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Deoria News: एजेंटों के दबाव से तंग महिलाओं ने छोड़ दिया घर-बार
Sat, 29 Mar 2025 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:19 AM IST
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कर्जदार निर्मला की झोपड़ी।
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। समूह लोन की किस्त समय से नहीं चुकता करने पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट महिलाओं पर जुल्म और जबरदस्ती करते हैं। यह दर्द कर्ज की बोझ से दबी महिलाओं का है।
रोज-रोज घर पर आकर बेइज्जत करने से तंग आ चुकीं कई महिलाएं गांव से पलायन कर दिल्ली और मुंबई में मजदूरी कर रही हैं। गांव वाले घर पर या तो ताला लगा है या फिर कोई और रह रहा है।
लार थाना क्षेत्र के ठाकुर गौरी गांव के रुदल के मुताबिक, पत्नी निर्मला ने जरूरत पड़ने पर एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 80 हजार रुपये कर्ज लिया था। तय समय के अनुसार किस्त नहीं चुका पा रही थी। कंपनी के एजेंट घर पहुंचकर किस्त जमा करने का दबाव बना रहे थे। इससे बचने के लिए निर्मला दिल्ली चल गईं। वहां एक कंपनी में काम कर रही है। राजेश के मुताबिक घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर पत्नी सुमन ने समूह से कर्ज लिया।
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जब तक रुपये मिलते थे, तब तक निर्धारित किस्त जमा करती थी। किस्त जमा करने में देरी होने पर एजेंट घर पहुंच प्रताड़ित करते थे। इसी वजह से पत्नी एक शहर में चली गई है। हम घर पर रहकर मजदूरी करते हैं।
इसी गांव के बालचंद की पत्नी प्रमिला भी समूह लोन का रकम वापस नहीं कर पाईं तो दिल्ली चली गईं। बाल चंद घर पर हैं। यही हाल रीमा का है। चार-पांच माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया था। एजेंट रुपये जमा करने का लगातार दबाव बना रहे थे।
इससे आजिज आकर किसी शहर के तरफ पलायन कर गईं। गांव की कुछ अन्य महिलाओं ने भी अलग-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से समूह लोन ले रखा है। एक दिन किस्त चुकाने में समय अधिक होता है तो एजेंट प्रताड़ित करने लगते हैं।
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देवरिया। समूह लोन की किस्त समय से नहीं चुकता करने पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट महिलाओं पर जुल्म और जबरदस्ती करते हैं। यह दर्द कर्ज की बोझ से दबी महिलाओं का है।
रोज-रोज घर पर आकर बेइज्जत करने से तंग आ चुकीं कई महिलाएं गांव से पलायन कर दिल्ली और मुंबई में मजदूरी कर रही हैं। गांव वाले घर पर या तो ताला लगा है या फिर कोई और रह रहा है।
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लार थाना क्षेत्र के ठाकुर गौरी गांव के रुदल के मुताबिक, पत्नी निर्मला ने जरूरत पड़ने पर एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 80 हजार रुपये कर्ज लिया था। तय समय के अनुसार किस्त नहीं चुका पा रही थी। कंपनी के एजेंट घर पहुंचकर किस्त जमा करने का दबाव बना रहे थे। इससे बचने के लिए निर्मला दिल्ली चल गईं। वहां एक कंपनी में काम कर रही है। राजेश के मुताबिक घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर पत्नी सुमन ने समूह से कर्ज लिया।
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जब तक रुपये मिलते थे, तब तक निर्धारित किस्त जमा करती थी। किस्त जमा करने में देरी होने पर एजेंट घर पहुंच प्रताड़ित करते थे। इसी वजह से पत्नी एक शहर में चली गई है। हम घर पर रहकर मजदूरी करते हैं।
इसी गांव के बालचंद की पत्नी प्रमिला भी समूह लोन का रकम वापस नहीं कर पाईं तो दिल्ली चली गईं। बाल चंद घर पर हैं। यही हाल रीमा का है। चार-पांच माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया था। एजेंट रुपये जमा करने का लगातार दबाव बना रहे थे।
इससे आजिज आकर किसी शहर के तरफ पलायन कर गईं। गांव की कुछ अन्य महिलाओं ने भी अलग-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से समूह लोन ले रखा है। एक दिन किस्त चुकाने में समय अधिक होता है तो एजेंट प्रताड़ित करने लगते हैं।