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तीन विभागों की खींचतान में अटका फोरलेन निर्माण

Tue, 30 Jun 2020 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2020 11:24 PM IST
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fourlane in pending
बैतालपुर में अधूरा पडा फोरलेन लोगो के लिए बना मुसीबत। - फोटो : DEORIA
तीन विभागों की खींचतान में अटका फोरलेन निर्माण
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पीडब्ल्यूडी का आरोप: वन और बिजली निगम का नहीं मिल रहा सहयोग
सड़क पर आएदिन हो रहे हादसे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नौ दिन चले अढ़ाई कोस की तर्ज पर शुरू हुुए फोरलेन निर्माण का कार्य इस साल भी पूरा होने की उम्मीद नहीं है। इसका कारण तीन विभागों की आपसी खींचतान बताई जा रही है। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बिजली निगम बना है। तार शिफ्ट न होने के चलते फोरलेन की परिधि में आने वाले पेड़ों की कटाई नहीं हो पा रही है और न ही निर्माण कार्य आगे बढ़ पा रहा है। तीनों विभाग एक-दूसरे को पत्र भेजकर कागजी लड़ाई लड़ने में जुटे हैं। इधर, अधूरे निर्माण के चलते राहगीर आएदिन हादसों के शिकार हो रहे हैं। बैतालपुर कस्बा में दो दिन पहले दो लोगों की मौत हो चुकी है। दर्जनों लोग अबतक घायल हो चुके हैं। यही हाल सलेमपुर के समीप है। यहां भी अधूरे निर्माण के कारण राहगीर अक्सर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
इनसेट
क्या है पूरा मामला
गोरखपर सीमा से देवरिया शहर होते हुए सलेमपुर तक फोरलेन निर्माण के लिए शासन ने 225 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से फोरलेन निर्माण के अलावा पेयजल पाइप, तार शिफ्टिंग व निर्माण की परिधि में आने वाले पेड़ों की कटाई की जानी थी। प्रस्ताव के दौरान पीडब्ल्यूडी ने संबंधित विभागों से एस्टीमेट मांगे थे। बजट आवंटित होने के बाद इन विभागों को धनराशि भुगतान की गई। बावजूद इसके कहीं तार तो कहीं पेड़ निर्माण में रोड़ा बने हैं।
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वर्जन
फोरलेन की परिधि में आने वाले पेड़ों की कटाई के लिए दो साल पहले ही वन निगम को करीब चार करोड़ रुपये भुगतान कर दिए गए हैं। फिर भी निगम बैतालपुर में 32 पेड़ और सलेमपुर में करीब सौ पेड़ों की कटाई नहीं करा रहा। इसके चलते निर्माण कार्य बाधित है।
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- अशोक कुमार, एक्सईएन पीडब्लूडी प्रांतीय खंड।
वन निगम ने फोरलेन की परिधि में आने वाले 8500 पेड़ कटवा दिए हैं। वहीं का पेड़ बचा है जहां बिजली के तार हैं। विद्युत निगम सहयोग नहीं दे रहा है। इसके चलते बैतालपुर और सलेमपुर में पेड़ नहीं कट पा रहे हैं।

- डीएम मिश्रा, डीएलएम।
तार हटवाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। हमें सिर्फ पर्यवेक्षण करना है। इसके एवज में कार्य के लिए बने एस्टीमेट की 15 प्रतिशत धनराशि पीडब्ल्यूडी भुगतान करता है।
- रामसेवक, एक्सईएन विद्युत निगम।
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