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गंगा दशहरा पर्व : सरयू नदी तट पर जुटी भीड़, किया स्नान-दान
Thu, 01 Jun 2023 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 01 Jun 2023 12:21 AM IST
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बरहज में गंगा दशहरा पर्व पर स्नान-दान करते लोग संवाद
श्रीहरि का विशेष प्रकार से किया गया पूजा-अर्चन, एकादशी कथा का आस्थावानों ने किया श्रवण
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। गंगा दशहरा पर्व और एकादशी के लिन बुधवार को सरयू नदी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महापर्व पर सभी ने स्नान-दान करते हुए भगवान विष्णु का विशेष प्रकार से पूजा-अर्चन किया। जबकि लोगों ने एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया। बरहज स्थित निर्माणाधीन मोहन सेतु के निकट नदी तट पर भोर से ही नगर सहित सलेमपुर, गौरीबाजार और रामपुर कारखाना आदि जगहों से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिला-पुरुषों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। विद्वानों के अनुसार मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। भागीरथ के तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव ने उन्हें वरदान दिया था। जिससे भगवान शिव के जटा से होकर पृथ्वी पर उतरी थीं। जबकि ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी सर्वश्रेष्ठ और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। सरयू नदी तट के अलावा कपरवार संगम तट, पैना आदि जगहों पर लोगों ने स्नान कर पूजा-अर्चन कर दान-पुण्य किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। गंगा दशहरा पर्व और एकादशी के लिन बुधवार को सरयू नदी तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महापर्व पर सभी ने स्नान-दान करते हुए भगवान विष्णु का विशेष प्रकार से पूजा-अर्चन किया। जबकि लोगों ने एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया। बरहज स्थित निर्माणाधीन मोहन सेतु के निकट नदी तट पर भोर से ही नगर सहित सलेमपुर, गौरीबाजार और रामपुर कारखाना आदि जगहों से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिला-पुरुषों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। विद्वानों के अनुसार मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। भागीरथ के तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव ने उन्हें वरदान दिया था। जिससे भगवान शिव के जटा से होकर पृथ्वी पर उतरी थीं। जबकि ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी सर्वश्रेष्ठ और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। सरयू नदी तट के अलावा कपरवार संगम तट, पैना आदि जगहों पर लोगों ने स्नान कर पूजा-अर्चन कर दान-पुण्य किया।