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हाई फ्लड लेवल से ऊपर पहुंची गोर्रा, दोआबा के 52 गांवों में कोहराम, गांव खाली करने लगे लोग
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हाई फ्लड लेवल से ऊपर पहुंची गोर्रा, दोआबा के 52 गांवों में कोहराम, गांव खाली करने लगे लोग
रुद्रपुर/एकौना। रविवार को गोर्रा नदी वर्ष 1998 के हाई फ्लड लेवल को पार कर 72.17 मीटर पर पहुंच गई। नदी का जलस्तर 23 साल के रिकॉर्ड को पार करने के बाद दोआबा और कछार के 116 गांवों में हाहाकार मचा है। विनाशलीला की आशंका में दोआबा के 52 गांवों में लोग मकान खाली कर रहे है। वह महिलाओं और बच्चों को रिश्तेेदारी में पहुंचा रहे हैं। हाई फ्लड लेवल के ऊपर पहुंची गोर्रा बंधे को ओवर फ्लो करने के करीब है। राप्ती नदी 72. 15 मीटर पर बह रही थी।
माझा भीमसेन में नदी के कटान से करीब दो मीटर बांध दरक कर नदी में विलीन हो गया है। यहां बांस, बल्ली लगाकर सिंचाई विभाग कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। नदी और बंधे के बीच पानी के भारी दबाव से राप्ती और गोर्रा के तटबंध जवाब देने लगे हैं। सौ किलोमीटर बने क्षेत्र में तटबंधों पर पचास जगह रिसाव हो रहा है। गोर्रा नदी पर स्थित तटबंधों पर सबसे अधिक रिसाव होने से कछार के 64 गांव सहित रुद्रपुर नगर पर खतरा मडरा रहा है। कछार और दोआबा सहित क्षेत्र के सभी नदियों के ओवर फ्लो हो जाने से बांध कटने पर भयावह मंजर की कल्पना कर लोग सिहर जा रहे है। 98 की प्रलयंकारी बाढ़ में अधिकत्तम जलस्तर 72.15 पर पहुंचा था। इस दौरान दोआबा और कछार में जन, धन की भारी हानि हुई थी। उस दौरान कई गांवों में अस्तित्व मिट गया। बाढ़ पीड़ित नदी के दिए जख्म से अब तक उबर नहीं पाए है। 98 की विनाशलीला से बचाने के लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग का प्रयास जारी है, लेकिन राप्ती और गोर्रा नदियों का रौद्र रूप भयानक विनाशलीला की ओर बढ़ रही है। बाढ़ के पानी से क्षेत्र के भिरवा, सचौली पटवनिया, इस्लामाबाद, रामपुर, गायघाट, सिकड़ियां, पिड़रा, पिड़हनी, कृतपुरा, सोनबह आदि गांवों में आवागमन बाधित है। बंधे और नदी के बीच बसे शीतल माझा, नरायनपुर, बहोरा दलपतपुर, छपरा बुजुर्ग गांव के लोगों के घरों में पानी घुस गया है। लोगों को आवागमन के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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रुद्रपुर/एकौना। रविवार को गोर्रा नदी वर्ष 1998 के हाई फ्लड लेवल को पार कर 72.17 मीटर पर पहुंच गई। नदी का जलस्तर 23 साल के रिकॉर्ड को पार करने के बाद दोआबा और कछार के 116 गांवों में हाहाकार मचा है। विनाशलीला की आशंका में दोआबा के 52 गांवों में लोग मकान खाली कर रहे है। वह महिलाओं और बच्चों को रिश्तेेदारी में पहुंचा रहे हैं। हाई फ्लड लेवल के ऊपर पहुंची गोर्रा बंधे को ओवर फ्लो करने के करीब है। राप्ती नदी 72. 15 मीटर पर बह रही थी।
माझा भीमसेन में नदी के कटान से करीब दो मीटर बांध दरक कर नदी में विलीन हो गया है। यहां बांस, बल्ली लगाकर सिंचाई विभाग कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। नदी और बंधे के बीच पानी के भारी दबाव से राप्ती और गोर्रा के तटबंध जवाब देने लगे हैं। सौ किलोमीटर बने क्षेत्र में तटबंधों पर पचास जगह रिसाव हो रहा है। गोर्रा नदी पर स्थित तटबंधों पर सबसे अधिक रिसाव होने से कछार के 64 गांव सहित रुद्रपुर नगर पर खतरा मडरा रहा है। कछार और दोआबा सहित क्षेत्र के सभी नदियों के ओवर फ्लो हो जाने से बांध कटने पर भयावह मंजर की कल्पना कर लोग सिहर जा रहे है। 98 की प्रलयंकारी बाढ़ में अधिकत्तम जलस्तर 72.15 पर पहुंचा था। इस दौरान दोआबा और कछार में जन, धन की भारी हानि हुई थी। उस दौरान कई गांवों में अस्तित्व मिट गया। बाढ़ पीड़ित नदी के दिए जख्म से अब तक उबर नहीं पाए है। 98 की विनाशलीला से बचाने के लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग का प्रयास जारी है, लेकिन राप्ती और गोर्रा नदियों का रौद्र रूप भयानक विनाशलीला की ओर बढ़ रही है। बाढ़ के पानी से क्षेत्र के भिरवा, सचौली पटवनिया, इस्लामाबाद, रामपुर, गायघाट, सिकड़ियां, पिड़रा, पिड़हनी, कृतपुरा, सोनबह आदि गांवों में आवागमन बाधित है। बंधे और नदी के बीच बसे शीतल माझा, नरायनपुर, बहोरा दलपतपुर, छपरा बुजुर्ग गांव के लोगों के घरों में पानी घुस गया है। लोगों को आवागमन के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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