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की मां उमा देवी को पूरा देश सलाम कर रहा है। देश पर अपने जिगर के टुकड़े को कुर्बान करने वाली मां ने आंसू पीकर गर्व के साथ अपने शेर बेटे को अंतिम विदाई दी। उनके साहस का पूरा देश कायल हो गया।
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बेटे का शव भोपाल पहुंचते ही उन्होंने रोने-बिलखने के बजाय अपने बहू गीतांजलि की पीठ पर हाथ रख कर हौसलाअफजाई की। पत्रकारों के सवालों का जवाब काफी दृढ़ता से दिया। कहा कि हमने बेटा खोया नहीं है, बल्कि आजाद कर दिया है। वह देश और एयरफोर्स के लिए बना और देश के लिए कुर्बान हो गया। उसे एयरफोर्स से प्यार था। उसने अपनी पूरी जिंदगी शान से जी और शान से जा रहा है। वहां जहां भी रहे, खुुश रहे। उमा देवी ने बताया कि वरुण प्रीम्येच्योर बेबी था। छह माह के नवजात को पाल कर बड़ा किया। उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति ने उसे जांबाज सैनिक बनाया। मैं सैनिक परिवार से हूं, मैं मानव हूं, बेटे के जाने का दुख स्वाभाविक है, फिर दिल से कह रही हूं, मुझे कोई दुख नहीं है। वरुण ने हमें सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। देश के लिए मेरा परिवार पीढ़ियों को कुर्बान करने के लिए तैयार रहेगा।