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Deoria News: सरयू के रेत में खीरा-ककड़ी और तरबूज से किस्मत चमका रहे किसान
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बरहज। सरयू नदी के रेतीले भू-भाग पर 40 परिवार के लोग आश्रित हैं, जो खीरा-ककड़ी और तरबूज आदि फसलों का उत्पादन कर अपनी किस्मत चमका रहे हैं। इसकी खेप जनपद सहित गैर जनपद में भी भेजी जाती है।
थाना घाट से सरयू के दक्षिणायन होने के कारण नदी करीब दो से तीन किलोमीटर दूर चली गई हैं। जिससे घाट और नदी के बीच का रेतीला भू-भाग 40 परिवार के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। प्रत्येक वर्ष किसान मोहन सेतु से रगरगंज स्थित मुक्तिपथ तक ढाई-ढाई बीघा रेतीली जमीन पर जनवरी माह में खीरा-ककड़ी आदि फसलों की बुआई करते हैं। नगर के श्याम राजभर, शिववचन, नसीर, बशीर आदि का कहना है कि रेतीले भू-भाग पर प्रत्येक वर्ष समय से फसलों की बुआई किया जाता है। जो नदी मेंं पानी बढ़ जाने के कारण जून माह में समाप्त हो जाता है। जबकि फसल भी तैयार हो जाती है। लोगों का कहना है कि यहां भटनी, सलेमपुर, भागलपुर, गौरीबाजार, कुशीनगर आदि जगहों के छोटे-बड़े कारोबारी उपज ले जाने आते हैं। किसानों का कहना है कि बीज मंहगा होने के बाद भी 50 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यदि नदी साथ दे देती है। तो कमाई और भी बढ़ जाती है। मोहन सेतु के निकट से पैना के एकडंगा तक रेतीला भू-भाग है। जो किसानों के लिए सोने की खान से कम नहीं है।
सब्जी बोने के लिए पट्टे पर लेते हैं जमीन
बरहज। नगर के सरयू नदी तट स्थित रेतीले भू-भाग पर 40 घरों के किसान आश्रित हैं। सभी किसान नदी का पानी पीछे हटने पर करीब चार से छह माह की खेती करते हैं। जिससे उन्हें परिवार की जीविका चलाने के लिए अच्छा-खासा लाभ होता है। लोगों के अनुसार प्रत्येक वर्ष सब्जी की खेती करने के लिए जमीन पट्टा कराना पड़ता है। जिसे कुछ लोग मौखिक तौर पर मिलने वाली जमीन का रसूम जमा कराते हैं।
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थाना घाट से सरयू के दक्षिणायन होने के कारण नदी करीब दो से तीन किलोमीटर दूर चली गई हैं। जिससे घाट और नदी के बीच का रेतीला भू-भाग 40 परिवार के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। प्रत्येक वर्ष किसान मोहन सेतु से रगरगंज स्थित मुक्तिपथ तक ढाई-ढाई बीघा रेतीली जमीन पर जनवरी माह में खीरा-ककड़ी आदि फसलों की बुआई करते हैं। नगर के श्याम राजभर, शिववचन, नसीर, बशीर आदि का कहना है कि रेतीले भू-भाग पर प्रत्येक वर्ष समय से फसलों की बुआई किया जाता है। जो नदी मेंं पानी बढ़ जाने के कारण जून माह में समाप्त हो जाता है। जबकि फसल भी तैयार हो जाती है। लोगों का कहना है कि यहां भटनी, सलेमपुर, भागलपुर, गौरीबाजार, कुशीनगर आदि जगहों के छोटे-बड़े कारोबारी उपज ले जाने आते हैं। किसानों का कहना है कि बीज मंहगा होने के बाद भी 50 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यदि नदी साथ दे देती है। तो कमाई और भी बढ़ जाती है। मोहन सेतु के निकट से पैना के एकडंगा तक रेतीला भू-भाग है। जो किसानों के लिए सोने की खान से कम नहीं है।
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सब्जी बोने के लिए पट्टे पर लेते हैं जमीन
बरहज। नगर के सरयू नदी तट स्थित रेतीले भू-भाग पर 40 घरों के किसान आश्रित हैं। सभी किसान नदी का पानी पीछे हटने पर करीब चार से छह माह की खेती करते हैं। जिससे उन्हें परिवार की जीविका चलाने के लिए अच्छा-खासा लाभ होता है। लोगों के अनुसार प्रत्येक वर्ष सब्जी की खेती करने के लिए जमीन पट्टा कराना पड़ता है। जिसे कुछ लोग मौखिक तौर पर मिलने वाली जमीन का रसूम जमा कराते हैं।
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