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Deoria News: बारिश में कान में हो रहा फंगल इंफेक्शन, हो जाइए सचेत
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मेडिकल कॉलेज में कान की जांच करती डॉक्टर ।संवाद
- इलाज में लापरवाही से बढ़ सकती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बारिश में संक्रमण तेजी से फैलता है। फंगल इंफेक्शन के कारण कानों में परेशानी हो रही है। कान से पानी आना, खुजली, दर्द आदि से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज में राेजाना 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। डाॅक्टर मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इलाज में लापरवाही भारी पड़ सकती है।
मौसम में परिवर्तन होने से वातावरण में नमी हो जाती है। इसकी वजह से फंगल ग्रोथ करते हैं। जिन लोगों की इम्यूनिटी कम होती है, कान के पुराने मरीज हैं, जो तनाव में रहते हैं और शुगर के मरीज होते हैं। उन्हें दिक्कत होती है। कान खुजलाने के बाद फंगस के संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। इसमें कान से पानी आने लगता है। खुजली, दर्द होता है। कान में भारीपन और सुनाई कम देने लगता है। इस तरह की समस्या लोगों को आ रही है। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों इस तरह की शिकायत लेकर लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
शनिवार को ईएनटी विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने करीब 180 मरीजों का इलाज किया। इसमें करीब पचास मरीज फंगल इंफेक्शन से पीड़ित रहे। इसमें युवकों और बुजुर्गों की संख्या अधिक रही। डॉक्टर ने जांच के बाद दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी।
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वातावरण में नमी के कारण फंगल इंफेक्शन, एस्पर जिलस फंगल, कैंडिडा का संक्रमण बढ़ जाता है। शुगर के मरीजों, तनाव और कान के पर्दे के छेद वाले मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। उनके कान में संक्रमण हो जाता है। कान से पानी आता है। सफेद व काला मवाद निकलता है। कान गिला, खुजली, दर्द होता है। इस तरह का लक्षण दिखने पर तत्काल ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। कान के पर्दे पर असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं कान की हड्डी भी खराब हो सकती है।
-डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता,
ईएनटी, विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज
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यह बरतें सावधानी
- कान में तेल न डालें
- कान में पानी न जाने पाए
- सफाई पर ध्यान दें
- कान को किसी नुकीले चीज से साफ न करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बारिश में संक्रमण तेजी से फैलता है। फंगल इंफेक्शन के कारण कानों में परेशानी हो रही है। कान से पानी आना, खुजली, दर्द आदि से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज में राेजाना 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। डाॅक्टर मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इलाज में लापरवाही भारी पड़ सकती है।
मौसम में परिवर्तन होने से वातावरण में नमी हो जाती है। इसकी वजह से फंगल ग्रोथ करते हैं। जिन लोगों की इम्यूनिटी कम होती है, कान के पुराने मरीज हैं, जो तनाव में रहते हैं और शुगर के मरीज होते हैं। उन्हें दिक्कत होती है। कान खुजलाने के बाद फंगस के संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। इसमें कान से पानी आने लगता है। खुजली, दर्द होता है। कान में भारीपन और सुनाई कम देने लगता है। इस तरह की समस्या लोगों को आ रही है। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों इस तरह की शिकायत लेकर लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
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शनिवार को ईएनटी विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने करीब 180 मरीजों का इलाज किया। इसमें करीब पचास मरीज फंगल इंफेक्शन से पीड़ित रहे। इसमें युवकों और बुजुर्गों की संख्या अधिक रही। डॉक्टर ने जांच के बाद दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी।
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वातावरण में नमी के कारण फंगल इंफेक्शन, एस्पर जिलस फंगल, कैंडिडा का संक्रमण बढ़ जाता है। शुगर के मरीजों, तनाव और कान के पर्दे के छेद वाले मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। उनके कान में संक्रमण हो जाता है। कान से पानी आता है। सफेद व काला मवाद निकलता है। कान गिला, खुजली, दर्द होता है। इस तरह का लक्षण दिखने पर तत्काल ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। कान के पर्दे पर असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं कान की हड्डी भी खराब हो सकती है।
-डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता,
ईएनटी, विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज
यह बरतें सावधानी
- कान में तेल न डालें
- कान में पानी न जाने पाए
- सफाई पर ध्यान दें
- कान को किसी नुकीले चीज से साफ न करें